-राजेश कुमार
मुझसे पूछा जाए कि मेरे पसंद का दूसरा सबसे बेहतरीन प्रधानमंत्री कौन है? तो मैं बेझिझक कहूंगा चंद्रशेखर। इसके पीछे कई वजहें हैं लेकिन जो सबसे ठोस वजह है, वो है उदारीकरण के खिलाफ आजीवन संघर्ष। 17 अप्रैल 1927 को चंद्रशेखर की जन्मतिथि बताई जाती है, लोकसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर उनकी जन्मतिथि 1 जुलाई 1927 अंकित है। चंद्रशेखर के चाहनेवाले उन्हें 17 अप्रैल को भी याद करते हैं।
हमने चंद्रशेखर के प्रधानमंत्री रहते ही राजनीति को समझना शुरू किया, नारा था- ’40 साल बनाम 4 महीने’। युवा तुर्क के नाम से मशहूर चंद्रशेखर का अंदाज़ ही ऐसा था जो सियासत में विरले ही मिलता है। संसद में तो ख़ैर उतनी बेबाकी से बोलने वाले अब आते ही नहीं हैं।
1964 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल होते वक्त इंदिरा गांधी ने चंद्रशेखर से पूछा कि आप तो समाजवादी हैं फिर कांग्रेस में शामिल क्यों होना चाहते हैं? इसपर चंद्रशेखर ने कहा था कि अगर कांग्रेस को समाजवादी नहीं बना पाया तो पार्टी तोड़ दूंगा। और चंद्रशेखर अपने वादे के पूरे निकले। कांग्रेस वर्किंग कमेटी का मेंबर होते हुए उन्हें लोकनायक जयप्रकाश नारायण के साथ आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किया गया। जब केंद्र की कांग्रेस सरकार के खिलाफ कई दलों ने मिलकर जनता पार्टी का गठन किया तो चंद्रशेखर पहले अध्यक्ष बने। यही वजह है कि आजीवन उन्हें उनके करीबी अध्यक्ष जी ही कहते रहे।
जब चंद्रशेखर ने पीएम पद से इस्तीफा दे दिया, तो राजीव गांधी ने महाराष्ट्र के तब के सी एम शरद पवार को उनके पास भेजा। शरद पवार ने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि आप इस्तीफा ना दें। तब चंद्रशेखर ने कहा था…
“जाके कह दीजिये राजीव से चंद्रशेखर उनमें से नहीं जो दिन में तीन बार अपने फैसले बदलते हों। “
चंद्रशेखर आजीवन बागी रहे सत्ता में रहते हुए भी सत्ता से बाहर रहकर भी। एक बार चंद्रशेखर ने सदन में कहा था…
चमन को सींचने में पत्तियां भी कुछ झड़ गई होंगी,
यही इल्जाम लग रहा है मुझ पर बेवफ़ाई का।
मगर कलियों को रौंद डाला जिन्होंने अपने हाथों से,
आज वही दावा करते हैं इस चमन की रहनुमाई का।
-राजेश कुमार
नीरजकुमार की वाल से

