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बोल री कठपुतली बोल !

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सुसंस्कृति परिहार

 साहिब जी ग्रह दशाएं आजकल ठीक नहीं चल रहीं हैं।भारत के ज्योतिषी भी चालाक हो गए वे ख़तरों से सावधान भी नहीं करते। पंजाब में वे जान बचा के भागे और अब डाभोस में टेलीप्राम्पटर ने खराब होकर उनके धाराप्रवाह भाषणों की पोल खोल दी।एक ही तो भाजपा के पास ऐसा नग है जिसका इस्तेमाल वे केदारनाथ से केरल तक बखूबी करते हैं।अब हालत ऐसी बन पड़ी है कि ना उगलते बन रहा और ना लीलते वह भी डाभोस में।जिससे देश के प्रधानमंत्री का डंका ऐसा पिटा है कि लगता है कि वे मुंह दिखाने लायक नहीं बचे।संघ के इशारों पर नाचने वाली कठपुतली लेकिन अटल जी के शब्दों में कहें तो हार नहीं मानूंगा,रार नहीं मानूंगा यानि कठपुतली को बोलना ही होगा।ये सब देश और गांव की जनता कहां समझती है? इसलिए भागवत की मंशानुरूप भागवत चलती रहेगी। राहुल गांधी भी कहते हैं डरो नहीं निर्भय रहो। दोनों की बात मानेंगे साहिब ।अभी तो 2024 का इम्तिहान बाकी है।

 इसलिए प्रधानमंत्री अपनी इमेज बचाने के लिये बहाने बनाने लगे। वो परेशान होकर वर्ल्ड इकनॉमिक Tell के चेयरमैन क्लॉस शेवाब से पूछते हैं कि आवाज़ आ रही है ना। जिसके जवाब में वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के चेयरमैन क्लॉस शेवाब  कहते हैं कि आवाज़ आ रही है, हजारों लोग आपको सुन रहे हैं, आप बोलिए प्रधानमंत्री महोदय।उनकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई।सब देखते रह गए। 
काफी विलम्ब के बाद कठपुतली ने पूरा भाषण भरे गले से पढ़ लिया।देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला था।इससे दो बातें साफ हो गई कि पी एम लिखा हुआ पढ़ते हैं जो काबिलीयत हम सब समझते हैं वह उनके पास नहीं। दूसरी बात यह बात सिद्ध हो गई कि राहुल गांधी सच बोलते हैं कि वे टेलीप्राम्पटर पर पढ़ते हैं।तीसरे अब समझ में ये भी आ गया कि वे प्रेस से बात क्यों नहीं करते क्योंकि वहां सटीक और तर्कपूर्ण तरीके से तत्काल जवाब देना होता है।वे तो कठपुतली जैसे है भला जवाब कैसे दे सकते हैं?भाजपा में इस बात पर ऐंठ अभी बाकी है। साहिब व्यर्थ मात खा गए थोड़ी देर चक्कर खाने का अभिनय कर लेते।तब तक सब ठीक हो जाता।पर कालगति को कोई नहीं टाल सकता।
 इस घटना के बाद सबसे ज्यादा डर तो उसे लग रहा होगा जिसने टेलीप्राम्पटर को लगाया होगा।हो सकता वह कोई कांग्रेसी रहा हो, पंजाब का खालिस्तानी हो, पाकिस्तान का एजेंट हो या फिर कोई तालिबानी हरकत हो।जिसने भारतीय पी एम को असली मुखौटा दिखाने की ज़ुर्रत की। लेकिन इतनी संगीन सुरक्षा कवच को छोड़कर प्राम्पटर का वहां तक पहुंचना संभव नहीं लगता इसमें मुझे तो किसी संघी की बू आ रही है वे ही इस वक्त सबसे भरोसेमंद बनकर ‘मतलब निकल गया तो पहचानते नहीं ‘मिसरा के साथ लगातार सक्रिय हैं। वैसे यह तो संघ ने पूर्ववत तय ही कर दिया था कि पी एम राज्य चुनावों में नहीं जायेंगे। इसलिए उन्होंने अपनी तमाम कोशिशें चुनाव पूर्व ही पूरी कर दी थीं।हां पंजाब में खैरात की घोषणा नहीं कर पाए। अच्छा ही हुआ वह तो हाथ से पहले ही जा चुका है किसान आज भी उनसे ख़फ़ा हैं।खैरात देने बाद खाली हाथ लौटना अखरता भी।
बहरहाल बात पी एम के भाषण की पोल पट्टी पर केन्द्रित की जाय तो लगता तो यही है यह सब साजिश के तहत ही किया जा रहा है उधर अमित शाह का गृहमंत्रालय पी एम की सुरक्षा में चूकता है और इधर विदेश मंत्रालय उनके भाषण में अवरोधक बनता है।ये संयोग नहीं करमगति  लेखा है जस करनी तस भरनी। संघ का भरोसा कैसा और कब तक आप करेंगे।बिसात बिछ चुकी है आपको हटाने की तैयारी हो चुकी है।आपका यश कुछ ज्यादा हुआ हो या नहीं पर अपयश इतना ज्यादा हो चुका है कि आपको हटाकर ही साफ पाक दिखने की कोशिश जारी है। जैसे गांधी को मरवाकर गोडसे की हिंदु महासभा बदनाम हुई।संघ आज भी दूध का धुला बना हुआ है ।दुख होता है और इन सात आठ सालों में जनता के लिए यदि शिद्दत से कुछ काम किया होता तो वह शायद काम आ जाता । गुजरात नरसंहार,बाबरी का ढहाना,माब लिंचिंग,कोरोना से हुई लाखों लाख मौतें,एक एक कर देश की बिकती संपत्ति,सुरसा सी मंहगाई,छिनते रोजगार और बढ़ती बेरोजगारी ।शिक्षा स्वास्थ्य की मंहगी व्यवस्था।आदमी कैसे चैन से रह सकता है?राम मंदिर और धारा 370हटने से कुछ भी भला हुआ क्या जनता का ? तो सोचिए किया क्या ?जिन अमीरों का पेट भरा है वे तो सत्ता बदलते ही रुख बदल देंगे।मोटा भाई भी अब पी एम बनने की जुगत में है।इसे समझ लीजिए। इससे पहले कि आप पर और गंभीर आंच ना आए झोला उठाकर चल देना ही बेहतर होगा।
एक कठपुतली की तरह इशारों पर नाचना बहुत हो चुका ।थोड़ा सी जो जीवन शेष है उसमें दिल से कुछ बोल देने से हल्कापन महसूस होगा।ख़तरा तो बराबर है पंजाब में जो हुआ उसमें आपकी सरकार के करीबे थे। दुनिया में बेइज्जती करवाने वाले भी यकीन मानिए करीबी ही होंगे । आपके जीवन को  ख़तरा बढ़ा है।सत्तालोभ छोड़कर इसे कम करिए। कठपुतली अब नहीं बोलेगी। कोशिश करें चलते-चलते आप ही कुछ बोल लें जनता ने अभी आपको सुना कहां है ?

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