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हिंदू मुस्लिम राजनीति की काट हैं वर्ग संघर्ष और भाईचारा मंच

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मुनेश त्यागी 

       मोदी सरकार के पिछले 8 वर्षों के शासनकाल में, देश दुनिया के पूंजीपतियों और शरमाएदारों को छोड़कर, हमारे देश के अधिकांश किसान, मजदूर, नौजवान, विद्यार्थी, छोटे उद्योग, छोटे व्यापारी और छोटे उद्योगपति, सब के सब परेशान हैं। अर्थव्यवस्था डूबने को है, किसान उखड़ रहा है, अधिकांश नौजवान बेरोजगार हो रहे हैं, उनके पास कोई काम नहीं है, उनका एक बड़ा हिस्सा अशिक्षा और कूशिक्षा का शिकार है, उनके पास पढ़ने के लिए पैसे नहीं है, कोई प्रभावी और मददगार जरिया नहीं है।

      मजदूरों के अधिकार छीने जा रहे हैं, देशी विदेशी पूंजीपतियों के इशारे पर, उन्हें आधुनिक गुलाम बनाया जा रहा है, सरकार द्वारा उनके सारे अधिकार छीनने की कोशिश हो रही है, संविधान का मखौल उड़ाया जा रहा है, कानून का राज खत्म हो रहा है, जनता परेशान है। अब सांप्रदायिक एजेंडे और सांप्रदायिक नफरत की राजनीति से, जनता की एकता को तोड़ा जा रहा है, जगह-जगह शिवलिंग निकल आए हैं, सीबीआई और ईडी का दुरुपयोग हो रहा है। अंग्रेजों के समर्थकों को गद्दी पर बैठा दिया गया है। पूंजीपति ही अपने हित पूर्ति के लिए इन जनविरोधी ताकतों को सत्ता और सरकार में इनको लाए हैं।

     संविधान और कानून के शासन को ध्वस्त किया जा रहा है, मीडिया को खरीद लिया गया है भारत का चौथा खंबा ढह गया है। मुसलमान  निशाने पर हैं। भेडिये तिलक लगाकर, केसरिया पहन कर सत्ता और सरकार में बैठ गए हैं। देश दुनिया के पूंजीपति, अपने इन चाटुकारों से यह सब करा रहे हैं, वे ही इन सांप्रदायिक ताकतों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। सामाजिक ताने-बाने को तोड़ा जा रहा है, सत्ता में बने रहने के लिए और पूंजीपतियों के हित साधने के लिए जनता में नफरत फैलाई जा रही है। हिंदू मुसलमान के नाम पर नफरत की राजनीति की जा रही है और जनता इनकी नापाक हरकतों का शिकार हो गई है। हालांकि किसान आंदोलन ने जनता को काफी हद तक जागरूक किया था, मगर हिंदू मुस्लिम नफरत की राजनीति अपना काम बखूबी कर रही है।

     अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या किया जाए? इसके लिए हमें जनता के आक्रोश को दिशा देनी होगी, जनता के भाईचारे को बचाना होगा, आर्थिक नीतियों की पोल खोलनी पड़ेगी। अतः देश, जनता और धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिए खड़ा होना पड़ेगा, एकजुट होना पड़ेगा। जनता को इस सब को बचाने के लिए आगे आना होगा। देश को बचाने के काम में लगना होगा। अमन और भाईचारे के लिए नींव के पत्थर बनना होगा। नफरत और जहर की काट है “वर्ग संघर्ष” और “भाईचारा मंच।

     हमें भाईचारा मंच बनाना पड़ेगा। नफ़रत फैलाने वालों को एक्सपोज करने के लिए गांव, शहरों और कस्बों में भाईचारा मंच बनाने होंगे।  जनता को जागृत करना होगा और खुद भी जागृत होने की जरूरत है और जनता को जागृत और संगठित करने की सबसे ज्यादा जरूरत है, तभी हमारी आगे आने वाली पीढ़ियां बच पाएंगी। आज हिंदू मुस्लिम एकता और समाज में भाईचारा बनाए रखने के लिए, सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए, सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाने की जरूरत ही, भारत की सबसे बड़ी जरूरत है।

      हमें वैचारिक परिवर्तन की लड़ाई को तेज़ करना पड़ेगा। नेताओं ने जनता को जातिवाद, सांप्रदायिकता और हिंदू व मुसलमान में बांट दिया है, हमें इस सारी भारतीय जनता को हिंदुस्तानी यानी भारतीय बनाने की जरूरत है। समस्त प्रकार की हिंदुत्ववादी, इस्लामिक, इसाई और बौद्ध सांप्रदायिक तत्वों ने जनता में नफरत भर दी है, हमें इसे निकालने की जरूरत है। अपने बच्चों को भाईचारावादी बनाना पड़ेगा। जन एकता ही सांप्रदायिकता को परास्त कर सकती है, वर्ग संघर्ष और भाईचारा मंच का मिला जुला अभियान ही जनविरोधी और देश विरोधी, सांप्रदायिकता को खत्म कर सकते हैं।

     हमें, सारे देश के गलियों, मोहल्लों, शहरों, गांवों और कस्बों के कोने कोने में जाना होगा और गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी और साम्प्रदायिकता के खिलाफ  भारत के लोगों को इकट्ठा होना होगा, एकजुट होना होगा और भाईचारे की राजनीति को और ज्यादा करने और बचाने की जरूरत है और साझी संस्कृति और गंगा जमुनी तहज़ीब के हिंदू मुस्लिम मोतियों को जनता के बीच बिखेरने की आज सबसे ज्यादा जरूरत है।

    हमारे यहां कोई धर्म, जाति या संप्रदाय, सर्वोच्च नहीं हैं, बल्कि हम भारत के लोग यानी कि भारत की जनता ही, सर्वोच्च और सम्प्रभु है। भारत का संविधान ही सबसे बड़ी और पवित्र पुस्तक है। हमारा देश इसी संविधान के सिद्धांतों से चलेगा। नफ़रत और लूट के अभियान को, जन अभियान और संयुक्त संघर्ष की राजनीति के द्वारा ही रोका जा सकता है। हमें भी साम्प्रदायिक सद्भाव और भाईचारे की राजनीतिक लड़ाई लड़नी होगी।

        भारत माता की एकता और अस्मत को बचाने के लिए हिंदू मुस्लिम एकता की, जनता की एकता की, किसान मजदूर एकता की, लड़ाई लड़नी होगी और “वर्ग संघर्ष” और “भाईचारा मंच” की साझी लड़ाई और एकजुट अभियान ही अब देश की जनता की एकता, हिंदू मुस्लिम एकता व संविधान और कानून के शासन को बचा सकते है।

    वर्ग संघर्ष और भाईचारा मंच की सफलता के लिए इस देश के किसानों, नौजवानों, छात्रों, मजदूरों, अध्यापकों, वकीलों और जजों, लेखकों, कवियों, बुद्धिजीवियों और समस्त मीडिया कर्मियों को एकजुट होना पड़ेगा और इन सब को मिलकर इन जन विरोधी ताकतों का मुकाबला करना पड़ेगा और इनका जनता के अंदर भंडाफोड़ करना पड़ेगा और सब को मिलकर हिंदू मुस्लिम एकता और भाईचारे को मजबूत बनाना होगा। इसके अलावा और कोई चारा या विकल्प हमारे सामने नहीं रह गया है।

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