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पूंजीपति नौकरियों का सृजन नहीं करता

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*नरेन्द्र कुमार

मजदूरों व आम लोगों के बीच से यह भ्रम दूर किया जाना चाहिए कि पूंजीपति मजदूरों को रोजी रोटी देता है। यदि ऐसा होता , तो लाक डाउन में यूं ही रोड पर बाहर मजदूरों को नहीं कर देते, मालिक मजदूरों की कमाई मजदूरी भी हड़प नहीं जाते! वह अपने मुनाफे के लिए मजदूरों को काम देता है. मुनाफा बंद, तो काम बंद.  इसलिए कारखानों पर, उत्पादन के तमाम साधनों पर मेहनतकशों को अधिकार करना होगा, ताकि पूरी सामाजिक संपदा को पूरे समाज की जरूरतों को पूरा करने के लिए उपयोग किया जा सके. पूंजीवाद और उसके बुद्धिजीवी हमेशा यह भ्रम फैलाते हैं कि पूंजीपति जॉब का सृजन करते हैं ,दरअसलन वे अपने मुनाफे के लिए, बढ़ती पूंजी के साथ मशीनों को लाकर नौकरियों को खत्म करते हैं और इस तरह से अधिक से अधिक मशीनें लाकर मजदूरों के शोषण को और तीव्र करते हैं. मशीनों और आविष्कारों का फायदा समाज को मिल सके इसलिए भी आवश्यक है कि उत्पादन के तमाम साधनों का सामाजीकरण हो. यदि उत्पादन के साधनों का सामाजीकरण नहीं होगा, तो बहुत बड़े पैमाने पर लोग बेरोजगार होंगे और दूसरी तरफ पूंजीपतियों के द्वारा उत्पादित माल को खरीदने वाला कोई नहीं रहेगा.

*नरेन्द्र कुमार*

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