सुसंस्कृति परिहार
भीषण गर्मी के बीच झीलों की नगरी से क्या कांग्रेस के पुनर्रोदय का सूरज चमकेगा यह सिर्फ कांग्रेस के इस तीन दिवसीय चिंतन शिविर का मसला नहीं है बल्कि गांव गांव में बैठे कांग्रेस के बुजुर्ग और युवा भी इस शिविर से काफी आश्वस्त नज़र आ रहे हैं। हालांकि इससे पहले हुए सन्1974के पहले चिंतन शिविर नरौरा,उत्तरप्रदेश,1998पचमढ़ी,मध्यप्रदेश,2003,शिमला2013,जयपुर चिंतन शिविरों के जरिए कांग्रेस को कोई सफलता नहीं मिल पाई थी।ये शिविर उपयोगी साबित नहीं हुए।
आज प्रारंभ उदयपुर शिविर के पहले दिन तकरीबन 400 कांग्रेसियों को कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा, भाजपा-RSS की नीतियों की वजह से देश जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, उस पर विचार करने के लिए ये शिविर एक बहुत अच्छा अवसर है आज ऐसा माहौल पैदा किया गया है कि लोग लगातार डर और असुरक्षा के भाव में रहें ।अल्पसंख्यकों को शातिर तरीके से क्रूरता के साथ निशाना बनाया जा रहा है. अल्पसंख्यक हमारे समाज का अभिन्न अंग हैं और हमारे देश के समान नागरिक हैं।गांधी ने कहा कि बड़ी संख्या में बेरोज़गारी बढ़ी है लोगों ने अपनी नौकरियां भी बड़ी संख्या में गंवायी हैं।आज UPA सरकार के मनरेगा और फ़ूड सिक्योरिटी एक्ट को कमज़ोर किया जा रहा है।किसानों के खिलाफ जो काले कानून लाए गए, कांग्रेस सांसद और संसद के बाहर किसानों के हक में जमकर लड़ाई लड़ी, कांग्रेस पार्टी ने देश में जो सार्वजनिक उपक्रम खड़े किए थे, सामाजिक सुरक्षा के लिए उन्हें बेचा जा रहा है।यह चिंताजनक है।
उन्होंने ये स्वीकारा कि वर्तमान में कांग्रेस पार्टी की स्थिति अच्छी नहीं है। असाधारण परिस्थितियों का मुक़ाबला असाधारण तरीक़े से ही किया जा सकता है. पार्टी ने नेताओं को बहुत कुछ दिया है. अब वक्त है पार्टी का कर्ज उतारने का।लोगों को हमसे बहुत उम्मीद है,उससे हम अनजान नहीं हैं, हम जब चिंतन शिविर से निकलेंगे तो एक नए आत्मविश्वास के साथ नए संकल्प के साथ जनता के बीच जाएंगे।
वहीं चिंतन शिविर के लिए बनी कांग्रेस की संगठन संबंधी समन्वय समिति के सदस्य पार्टी महासचिव अजय माकन ने कहा, संगठन का निचला स्तर बूथ समिति का होता है. ब्लॉक समिति के नीचे बूथ आते हैं. लेकिन अब इनके बीच में, मंडल समिति बनाने का प्रस्ताव है. हर मंडल समिति में 15 से 20 बूथ होंगे. इस पर सर्वसम्मति भी है. उन्होंने बताया कि यह भी प्रस्ताव है कि संगठन में किसी पद पर कोई व्यक्ति अधिकतम पांच साल रहे और फिर उसके पद पर आसीन होने के लिए तीन साल का “कूलिंग पीरियड” हो.कहा कि जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण और इस तरह के अन्य कार्यों के लिए पार्टी में “पब्लिक इनसाइट डिपार्टमेंट’ बनाने का भी प्रस्ताव है. अजय माकन ने कहा, “इसके अलावा यह भी प्रस्ताव है कि पदाधिकारियों के कामकाजी प्रदर्शन की जांच परख के लिए आकलन इकाई (असेसमेंट विंग) बने ताकि अच्छी तरह काम करने वालों को जगह मिले और काम नहीं करने वालों को हटाया जाए.”पार्टी महासचिव अजय माकन ने कहा कि संगठन में स्थानीय समिति से लेकर कांग्रेस कार्य समिति तक, हर जगह 50 प्रतिशत स्थान 50 साल से कम उम्र के लोगों को दिए जाने का भी प्रस्ताव रखा गया है. उन्होंने कहा, ‘ कांग्रेस में काम करने की व्यवस्था बहुत पुरानी है. इस चिंतन शिविर के माध्यम से इसमें आमूल-चूल परिवर्तन किया जाएगा
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि इस चिंतन शिविर में एक परिवार को एक टिकट, कमजोर वर्ग के नेताओं को संगठन में आरक्षण और एक बार पद पर रहने के बाद तीन साल के कूलिंग ऑफ पीरियड जैसे फैसले लिए जा सकते हैं।
सवाल इस बात का है कि चिंतन शिविर में संभावित परिवर्तन को कितने कांग्रेसी सच्चे मन से स्वीकार पाते हैं जी 23 के तमाम कांग्रेस के असुंष्ट भी इस शिविर में शामिल हैं।वे देश हित में कब तक एकजुट रहते हैं। सोनिया गांधी का आव्हान अब कांग्रेस का कर्ज उतारने का समय है महत्वपूर्ण है। युवाओं को शिविर में तकरीबन 40% शामिल करना सराहनीय प्रयास लिए है।पांच साल काम करने वाले को ही टिकिट दलबदलुओं को गहरी चोट पहुंचाने वाला होगा।इसी तरह तीन साल के कूलिंग ऑफ फैसला का निर्णय भी जमे रहने वाले नेताओं पर एक धीमा वार होगा।इससे बहुत से नये लोग सामने आयेंगे।
कुल मिलाकर तीसरे दिन स्थिति पूरी तरह साफ़ होगी।परस्पर लड़ती झगड़ती केन्द्रीय सता से दूर कांग्रेस पार्टी इस चिंतन शिविर के नवसंकल्प जो तैयार करेगी वो आने वाले कल की राह खोलेंगे। कांग्रेस तभी सफल हो सकती है जब वहां जीत के लिए ही एकजुट संकल्प हों जीत निज की नहीं पार्टी की महत्वपूर्ण हो। बहरहाल उदयपुर चिंतन शिविर से कांग्रेस कितनी विजय की उम्मीद का संकल्प लेकर निकलती है उससे ही आगे का सफ़र आसान होगा।
उदयपुर में उम्मीदों के उदय की कांग्रेसी संभावना

