शशिकांत गुप्ते इंदौर
आज सीतारामजी मुझे Charity Begins at home का महत्व समझा रहे थे।
मै समझ गया,सीतारामजी ने कोई महत्वपूर्ण व्यंग्य लिखा होगा।
सीतारामजी ने कहा कि, charity begins at home का मतलब दान की शुरुआत घर से शुरू होनी चाहिए। तात्पर्य हमें अपने परिवार और करीबी समाज का ध्यान उदारता पूर्वक रखना चाहिए। इसके बाद दूसरों की मदद करना चाहिए।
मैने सीतारामजी के वक्तव्य पर सहमति प्रकट करते हुए कहा,मैने सुना है कि,दान के लिए शास्त्रों में लिखा है,दान देने वाले ने अपनी स्वयं की अनिवार्य आवश्यकताएं संतोष जनक रूप से पूर्ण होने के पश्चात जो कुछ अतिरिक्त (surplus) बचे उसमें से कुछ दान करना चाहिए और कुछ भविष्य के लिए बचत करनी चाहिए।
सीतारामजी ने मेरी बात सुनने के बाद कहा एकदम सही फरमाया आपने। और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि,प्रायः देखा गया है,बहुत से लोग अपनी वाह वाही लूटने के लिए Manipulation अर्थात चालाकी कर देश के राजस्व की आय को हानि पहुंचाकर जो धन अर्जित करते हैं, वही धन दान करतें हैं,और इसी तरह के धन को व्यय कर विशाल स्तर पर धार्मिक आयोजन सम्पन्न करते हैं?
मैने कहा यह तो सब सुनी सुनाई बातें हैं,इसका कोई प्रामाणिक तथ्य मतलब सबूत किसी के पास नहीं है। ऐसे धन के लिए बहुत से लोगों का तर्क देते हैं कि धन के आगमन का स्रोत नहीं देखना चाहिए,धन का व्यय अच्छे कार्यों में हो रहा है,यह देख प्रसन्न होना चाहिए। इस संदर्भ एक कहावत प्रचलित है कि, दान की बछिया के दाॅंत नहीं देखे जाते
सीतारामजी ने कहा Manipulation करने वाले सिर्फ आर्थिक क्षेत्र में ही manipulation मतलब चालाकी नहीं करते हैं,बल्कि तकरीबन सभी क्षेत्रों में ही चालाकी कर अपना वर्चस्व बनाएं रखतें हैं।
मैने कहा उक्त आचरण सामंती मानसिकता का द्योतक है। इसी मानसिकता को देश की फिल्मों में धारावाहिकों में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रश्रय देते हुए दर्शाया जाता है।
राजनैतिक,सामाजिक, सांस्कृतिक,और धार्मिक आयोजनों की भव्यता को आयोजनों की सफलता का प्रमाण समझा जाता है।
सीतारामजी ने कहा कि,सामंती मानसिकता में लिप्त लोगों ने Calculation करना त्याग दिया है, इन लोगों ने सिर्फ और सिर्फ manipulation को ही आत्मसात कर लिया है।
उपर्युक्त चर्चा के बाद मैने चर्चा को समाप्त करने के पूर्व सीतारामजी से कहा इन दिनों किसी भी मुद्दे पर चर्चा करते हुए यह ध्यान में रखना अनिवार्य है कि,कोई मुद्दा अति संवेदनशील तो नहीं हैं?
यदि हो तो समझदार व्यक्ति को चर्चा के पूर्व ही संभल जाना चाहिए। यह कहते हुए मैने सीतारामजी को राम राम कह कर चर्चा को विराम दिया।
सीतारामजी मुझे दो अशआर सुनाए।
शायर वसीम बरेलवी का यह शेर
किस काम की रही ये दिखावे की ज़िंदगी
वादे किए किसी से गुजारी किसी के साथ
और सीतारामजी ने शायर हनीफ कैफ़ का ये शेर भी सुनाया।
हुए अना के दिखावे से लोग सर अफराज
अना ने सर को उठा कर किया हमें पामाल
( अना =अभिमान,
सर अफराज = सर ऊंचा करना,
पामाल = बर्बाद,तबाह)

