अग्नि आलोक

बच्चों_के_कार्ल_मार्क्स

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बादल सरोज

“भीषण समय था मगर फिर भी यह शानदार समय था ।” इस लोडेड वाक्य के साथ मार्क्स के दोस्त लीब्कनेख्त लिखते हैं कि ;
🔴 “घर में सिर्फ दो कमरे थे । बाहरी कमरे में मार्क्स काम करते रहते थे और बच्चे उनके चारों तरफ खेलते रहते थे । उनका सबसे प्रिय खिलौना थे कार्ल मार्क्स । बच्चे कुर्सियों का ढेर लगाकर घोड़ा गाड़ी बनाते थे जिसमे मार्क्स को घोड़े की तरह बाँध कर ‘चाबुक मारे जाते थे’ और यह सब उस समय होता था जब वे अपनी मेज पर बैठकर लिख रहे होते थे ।”
🔴 “जब उनके बच्चे बड़े हो गए तब भी सिर्फ सवार बदले बच्चों की जगह नाती पोतों ने ले ली , मार्क्स घोड़ा ही रहे । उनकी बड़ी बेटी जेनी का बड़ा बेटा जॉनी लोंग्वे अपने नाना का ख़ास लड़ैता था । वो जो चाहे सो कर सकता और जॉनी यह जानता था । एक बार उसे बड़ी घोड़ागाड़ी बनाने का “मौलिक” विचार आया । जिसके कोचवान की सीट मार्क्स की गर्दन थी और एंगेल्स तथा मुझे (लीब्कनेख्त) घोड़ा बनना था । जोत दिए जाने के बाद लम्बी दौड़ शुरू हुयी और मार्क्स को तब तक दौड़ना पड़ा जब तक कि उनके माथे से पसीना नहीं आ गया । जब भी एंगेल्स या मैं चाल धीमी करते बेरहम कोचवान का कोड़ा पड़ता ‘शैतान घोड़ो आगे बढ़ो’ और ऐसा तब तक चलता रहा जब तक कि मार्क्स बिल्कुल बेदम नहीं हो गए ।
🔴 “वे सिर्फ एक सर्वाधिक ममत्वपूर्ण पिता ही नहीं थे जो घण्टों बच्चों के बीच बच्चा बने रह सकते थे : अपरिचित बच्चे भी उन्हें आकर्षित करते थे, विशेष रूप से दुःखी असहाय बच्चे जो उनके संपर्क में आते थे
🔴 ……. बच्चों जैसी आदतें खुद उनमे भी थीं । बिलकुल पागलों जैसी बच्चों की शरारतें करने की उनकी क्षमता अपार थी । शतरंज में हारने के बाद वे बच्चों की तरह झुंझलाते भी थे । यही वजह थी कि उनकी पत्नी उनके सारे मित्रों से कहा करती थीं कि वे शाम को मूर के साथ शतरंज न खेला करें ।”
🔴 बच्चों को इतना प्यार करने वाले मार्क्स अपने बच्चों को खोकर कितने विचलित हुये होंगे इसकी कल्पना की जा सकती है। उनका एक बेटा और एक बच्ची महज इसलिये मर गया क्योंकि सहस्राब्दी के इस सबसे महान दार्शनिक के पास उनके इलाज के लिए, यहां तक कि कफ़न-दफ़न के लिए भी पैसे न थे । उनकी आर्थिक तंगी के अनगिनत उदाहरण हैं ।
🔴 मार्क्स, बच्चों के मार्क्स एक आम आदमी थे । आम आदमी के मार्क्स । प्यार करने वाले – खेलने कूदने वाले मार्क्स । उनकी समाधि पर लिखे उनकी बेटी एलिनोर मार्क्स द्वारा चुने गए शब्दों में कहें तो :

“……. सारे ही मूल तत्व
उसमे कुछ यों घुले मिले कि
प्रकृति भी उठ खड़ी हो
और पूरे विश्व से कहे – ये था एक इंसान ।”

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