-सुसंस्कृति परिहार
अपने आका अमेरिका से प्यार के तार टूटने की आहट मिलते ही संघ ने चीन से पक्की यारी की तैयारी शुरू कर दी है।चीन जिसने भारत से चीनी हिन्दी भाई भाई का वादा करके जिस तरह देश पर हमला करके सन् 1962 में तोड़ा। हमारी फ़ौज को पीछे हटना पड़ा इतना ही नहीं इस ग़म में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जी को दिल की बीमारी लगी और 27मई 1964 को इसी सदमे की वजह से उनका देहावसान हुआ।
जिस देश पर लोग आज तक विश्वास नहीं पाते हैं।उसी चीन देश के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को हमारे देश प्रमुख गुजरात में प्रेम से झूला झुलाते है और इस मोहब्बत में अपना डोकलाम और पैंगाग झील का बड़ा हिस्सा उन्हें कुर्बान कर देते हैं। इतना ही इन क्षेत्रों की आवाज़ उठाने वाले लद्दाख के सांसद को चुप करा देते हैं।चोरी छिपे कुछ मीडिया और भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी मुखर होकर इसे उठाते भी हैं पर नक्कारखाने में तूती की आवाज़ दफ़न हो जाती है। विश्व पर्यावरण विद्वान सोनम वांगचुक जो इस प्रसंग की बात दमदारी से कहते रहे वे लंबे अर्से से जोधपुर जेल में कैद हैं। अस्पष्ट तौर पर यह चीन के इरादों को बुलंद करने और अपनी यारी की मज़बूती के लिए ही है।
आजकल चीनी संघी प्रेम की पींगे बढ़ रही हैं वे होश खो चुके हैं अमेरिकी फटकार ने यह प्यार इतना बढ़ा दिया है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले से मुलाकात की। इसके पहले चीनी प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को भाजपा मुख्यालय में भाजपा के पदाधिकारियों से मुलाकात की थी। संघ और भाजपा की ओर से इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया है।ये शिष्टाचार भेंट कतई नहीं है यह अमेरिकी प्यारे दोस्त से मिली हार की छटपटाहट है। चीन ने इस प्यार को मज़बूत रखने जम्मू कश्मीर में शक्सगाम घाटी को अपना हिस्सा बताते हुए कहा है कि वहां किया जा रहा निर्माण पूरी तरह वैध है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने भारत की आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि जिस क्षेत्र का उल्लेख किया जा रहा है, वह चीन का ही हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस इलाके में बुनियादी ढांचे का निर्माण चीन द्वारा अपने ही क्षेत्र में किया जा रहा है और यह पूरी तरह वैध तथा उचित है।
अब तो यह कहना उचित होगा कि देश प्रमुख को प्यार करने की त़मीज़ नहीं है।संघ ने बीबी के प्यार को छुड़वा दिया।अब उनके अपने सरेंडर स्वभाव ने अमेरिका के डोनाल्ड ट्रम्प के प्यार में देश के व्यापार को टेरिफ वार से डुबाया और वर्तमान में चीन जैसे धोखेबाज राष्ट्र के प्रति जो अतिरिक्त प्यार जताया है। उसकी बदौलत वह भारत के बहुत बड़े भूभाग को सौंपता जा रहा है वरना कश्मीर की शक्सगाम घाटी अपने नक्शों में नहीं दिखाता।अक्साई चीन पहले से उसके कब्जे में है।
कुल मिलाकर संघ के महासचिव हौसबोले और भाजपाई नेताओं के साथ यह गुपचुप बैठक नहीं होती। चीनी मांझे की डोर से बंधे इस रिश्ते में ना जाने कितनी गर्दनें कटेंगी,कितनी झुकेंगी।भारत भू का चीन कितना क्षेत्र अधिग्रहण कर लेगा बहुत कुछ अभी अंधेरे में है। देश नहीं बिकने दूंगा का खूबसूरत नजारा देने वाला देश को हर क्षेत्र में कितनी क्षति पहुंचा रहा है। अफ़सोस कि देश में वंदेमातरम का सौवां वर्ष मनाया जा रहा है। जबकि कथित भारत माता इस बढ़ते प्यार को देख ज़ार ज़ार रो रही है।इस पर जान कुर्बान करने वाले रणबांकुरे सिसक रहे हैं।

