
-सुसंस्कृति परिहार
हमारे देश में आजकल एक चलन बहुत ज़्यादा उफ़ान पर है वह है किसी भी तरह का दान,मदद या सहयोग करने वाले संगठन फोटो ज़रुर लेते हैं ताकि सनद बनी रहे। जिस देश में गुप्त रूप से मदद या दान करने की परम्परा रही हो उस देश में एक दर्जन केले या शाल वगैरह प्रदान करते हुए इतने हाथ लगाए जाते हैं कि देखकर बड़ा अजीब लगता है कभी कभी ऐसे दानदाताओं के चेहरे देखकर तरस भी आता है।लगता है जैसे वे पहली बार जीवन में पुण्य कार्य कर रहे हैं और इस मौके को चूकना नहीं चाहते,फोटो के रुप में यादगार बनाना चाहते हैं।
बहरहाल यह हाल टुटपुंजिया संगठनों से लेकर बड़े बड़े संगठनों में बीमारी की तरह फ़ैल चुका है।इस मामले में हमारे आदर्श नेता ही होते हैं फ़र्क ये होता है वह सरकारी पैसों पर अपना नाम करते हैं और तमाम संगठन परस्पर सहयोग से इसे पूरा करते हैं। हम सभी जानते हैं कि प्रधानमंत्री जी आज दुनियां के सबसे बड़े फोटो जीवी हैं।वे तो अपनी मां से मिलने जाते तो क्षण मात्र उनके साथ बैठते उनका आशीर्वाद लेते कुछ खाने की कोशिश करते और चरणस्पर्श करके मां से कुछ रुपया लेते और काफ़िले के साथ निकल पड़ते।अगले ही पल तमाम चित्र और वीडियो परोस दिया जाता मोदी चैनलों पर।हर साल लगभग एक जैसा दृश्य हम तब तक देखते रहे जब तक माताजी ज़िंदा रहीं। 90वर्षीय मां का नोटबंदी के दौरान लाईन में लगा चित्र सबको झिंझोड़ गया।मां और देश को मर्मांतक पीड़ा दे गया।मां को कंधा देते वक्त शिवराज सिंह आगे आ जाते हैं तो उन्हें धकेल अपना चेहरा दिखाने का वीडियो भी बड़ा कारुणिक था।लेकिन फोटो जीवी को इससे फर्क नहीं पड़ता है। उन्हें तो अपना चेहरा दिखाना होता है।
तो ऐसे साहिब जी का असर नेताओं में भी इस कदर परवान चढ़ा कि आतंकियों से मुठभेड़ में आगरा के शहीद कैप्टन शुभम गुप्ता के घर भाजपा सरकार के मंत्री योगेंद्र उपाध्याय जब शहीद की मां को चेक देने गए तो शुभम की मां की इच्छा का अनादर करते हुए बेशर्मी से मंत्री जी ने चेक देने की फोटो खिंचवाई।मां ने अपने हाथों में चेक नहीं लिया तो मंत्री जी। चेक लेकर रोती बिलखती चीखती रही -‘ये प्रदर्शनी मत लगाओ भाई ‘कहने के बावजूद पर फोटो जीवी मंत्री नहीं माने ये कैसी संवेदनहीनता है कि शहीद की मां के आंसुओं की ज़रा भी परवाह नहीं की गई।जो राशि मदद हेतु देनी थी वह सीधे खाते में भी डाली जा सकती थी या किसी और जिम्मेदार व्यक्ति को उनकी इच्छा का पालन करते हुए चेक दिया जा सकता था।अब शायद मंत्री जी को अति प्रसन्नता हो रही होगी जब विभिन्न चैनलों पर शहीद की मां के रोते बिलखते चित्र देखें होंगे।
आज इस बात की भी कई कैमरामैन कोशिश में लगे रहते हैं कि अपहृत होते बच्चे या बच्ची का वीडियो बनाकर लोगों को चौंका दें यह नहीं सोच पाते उस बच्चे को बचाने में सहयोग करें।आज आंसू,दुखदर्द, मारपीट, हत्या,और बेहूदगी भरे चित्रों और वीडियो की भरमार है।यह सब प्रदर्शित करता है कि हम सब निरंतर कितने निर्मम और संवेदन हीन हो रहे हैं।एक शहीद की मां ने रो रो कर जो बड़ी बात कह दी है उस पर हम सबको मिलकर सोचना होगा।ऐसे बहते आंसुओं और उनकी इच्छा का दमन तो यही कह रहा है कि हम सब हिटलर की तरह निष्ठुर और क्रूर होने की ओर अग्रसर है। इस तरह के दिल दहलाने वाले प्रदर्शन से बाज आएं।ज़रा सी भी संवेदनशीलता मंत्री जी में हो तो उन्हें तत्काल जाकर उस शहीद मां से माफ़ी मांगनी चाहिए।