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कामरेड तेजा सिंह स्वतंत्र….काश कुछ सीखें इनसे….

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कॉमरेड नवरंग चौधरी

, Advocate, श्रीगंगानगर

1971 में लोक सभा के चुनाव हुए,पंजाब के संगरूर लोक सभा हल्के से सीपीआई के नेता  स्वतंत्रता सेनानी कामरेड तेजा सिंह स्वंतंत्र चुने गए,बड़े ओजस्वी वक्ता थे, बड़ी कुर्बानियां थी,8 साल आजादी के आंदोलन में जेलों में गुजारे थे,लोकप्रियता बड़ी थी। 12 अप्रैल 1973 को संसद में एक जरुरी मसले पर बहस चल रही थी, कामरेड तेजा सिंह स्वतंत्र साब अपनी बात रख रहे थे, उनकी तकरीर पूरी हुई नहीं थी अचानक दिल का जानलेवा दौरा पड़ा और ह्रदय घात से कामरेड की मौत चलती संसद में ही हो गई।
साथी सांसदों ने कामरेड  संभाला, संयोग से उस समय तत्कालीन प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी भी सदन में हाजिर थी। साथी सांसदों ने कामरेड के मृत शरीर के साथ उनके समान को भी संभाला।एक थैला( झोला) था जिसमें कुछ कागजात, जरूरी फाइलें, डाइबिटीज़ की दवाइयां और एक कपड़े लिपटी दो रोटियां और आचार मिला।बाद में शोक प्रस्ताव पर बोलते हुए इंदिरा जी ने कहा मैं  अगर साक्षात नहीं देख लेती तो विश्वास ही नहीं कर पाती इतना सादा इंसान इस संसद में चुनकर आया है,दुनियां के संसदीय इतिहास में मिसाल होगी, संसद की कैंटीन है जिसमें बहुत ही लजीज भोजन नाममात्र की कीमत पर मिलता है,तब भी एक MP अपने साथ 2 रोटी लाता है अचार के साथ खाने को,कितनी सादगी,कितना समर्पण।बाद में दूसरे नेताओं ने अपने शौक भाषण में कहा वे तो कई बार कामरेड को यही रोटियां खाते देख चुके हैं।टिफन नहीं था कपड़ा था जिसे मारवाड़ी में न्यातना कहते हैं पंजाबी में पौना कहते हैं।
बस यूं ही आज लिख दिया, कम्युनिस्ट कोई होते हैं तो ऐसे ही  होते हैं,बाकि सब मर्जी के मालिक हैं। कामरेड हेतराम जी बेनीवाल उनके किस्से सुनाते रहते हैं, कई बार गंगानगर भी आए थे ,सरदार करनैल सिंह जी के दोस्त थे उनके यहां रुकते थे।कामरेड तेजा सिंह स्वतंत्र को नमन। काश कुछ सीखें इनसे——–       •••••••••••••••••••••••••••साभार:कॉमरेड नवरंग चौधरी, Advocate, श्रीगंगानगर की फेसबुक वॉल से।

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