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बुरी तरह से फंस गए हैं ब्रजभूषण शरण सिंह

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मुनेश त्यागी 

       भारतीय महिला पहलवानों के बेबाक आरोपों से भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष ब्रजभूषण शरण सिंह बुरी तरह से फंस गए हैं। इन आरोपों को केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी गंभीर बताया है। भारतीय महिला पहलवानों ने कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं।

     इन महिला पहलवानों के साथ सरकार के कई मंत्री बातचीत कर मामले का समाधान निकालने की कोशिश में है। पहलवानों की खेल मंत्री से हुई बातचीत के बाद मिले आश्वासन पर पहलवानों ने धरना समाप्त कर दिया है। अब पहलवानों के आरोपों की जांच होगी। इसके लिए एक कमेटी का गठन किया गया है।

      जंतर मंतर पर धरना दे रहीं पहलवानों को अन्य कई साथी पहलवानों और खिलाड़ियों का समर्थन मिल रहा है। धरने में सैकड़ों पहलवान और खिलाड़ी शामिल हैं जिनमें 40 से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहलवान शामिल हैं। इन पहलवानों का कहना है कि हमारी सरकार से कोई लड़ाई नहीं है, लडाई यौन शोषण करने वाले अध्यक्ष से है। जिन लड़कियों का शोषण हुआ है, वे खुद ही सबूत हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि कुश्ती महासंघ के बृजभूषण के लोग पूरे कुश्ती महासंघ में फैले हुए हैं, अतः इसे भंग किया जाना चाहिए। इसके अध्यक्ष पद से हटने के बाद ही इसके लोग बाहर होंगे। अगर इसके सारे लोग बाहर नहीं होंगे तो हमें न्याय नहीं मिलेगा।

       अब यह मामला बहुत तेज गति से फैल गया है। इसके समर्थन में कई हस्तियां जुट गई हैं। सी पी आई एम की वृंदा करात और सीपीआई के सांसद बिनोय विश्वम और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी इन पहलवानों का समर्थन किया है। द्रोणाचार्य अवार्ड विजेता महावीर और भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष पीटी उषा ने भी इनका समर्थन किया है।

      मामला इतना गंभीर है कि लखनऊ में लगने वाला राष्ट्रीय महिला कुश्ती प्रशिक्षण शिविर भी रद्द कर दिया गया है। खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने हिमाचल में चल रही बैठक को बीच में छोड़कर आंदोलनकारियों से बातचीत की है और उचित कार्रवाई करने की बात कही है। कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह ने इन आरोपों से इनकार कर दिया है उन्होंने कहा है कि हम बोल देंगे तो सुनामी आ जाएगी। उन्होंने इस्तीफा देने से भी मना कर दिया है।

      कुश्ती संघ के संविधान और नियमों के वर्तमान स्वरूप के तहत इन खिलाड़ियों को न्याय मिलने के कोई आसार नहीं है। उसके पदाधिकारियों के चुनावों में नियमों का उल्लंघन किया गया है। संघ के नियमों के अनुसार सरकार अध्यक्ष समेत पूरी बॉडी को भंग कर सकती है, इस मामले में काफी समय तक, आश्चर्यजनक रूप से चुप्पी साधे रखी गई हैं। शिकायत करने पर भी समय से खिलाड़ियों की समस्याओं को नहीं देखा और सुना गया है। खिलाड़ियों की मांगे हैं कि कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष को बर्खास्त किया जाए और कुश्ती महासंघ को तुरंत बर्खास्त किया जाए और उसमें से अध्यक्ष के लोगों को वहां से हटाया जाए।

       इस मामले को सुलझाने के लिए भारतीय ओलंपिक संघ की बैठक हुई जिसमें एक कमेटी का गठन किया गया है। इसमें मैरी कौम को अध्यक्ष बनाया गया है। यह एक बहुत बड़े अचम्भे की बात है कि पूरे देश में खिलाड़ियों की कोई यूनियन या संघ नहीं है जो खिलाड़ियों की समस्याओं और शिकायतों को अधिकारियों के सामने रख सके। यही कारण है एक प्रभावी संघ न होने की वजह से अनेक खिलाड़ियों को उत्पीड़न, हिंसा और समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

      महिला पहलवानों के ये आरोप बहुत गंभीर हैं। इन आरोपों ने हजारों लाखों मां-बाप का विश्वास और हौंसला डिगा दिया है और उनमें रोष ओर गुस्सा फैल गया है।अब उन्होंने निश्चय कर लिया है कि इन हालात के रहते हुए वे अपनी बच्चियों को खेलों में नहीं भेजेंगे। यहां स्वर्ग नहीं, नरक फैला हुआ है। इस मामले ने सरकार की “बच्ची बचाओ बेटी पढ़ाओ” की मुहिम को धक्का पहुंचाया है। अब तो मां बाप “बच्ची बचाओ, बच्ची बचाओ” में लग गए हैं।

       इस मामले की गंभीरता से प्रधानमंत्री मोदी को अक्टूबर 2021 में ही अवगत करा दिया गया था मगर मोदी पिछले सवा साल से इस मामले में चुप्पी साधे रहे। उन्होंने इस सुनामी को रोकने की कोशिश नहीं की। यह समझ में नहीं आ रही है।

        यहीं पर सबसे अहम सवाल उठता है कि इतनी बड़ी-बड़ी बातें और नारों के बाद भी औरतों की स्थिति बद से बदतर ही क्यों होती जा रही है? अब तो देश-विदेश में भारत का नाम रोशन करने वाली पहलवान भी सुरक्षित नहीं रह गई हैं। इसका मुख्य कारण हमारे समाज में फैली औरत विरोधी पितृसत्तात्मक मानसिकता और सोच है जो औरतों को आजादी के 75 साल बाद भी, “मनोरंजन का सामान और भोग्या” ही समझती चली आ रही है। उनका कोई स्वतंत्र गरिमामय व्यक्तित्व नहीं है। इसी सोच के कारण औरतों पर घर और बाहर लगातार यौन हमलों और हिंसा से जूझना पड़ रहा है। जब तक यह सोच और मानसिकता नहीं बदली जाती, तब तक औरतों के खिलाफ जारी हिंसा और यौन हमले थमने वाले नहीं हैं।

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