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*ख़ूनी चंद्रग्रहण और मोदी सरकार !*

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 – सुसंस्कृति परिहार 

विघ्न-विनायक गणेश तो विदा हो गए अब देश के विघ्नों का हरण कौन करेगा ? इधर खूनी आभा लिए चंद्रग्रहण आ पहुंचा है। शीतलता के, लिए प्रसिद्ध चांद का  सुर्ख लाल चांद  होना क्या सचमुच देश पर बड़े ख़तरे मंडराने का ,या बड़ी क्रांति का संदेश दे रहा है। 

यह ख़बर भी प्रसारित की जा रही है जब कोकिल कंठी लता मंगेशकर जी की मृत्यु हुई थी उस दिन भी रक्तिम चंद्र ग्रहण था। बताया जा रहा है कि यह ग्रहण महिलाओं पर ज्यादा असर दिखाएगा। मुझे तो भारत मां की चिंता सता रही है।अभी तो पीएम को मां की गाली पर जिस तरह सार्वजनिक बयानों की बाढ़ ने मां के अपमान को उजागर किया और खुद पीएम जैसे बेटे ने इस अपमान को देश की मां बहिन बेटियों का अपमान बताया तब अब बचता क्या है सिर्फ भारत माता ही ना।

वैसे भी पिछले महीनों से लगातार भारत मां का विदेशों में जो अपमान भारतीय सरकार की बदौलत हुआ है वह कम नहीं है। सत्य, अहिंसा और नारी को देवी मानने वाले देश में झूठ,हिंसा और नारी अपमान की बड़ी संख्या में घटनाएं सामने आईं हैं ये कितना शर्मनाक है सत्तारूढ़ सरकार की एक महिला सांसद चर्चित अभिनेत्री  कंगना देश के मुखिया पर बलात्कार का खुलकर  आरोप लगा रही है।देश के महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी से सुप्रीम कोर्ट उलझ रहा है। विपक्ष वोट चोर गद्दी छोड़ का कच्चा चिट्ठा लिए खड़ा है। सरकार के ही अपने सांसद सुब्रमण्यम स्वामी रोजाना सरकार के मुखिया को आईना दिखा रहे हैं। सरकार के पितामह उसकी आलोचना करते थक नहीं रहे और खुद को भारतीय संस्कृति का पुजारी बताते हुए मथुरा काशी को फिर ज़िंदा कर रहे हैं। देश में हाहाकार है बादल फटने और बाढ़ के प्रकोप से भारत मां घबराई हुई है। कुछ लोगों का ख़्याल है कि यह पाकिस्तान के पानी रोकने का अभिशाप है। अब रखो पानी कितना चाहिए। भूवैज्ञानिकों का मानना है कि हंसती खिलखिलाती नदियों के प्रवाह को जब रोका जायेगा तो ऐसा होगा ही।

 फिर भी देश में चारों ओर जो बर्बादी  चिन्हित हो रही है क्या यह ख़ूनी चंद्रग्रहण के पूर्व की एक झांकी है।आगे बहुत कुछ बर्बाद होने वाला है।

भारत मां सचमुच ख़तरे में है।

जी हां,सच यही है देश दुर्दशा की दिशा में बढ़ता चला जा रहा है। सिद्धांत और रीढ़ विहीन सरकार की अपनी ढुलमुल विदेश नीति ने भारत मां को बाजार का खिलौना बना दिया। डोनाल्ड नहीं तो जिनपिंग। और फिर फिर डोनाल्ड।घर के अंदर कोहराम है संघ और भाजपा की फूट बढ़ रही है। विपक्ष की आवाज़ का पुरजोर दमन हो रहा है। संविधान की आबरु ख़तरे में है।चोरी से बनी सरकारों की असलियत सामने आती जा रही। न्यायाधीशों पर दबाव जारी है।

ऐसे हालात में उपराष्ट्रपति चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी को ख़तरा बढ़ा हुआ है। बिहार में एसआईआर पर रोक और भाजपा शासित बिहार में मोदी की मां के अपमान पर बंद फ्लाप हो गया।यहा़ आगामी माह चुनाव होने वाले वहां हवा में बदलाव दिखाई दे रहा है। प्रतिपक्ष हावी होता जा रहा है।

कुल मिलाकर इस ग्रहण का असर भारत माता की जबरिया जय कहलाने वाली सरकार को लगता दिख रहा है। नितिन गडकरी और अंबानी बंधुओं की मोदी शाह से बढ़ती दूरी सरकार का खेल बिगाड़ने में लगी है। नायडू और नीतीश को साधने की साधना चल रही। दोनों के बेटों पर सरकार का दुलार अचानक बढ़ा है।देखना यह कि इस ख़तरनाक चंद्रग्रहण से भाजपा कैसे निज़ात पाती है।

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