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नागरिक और संविधान 

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 मंजुल भारद्वाज

आज़ादी के बाद भारत के नागरिकों को सही में मुक्ति मिली और मनुष्य की चेतना का एक नायाब दस्तावेज संविधान भारत को मिला ! पर भारतवासियों ने क्या संविधान को समझा? संविधान और नागरिकों का क्या सम्बन्ध है? नागरिक और संविधान के सम्बन्ध को समझ पाए नागरिक?

1. वर्णवाद से मुक्ति : संविधान ने वर्णवाद के दलदल से भारत को मुक्त कर सबको समान माना !

विडम्बना : भारत के नागरिक ‘जात’ के जंजाल को अपनी पहचान मानते हैं. और हर पल भारत के नागरिक होने की बजाए जात का प्रमाण पत्र बनवाते हैं !

2. धर्म से मुक्ति : संविधान ने सभी नागरिकों को धर्म से मुक्त किया. धर्म और धार्मिक पाखंड किसी पर लादे नहीं जा सकते !

विडम्बना : आजकल नागरिक भारतीय होने की बजाए गर्व से हिन्दू होना चाहते हैं, मुसलमान होना चाहते हैं. 

3. सर्वधर्म समभाव : संविधान ने सभी धर्मो को समान माना !

विडम्बना : आज सब अपने अपने धर्म की कट्टरता में इंसानियत का कत्ल कर रहे हैं !

4. मानवीय अधिकार : संविधान ने पहली बार सभी भारतीयों को मनुष्य होने का अधिकार दिया.

विडम्बना : सभी नागरिक धर्म के नाम पर अपने अधिकार की बली दे रहे हैं. बाबा और मौलवियों से शोषित हो रहे हैं. कुपढ़ ढ़ोंगी अपनी दूकान चला रहे हैं. राजनेता उनके चारण बने हुए हैं !

5. दान नहीं अधिकार : संविधान ने सभी नागरिकों को अधिकार दिया है की सरकार अपने नागरिकों के कल्याण की नीति बनाए. सरकार नागरिकों को राशन देकर दान नहीं करती अपितु नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की पूर्ति करती है.

विडम्बना : नागरिक इसे सरकार का दान मानते हैं. इसलिए सरकार नेता के फोटो थैलियों पर, प्रमाण पत्र पर छापती है. सब सरकार की कल्याणकारी नीतियों को सरकार का दान या खैरात समझते हैं !

  6,  वोट का अधिकार : संविधान ने पहली बार सभी नागरिकों को वोट का अधिकार देकर अपनी सरकार चुनने का अधिकार दिया !  

विडम्बना : नागरिकों ने अपने लिए सरकार नहीं चुनी, अपने धर्म और जात के लोगों को चुना और देश में जात पात का ज़हर फैलाकर धार्मिक उन्माद पैदा किया. जो आज भारत के अस्तित्व पर खतरा बना हुआ है.

7, हम भारत के लोग : संविधान ने सभी भारतवासियों को भारत का मालिक बनाया.

विडम्बना : नागरिकों ने वोट देकर राजनेताओं को देश का मालिक बना डाला. जो आज  जनता को अपने पाँव तले रौंद रहे हैं. 

सबसे बड़ी त्रासदी : संविधान ने वर्णवाद से मुक्ति किन को दिलाई थी. 6 फ़ीसदी उच्च वर्णीय लोगों का हमेशा से धर्म,समाज और राजनीति पर दबदबा था. उन्होंने शोषण किया निचले वर्ण का. इंसान को इंसान नहीं माना. संविधान ने उच्च वर्ण के शोषण से 94 फ़ीसदी लोगों को मुक्ति दिलाई. लेकिन 72 सालों में शोषित वर्ग यानी छूत – अछूत के शिकार लोग आज 6 फ़ीसदी को वोट देकर हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहते हैं और खुद को सबसे बड़ा हिन्दुत्ववादी बताना चाहते हैं !

बहुमत के बिना सरकार नहीं बनती और 6 फ़ीसदी अपने दम पर सरकार नहीं बना सकते. पता लगाइए वो कौन हैं जो संविधान को खत्म कर 6 फ़ीसदी को अपना वोट देकर हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहते हैं !

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