शौच के दौरान तेज दर्द, जलन, खुजली और शौच में खून आने की समस्या पाइल्स यानी बवासीर का संकेत हो सकती है। इसके कारण मल त्याग के समय तेज दर्द, जलन और खून बह सकता है। आमतौर पर कब्ज, गलत लाइफस्टाइल और लंबे समय तक बैठे रहने से पाइल्स की समस्या होती है। लाइफस्टाइल और रोज की कुछ आदतें बदलकर पाइल्स की समस्या से बचा जा सकता है।
पाइल्स यानी बवासीर वह स्थिति है जब गुदा और मलाशय के निचले हिस्से की नसों में सूजन आ जाती है। शौच के दौरान जब इन नसों पर दबाव पड़ता है तो वो फूल जाती हैं, जिससे तेज दर्द, जलन और खून बहने की समस्या हो सकती है।
आमतौर पर 3 आदतों के कारण पाइल्स की समस्या होती है। खानपान की गलत आदतों के कारण जिन लोगों को कब्ज की समस्या रहती है उन्हें पाइल्स होने की संभावना अधिक रहती है। इसके साथ ही जो लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं, ऑफिस में डेस्क जॉब करते हैं या जिनकी लाइफस्टाइल सही नहीं उन्हें भी पाइल्स हो सकता है।
पाइल्स के लक्षणों को कैसे पहचानें ?
पाइल्स यानी बवासीर मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है- बाहरी बवासीर, जो गुदा के बाहर होती है और आंतरिक बवासीर, जो गुदा के अंदर होती है। पाइल्स के शुरुआती संकेतों को पहचानने के लिए निम्नलिखित बातों पर ध्यान दें-
- बाहरी बवासीर के लक्षण- गुदा के आसपास खुजली या जलन होना, गुदा के पास सूजन या गांठ बनना, उस जगह पर दर्द या संवेदनशीलता महसूस होना, बैठते या मल त्याग करते समय दर्द बढ़ जाना आदि बाहरी बवासीर के लक्षण हो सकते हैं। कभी-कभी यह गांठ सख्त हो जाती है, जिससे दर्द बढ़ जाता है।
- आंतरिक बवासीर के लक्षण- शौच के समय या बाद में खून आना, टॉयलेट पेपर या अंडरवियर पर बलगम दिखना, बार-बार शौच जाने का मन होना, पेट पूरी तरह साफ न होने का एहसास या गंभीर स्थिति में बवासीर का बाहर आ जाना (प्रोलैप्स) आदि आंतरिक बवासीर के लक्षण हैं।
पाइल्स का खतरा किन लोगों को ज्यादा होता है ?
क्या बवासीर से कैंसर हो सकता है?
नहीं, बवासीर से कैंसर नहीं होता। लेकिन बवासीर और कैंसर के लक्षण मिलते-जुलते हो सकते हैं, दोनों स्थितियों में शौच के दौरान खून आ सकता है। मल त्यागते समय अगर बार-बार खून आए, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
पाइल्स से बचने के उपाय
बवासीर के आयुर्वेदिक उपचार
आयुर्वेद में बवासीर को अर्श कहा जाता है। यह पाचन खराब होने और शरीर में दोष (वात-पित्त) बढ़ने से होता है। आयुर्वेद का मुख्य लक्ष्य है पाचन सुधारना, कब्ज दूर करना और सूजन कम करना। नीचे दिए गए उपायों का उपयोग करके घरेलू आयुर्वेदिक उपाय किए जा सकते हैं-
- रोज छाछ पिएं, इसमें जीरा और सेंधा नमक मिलाएं। यह पाचन को सुधारता है और पेट को ठंडक देता है।
- सूरन (जिमीकंद) पाचन के लिए अच्छा होता है, ये पाइल्स को कम करने में मदद करता है।
- फाइबर युक्त चीजें जैसे लौकी, कद्दू, साबुत अनाज, दालें मल को नरम बनाते हैं।
- गर्म पानी पिएं। दिनभर हल्का गर्म पानी पीने से पाचन बेहतर होता है।
- सिट्ज बाथ (गर्म पानी में बैठना) के लिए एक टब में गर्म पानी लें और उसमें 10-15 मिनट बैठें।
पाइल्स का दर्द दूर करने के आयुर्वेदिक उपचार
नीचे बताई गई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के उपाय से पाइल्स का दर्द कम होता है और सूजन घटती है।
- गुग्गुल- यह पाइल्स के लिए एक प्रभावी औषधि है, ये सूजन कम करती है और दर्द में राहत देती है।
- घी (घृत)- इसका सेवन पाचन को चिकनाई देता है और कब्ज कम करता है।
- क्षार कर्म- यह बिना ऑपरेशन का इलाज है। इसमें दवा लगाकर बवासीर को सुखाया जाता है। इस प्रक्रिया से धीरे-धीरे बवासीर खत्म हो जाती है।
पाइल्स को नजरअंदाज न करें
पाइल्स एक आम लेकिन परेशान करने वाली बीमारी है। यह ज्यादा गंभीर नहीं होती, लेकिन अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो समस्या बढ़ सकती है।
सही खान-पान, नियमित एक्सरसाइज और टॉयलेट से जुड़ी अच्छी आदतें पाइल्स से बचने का आसान उपाय है। इससे बवासीर को कंट्रोल किया जा सकता है।
शौच के दौरान बार-बार खून आना, बहुत ज्यादा दर्द, गांठ बाहर आ जाना या कब्ज लंबे समय तक रहना वो संकेत हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में जांच कराना जरूरी है।

