*सुसंस्कृति परिहार
इधर राहुल गांधी के नेतृत्व में भारत जोड़ो यात्रा का प्रवेश कर्नाटक में हुआ है और उधर कर्नाटक गुलबर्गा के सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे जो इस समय राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं ,ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के प्रत्याशी हेतु नामांकन किया है जिनका समर्थन कांग्रेस के 28 दिग्गज नेताओं के साथ जी 23के दो नेताओं मनीष तिवारी और आनंद शर्मा ने प्रस्तावक बन कर किया है। इससे यह लगभग तय समझा जा रहा है कि कर्नाटक से ही कांग्रेस अध्यक्ष मिलने वाला है ।यदि वे विजयी होते हैं तो दूसरे दलित कांग्रेस अध्यक्ष होंगे। पहले दलित कांग्रेस अध्यक्ष बाबू जगजीवन राम बिहार से थे। दूसरे उम्मीदवार शशि थरूर मैदान में हैं ज़रूर किंतु जिस जी 23 का वे हिस्सा थे उसके सदस्यों की रुझान भी उनके साथ नहीं। चिंदबरम के पुत्र कीर्ति उनके प्रस्तावक थे।तीसरा नामांकन झारखंड के पूर्व मंत्री के के त्रिपाठी ने दाखिल किया है।लगता है शशि थरूर और त्रिपाठी नाम वापस ले सकते हैं क्योंकि कांग्रेस सदस्यों की लगभग एक पक्षीय रुझान खड़गे के पक्ष में है। चुनाव भी होते हैं तो अच्छा ही माना जाएगा।
बहरहाल मल्लिकार्जुन खड़गे जी का नाम आने के बाद बाकी लोगों को काठ मार गया ।जी 23के शशि थरुर से भी किनारा कर लिया।इसके माने क्या ये समझा जाए कि कांग्रेस के अंदर सुलगी आग बुझने वाली है? जुम्मा जुम्मा अभी थोड़ा वक्त ही गुजरा है जब गुलाम नबी आजाद अपने तीखे तेवरों के साथ राहुल गांधी पर आरोपों की झड़ी लगाते हुए कांग्रेस से जुदा हुए थे और कहा जा रहा था कि राहुल ही अध्यक्ष बनेंगे। गांधी परिवार ने फिर ये जता दिया कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे। गहलोत तो उठते बैठते राहुल का जाप करते रहे।अब जब चुनाव हो रहे हैं तब भी ये कहा जाने लगा है कि गांधी परिवार जिसे चाहेगा वहीं अध्यक्ष होगा।शशि थरूर के साथ जी 23ने ऐसा क्यों किया यह सवाल बहुत कुछ स्तरीय उजागर करता है।
बात दरअसल यह है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को, जो महत्व दक्षिण के दो राज्यों में मिला उसने भाजपा के अलावा अन्य विरोधियों को भी हिला के रख दिया है।दूसरा ‘गांधी परिवार के सिवा कोई नहीं’ कहने वालों के छक्के छूट गए जब राहुल ने नामांकन नहीं भरा उनकी बातें हवा हो गई। इसलिए जी 23 को मल्लिकार्जुन खड़गे के नाम पर एक होने दिया हालांकि खड़गे 80 वर्ष के हैं।उनका पार्टी में पिता तुल्य सम्मान है उन्होंने उम्रदराज होने के बावजूद राज्यसभा में विपक्ष के नेता की जो भूमिका निभाई वह अविस्मरणीय है। आंदोलन और प्रदर्शनों में भी उनकी बराबर उपस्थिति रही है। वे सर्वमान्य नेता हैं दलित हैं सन् 2019के लोकसभा चुनाव को छोड़कर वे सदैब जीते हैं।
30सितंबर को कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ कर्नाटक पहुंच गयी है। यात्रा में हिस्सा लेने वाले कांग्रेस कार्यकर्ता कर्नाटक में सबसे लंबा समय बिताएंगे। वो यहां 22 दिनों के लिए रुकेंगे। कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने भाजपा को इसमें बाधा डालने की कोशिश करने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी के साथ मिलीभगत करने वाले पुलिस अधिकारियों को सबक सिखाया जाएगा।यात्रा के स्वागत के दौरान एक सभा को संबोधित करते हुए, पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा देश की विभिन्न समस्याओं को उजागर करने के लिए है। उन्होंने कहा, “देश में अशांति है, कई समस्याएं हैं, भ्रष्टाचार फैला है।” सिद्धारमैया ने लोगों से यात्रा को सफल बनाने का आह्वान किया और दावा किया कि भाजपा कर्नाटक में इसे होते हुए नहीं देख पा रही है।विदित हो यहां भाजपा शासन है और यात्रा प्रवेश करने से पहले ही करीब 40 यात्रा सम्बंधी पोस्टरों को क्षति पहुंचाई गई।कर्नाटक शासन यात्रा रुकवाने आमादा नज़र आ रहा है जबकि राहुल साफ़ कह रहे हैं कि यात्रा जनता की है इसलिए इसे रोका नहीं जा सकता।
भाजपा शासित प्रदेश में यात्रा का प्रवेश और मल्लिकार्जुन खड़गे का कांग्रेस अध्यक्ष हेतु नाम आने पर भाजपा असहज महसूस कर रही है। भावी कांग्रेस अध्यक्ष के इस क्षेत्र में निश्चित ही कांग्रेस मजबूत होगी। यहां सूत्र बता रहे हैं कि सोनिया गांधी और प्रियंका भी भारत जोड़ो यात्रा में अलग अलग स्थान पर यहां राहुल के साथ होंगी। कर्नाटक से जिस तरह येदियुरप्पा को भाजपा ने संसदीय बोर्ड में लिया है वह भी बता रहा है कि वर्तमान मुख्यमंत्री का काम ठीक ठाक नहीं है और येदीयुरप्पा ज़रुरी है ।इस बीच आरोफ-प्रत्यारोपों से घिरे येदियुरप्पा को कोर्ट से क्लीनचिट भी मिल चुकी है।
कुल मिलाकर कर्नाटक में कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा के साथ भाजपा शासित राज्य में कैसा सरकार का सलूक और व्यवस्था होती है , कन्नड़ लोग इस यात्रा को कैसे लेते हैं वह महत्वपूर्ण होगा।इसके बावजूद मल्लिकार्जुन खड़गे का भावी कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाना कितना असर डालेगा ?यह भारत जोड़ो यात्रा ज्यो ज्यो आगे बढ़ेगी तब पता चलेगा। इतना ज़रूर है इसे अगर परेशान किया जाता है तो इसके गंभीर परिणाम चुनावों में मिलेंगे।इसे ना छेड़ना ही भाजपा के लिए हितकर होगा।

