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परिवर्तन निश्चित है?

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शशिकांत गुप्ते

परिवर्तन संसार का नियम है। यह सूक्ति यथार्थ में प्रकट होते दिख रही है। देश में सच में बदलाव हो रहा है। बदलाव होना भी चाहिए।
परिवर्तन भी ऐसा दिखाई दे रहा है,जो अभी तक असम्भव था।
देश अगले पच्चीस वर्षो में अमृत काल में परिवर्तित हो रहा है। यह सिर्फ भविष्यवाणी नहीं है, अधिकारक घोषणा की गई है।
सब रामजी की कृपा है। राम नाम के सामर्थ्य की महिमा अपरंपार है।
इस संदर्भ में रामचरितमानस में लिखित यह प्रसंग सटीक है।
जब हनुमानजी जी सीतामाँ की खोज करने दानवों के राजा रावण की लंका में प्रवेश करने के लिए प्रयास करतें हैं।
लंका के प्रवेश द्वार पर एक निशाचरी हनुमानजी को रोक लेती है। हनुमानजी उसे अपना परिचय देतें हैं। तब वह निशाचरी हनुमानजी को लंका में प्रवेश करने के लिए शुभकामनाएं देती है। इस प्रसंग को संत तुलसीबाबा इन चौपाइयों में इस तरह लिखतें हैं।
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा।
हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई।गोपद सिंधु अनल सितलाई॥
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इन चौपाइयों का अर्थ है। हे हनुमानजी आप श्री रामजी के नाम को हृदय में रखते हुए,लंका में प्रवेश कीजिए। रामजी के नाम के सामर्थ्य के कारण विष अमृत हो जाता है,शत्रु मित्रता करने लगते हैं,समुद्र गाय के खुर के बराबर हो जाता है,अग्नि में शीतलता आ जाती है।
इस तरह भारत देश के दक्षिण में स्थित लंका की निवासी निशाचरी ने हनुमानजी को शुभकामनाएं दी है।
वर्तमान में राम भगवान पर आस्था रखने वालों की सत्ता है।
आस्थावान लोग कभी झूठ नहीं बोलतें हैं।
समस्त गरल रूपी समस्याएं अमृत में परिवर्तित हो जाएंगी।
जब भगवान की भक्ति में सम्पूर्ण देश भावविभोर हो जाएगा, तब हररक नागरिक भक्ति में लीन हो जाएगा।
भक्ति में लीन होने वालों में निर्लिप्त भाव जागता है। समझ में आ जाता है कि जगत मिथ्या है।
जब सारा जगत ही मिथ्या लगने लगे जाए तब अपने देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी,आर्थिक विषमता,भुखमरी,कुपोषण और भी बुनियादी समस्याएं भी मिथ्या लगने लगेगी।
सर्वशक्तिमान,सर्वव्यापी भगवान में आस्था जागृत होने पर निश्चित ही आमजन अपने अंतर्मन से
काम,क्रोध,मद,लोभ मोह,और मत्सर इन छः शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर लेता है।
सबसे बड़ी बात मत्सर पर विजय प्राप्त होगी। मत्सर मतलब द्वेष भाव,ईर्ष्या।
आस्था के मुद्दे पर बहस नहीं करनी चाहिए। इस मुद्दे पर ना ही कोई तर्क करना चाहिए।
निम्न लिखित चौपाई का स्मरण हमेशा करतें रहना चाहिए।
होइहि सोइ जो राम रचि राखा।
को करि तर्क बढ़ावै साखा

सारी समस्याओं को रामजी पर छोड़ कर राममंदिर के निर्माण का इंतजार करो। और जैसे ही रामजी के दिव्यभव्य मंदिर में रामजी की मूर्ति विराजित होगी और उसकी प्राण प्रतिष्ठा होगी।
सभी देशवासियों से निवेदन है कि,सब एक सुर में बोलना। चलो बुलावा आया है प्रभु रामजी ने बुलाया है।
जय जय सिया राम।
अमृतकाल में प्रवेश करना निश्चित ही है।

शशिकांत गुप्ते इंदौर

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