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क्या धनपशु देश को संकट में डाल सकते हैं?

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– वीरेंद्र भदौरिया

       मोदीजी का अपना कोई स्वतंत्र वजूद नहीं है,वे कार्पोरेट्स के हाथों की कठपुतली मात्र हैं, यह भाजपा की सरकार होती तो कुछ कायदे कानून व मर्यादाओं का पालन करती। यह पूरी तरह से अडानी अंबानी की सरकार है, मोदीजी के पास अपने मालिकों का हुकुम मानने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं है। 

        मोदीजी के मालिक लोग अपनी सत्ता बचाने के लिए वाजिब गैरवाजिब हर प्रकार के जतन करेंगे। जब कुर्सी छोड़ने की नौबत आ ही जाएगी तब भी आखिरी उपाय के रूप में वे इमर्जेंसी या डिक्टेटरशिप लागू करने जैसा कोई असंवैधानिक या असामान्य कदम उठा सकते हैं। आक्रामक प्रचार तंत्र व गोदी मीडिया की मदद से बनाया गया खुशनुमा माहौल इतना जल्दी तिरोहित हो जाएगा,इसकी किसी ने सपने में भी कल्पना नहीं की थी। आत्ममुग्ध व अहंकार में डूबे नेता, कार्पोरेट्स व ब्यूरोक्रेट्स, दलितों , आदिवासियों, पिछड़ों, गरीबों ,किसानों व युवाओं के मूड को समय रहते भांप नहीं पाए।

     मोदीजी के जरिए मालामाल हुए कार्पोरेट्स का पूरा अस्तित्व आज दांव पर लगा है, उनको इस बात का डर है कि यदि इंडिया गठबंधन की सरकार आई तो गरीब समर्थक नीतियां लागू होना सुनिश्चित है, पहले से चली आ रही लूट खसोट पर रोक लगने के साथ ही गैर कानूनी तरीके से लूटी गई देश की बेशकीमती परिसंपत्तियां लौटाने की नौबत आ सकती है, मुंदे ढंके अनेकानेक घोटालों का खुलासा होने पर काफी बड़े बड़े लोगों को जेल जाना पड़ सकता है, इसलिए वे आसानी से सत्ता छोड़ने वाले नहीं हैं।

            देश की जनता कार्पोरेट नियंत्रित मोदी सरकार से तंग आ चुकी है, उसने पूरी खामोशी के साथ संविधान प्रदत्त वोट की ताकत से मोदीजी को सत्ता से बेदखल करने का पुख्ता इंतजाम कर लिया है। ईवीएम मशीन की बेईमानी या अन्य गैर कानूनी तरीके अपना कर जनादेश के विपरीत जाकर सत्ता हस्तांतरण में रूकावट डालने की स्थिति में जनता का आक्रोश भड़क कर अनियंत्रित हो सकता है। 

       ये धनपशु कार्पोरेट्स बहुत क्रूर व निर्दयी हैं, उन्हें संविधान या लोकतंत्र से कोई मतलब नहीं है,परमात्मा देश को कार्पोरेट्स द्वारा खड़े किए जाने वाले संभावित संकटों  से बचाए,हम सबको यही प्रार्थना करनी चाहिए।

      इसलिए देश के लिए अगले कुछ दिन आशंकाओं से भरे व डरावने हो सकते हैं।

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