5 कंपनियों ने 2,332 करोड़ में 58,850 वेंटिलेटर सप्लाई किए, सर्विस-स्पेयर पार्ट पर ध्यान नहीं
नई दिल्ली/इंदौर
कोरोना महामारी के बीच प्राणवायु देने के लिए पीएम केयर फंड से दिए वेंटिलेटर पर आरोप-प्रत्यारोप के बीच कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। सरकार ने देशभर में वेंटिलेटर तो बांट दिए लेकिन कई राज्यों ने इनके काम न करने की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। कहीं पर्याप्त ऑक्सीजन (एफआईओ2) न पहुंचने, कहीं चलते-चलते बंद होने की दिक्कत है।
कई जगहों पर कंपनियों ने वेंटिलेटर असेम्बल करके दे दिए और कागजों पर इंस्टॉल दिखा दिया गया। पीएम केयर फंड से 5 कंपनियों से 2,332 करोड़ में 58,850 वेंटिलेटर खरीदे गए थे। सबसे ज्यादा 30 हजार भारत इलेक्ट्राॅनिक्स (बेल) से, एएमटीजेड से 13 हजार, नोएडा की अग्वा हेल्थकेयर से 10 हजार, गुजरात की ज्योति सीएनसी से 5 हजार और एलाइड मेडिकल से 350 वेंटिलेटर खरीदे गए थे।
भास्कर ने वेंटिलेटर निर्माता कंपनियों, राज्यों के डॉक्टरों और तकनीकी स्टाफ से बात की तो पता चला, इसके पीछे गुणवत्ता में कमी के साथ ट्रेनिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और कंपनियों की लापरवाही भी कारण है। वेंटिलेटर्स की सर्विस और स्पेयर पार्ट देने की जिम्मेदारी निर्माता कंपनियों की थी, लेकिन इन कंपनियों में इतने इंजीनियर ही तैनात नहीं किए।
वहीं, ऑक्सीजन सेंसर, फ्यूज, कनेक्टर जैसे स्पेयर पार्ट्स का भी संकट है। इसके चलते सर्विसिंग भी नहीं हो पा रही है। कई जगहों पर वेंटिलेटर से ऑक्सीजन पाइप जोड़ने वाले कनेक्टर नहीं थे। कई कोविड केयर सेंटर्स पर वेंटिलेटर चलाने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित स्टाफ नहीं था।
गौरतलब है कि पीएम केयर फंड से खरीदे गए 45 हजार वेंटिलेटर में से अधिकांश अगस्त 2020 तक अस्पतालों में पहुंच चुके थे। सबसे बड़े सप्लायर भारत इलेक्ट्रानिक्स (बेल) का दावा है कि इस साल जनवरी तक 30 में से 29 हजार वेंटिलेटर इंस्टॉल हो चुके थे। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि ज्यादातर सिर्फ असेंबल कर स्टोर में भेजे गए।
इन्हें अस्पताल की ऑक्सीजन लाइन से नहीं जोड़ा गया। बेल ने एमपी में 1500 ,राजस्थान में 1900, यूपी में 3,134, बिहार में 700, आंध्र प्रदेश में 3,000, केरल, तमिलनाडु में 3000 से ज्यादा वेंटिलेटर सप्लाई किए हैं। तमिलनाडु के एसीएस हेल्थ राधाकृष्णन कहते हैं हमारे यहां कोई बड़ी समस्या नहीं है।
जबकि मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पंजाब मे 40% से ज्यादा वेंटिलेटर उपयोग में नहीं आ रहे। एमपी के अशोकनगर में जब कंपनी इंजीनियर ने स्टोर से ढूंढ कर निकाला तब पता चला कि अस्पताल में वेंटिलेटर भी हैं।
कंपनियां समय से सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं करतीं निजी कंपनी ज्योति सीएनसी के वेंटिलेटर की शिकायतें ज्यादा
कोविड मरीजों के लिए बाय-पेप, हाईफ्लो मोड जरूरी है, लेकिन कुछ कंपनियों के सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन न करने से हजारों वेंटिलेटर उपयोग में नहीं आ पा रहे हैं। एग्वा कंपनी के इंजीनियर का दावा है कि कुछ पुराने मॉडल को छोड़ हमारे वेंटिलेटर में बाइपेप 60 लीटर तक हाईफ्लो मोड है, सिर्फ सॉफ्टवेयर अपडेट की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि कई जगह बैक्टीरिया और दूसरे फिल्टर न बदलने से अलार्म सिग्नल आता है और वेंटिलेटर बंद कर दिए जाते हैं।
दूसरी ओर, भारत इलेक्ट्रानिक्स तो स्पेयर पार्ट्स दिए हैं लेकिन गुजरात की निजी कंपनी ज्योति सीएनसी के वेंटिलेटर धमन-3 के साथ यह भी नहीं है। कुछ जगहों पर धमन-3 के वेंटिलेटर ऑक्सीजन सेंसर, फ्लोमीटर, फिल्टर न बदलने के कारण बंद हैं। सर्विस इंजीनियरों की मानें तो जयपुर, भीलवाड़ा, रायपुर में कई वेंटिलेटर इसलिए भी बंद हैं क्योंकि स्टाफ पानी ड्रेन करना नहीं जानता। वहीं, कुछ घंटे चलने के बाद जरूरी कैलिब्रेशन न कर पाना भी एक दिक्कत है।
पांच रुपए का फ्यूज भी बिगड़ गया तो वेंटिलेटर कबाड़
- बेल के प्रोजेक्ट इंजीनियर आशीष चौधरी ने बताया, बीते साल अगस्त तक राज्यों को वेंटिलेटर पहुंचा दिए थे। इंस्टॉलेशन शुरू हुआ, तब संक्रमण कम था।
- वेंंटिलेटर के फ्यूज संवेदनशील होते हैं। वोल्टेज उतार-चढ़ाव से 5 रुपए का फ्यूज उड़ा तो उसे कबाड़ में रख देते हैं। बहुत कम अस्पतालों में बायोमेडिकल इंजीनियर हैं।
- बाबा फरीद यूनिवर्सिटी पंजाब के वीसी डॉ राजबहादुर ने बताया, यहां आए 800 मे 237 वेंटिलेटर बंद हैं।
- रांची के रिम्स को 140 वेंटिलेटर मिले थे इनमें से 50 काम नहीं कर रहे हैं।
वहीं, सदर अस्पताल को मिले 35 में से 10 वेंटिलेटर काम नहीं कर रहे हैं।
ऑक्सीजन फ्लो देने में फेल
महाराष्ट्र की वेंटिलेटर एग्जामिनेशन कमेटी की डॉ. मीनाक्षी भट्टाचार्य व औरंगाबाद मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. कानन ने कहा- हमें ज्योति सीएनसी के ‘धमन-3’ वेंटिलेटर मिले, लेकिन कुछ देर चलने पर बंद हो जाते हैं। ये जरूरी ऑक्सीजन फ्लो नहीं दे पा रहे। पावर बैकअप न होना भी बड़ी समस्या है।

