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इंसानियत को हैवानियत में बदलता कोरोना

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सुसंस्कृति परिहार

 कोराना का डरावना आगमन इन दिनों इंसानियत पर बहुत भारी पड़ रहा है रिश्तेदारों और पड़ोसियों से मिलने वाली मदद को तो भूल ही जाइए।वे कुछ कर पाने की स्थिति में हों या ना हो पर इस छूत की बीमारी की भयानकता ने जो दूरी कायम की है , अपनत्व छीना है वह ना केवल मरीज के लिए बल्कि तमाम परिवार के लिए झेल पाना अत्यधिक कष्ट साध्य है। लेकिन भारतीय संयुक्त परिवारों की टूटन के बावजूद अभी भी ये मौजूद हैं जिसमें एक की बीमारी सबको परेशानी में डाल रही है । भारतीय गांवों से कोरोना के संक्रमण की जो ख़बरें आ रही हैं वे हृदय विदारक हैं कहीं पूरा का पूरा घर साफ हुआ जा रहा है।लोग  काफी समझाईश के बाद भी जाएं तो कहां जाएं जिनकी रहवास इस तरह है कि वे कोरोन्टीन  हो  ही नहीं सकते हैं।अस्पतालें फुल हैं , पंचायत भवन,स्कृल भी नहीं खोले गए।कुल मिलाकर गांवों की हालत बदतर है जिसकी तरफ सरकार का ध्यान नहीं है।जिनके पास साधन हैं वे भागते हुए शहर आ रहे हैं और अस्पताल में जगह ना होने ,आक्सीजन ना होने की वजह से सीधे मिट्टी में बदल घर पहुंच रहे हैं । गांवों में  जो मातम है उसकी हैवान  सरकार को लेशमात्र परवाह नहीं ।    

     शहरों की जो तस्वीरें सोशल मीडिया दिखा रहा है वह यह स्पष्ट कर रहा है कि मौतों की संख्या छुपाई जा रही है जब संसाधन ही नहीं तब कैसे मान लें कि लोग ठीक भी हो रहे हैं । लगता है कोरोना कर्फ्यु के साए में बहुत कुछ छुपाना ज़रूरी हो गया है।जब केन्द्रीय मंत्रीबी के सिंह के भाई को सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रहीं तब आम जन के बारे सोचना ही बेकार की बात है। शहरों में इसके इलाज में आने वाला इंजेक्शन रेमेडिसवीर और आक्सीज़न की चोरियां सरकारी अस्पतालों से हो रही हैं तो यह तो स्वत: सिद्ध हो रहा है कि हैवानियत किस तरह से हावी होकर सिर चढ़ कर बोल रही है।इस बीच रातों रात रेमेडिसवीर को महाराष्ट्र से गुजरात भेजे जाने का एक बड़ा  मामला सामने आया है साकेत गोखले ट्विटर पर लिखते हैं-कल रात, मुंबई के विले पार्ले पुलिस स्टेशन ने 4.75 करोड़ रुपये की रेमेडिसवीर जब्त कीं, जिन्हें गुजरात की एक कंपनी गुप्त रूप से ले जा रही थी।तभी अचानक देर रात भाजपाई देवेंद्र फडणवीस पुलिस स्टेशन में मौजूद हुए और कहने लगे कि बीजेपी ने दमन और गुजरात से इन शीशियों का ऑर्डर दिया है।फडणवीस का दावा है कि लोगों को बांटने के लिए भाजपा ने यह स्टॉक खरीदा था।यानी बीजेपी अपने पार्टी आफिस में रेन्डेसीवीर की कालाबाज़ारी कर रही है। जब मोदी सरकार ने महाराष्ट्र को इंजेक्शनों की सप्लाई रोकी हुई है तो बीजेपी को कैसे करोड़ों के इंजेक्शन हासिल हुए? बीजेपी को अपनी नपुंसक राज्य सरकारों को बचाने के लिए किसी भी कीमत पर इंजेक्शन चाहिए। ठीक वैसे ही जैसे एमपी में शिवराज मामा अपने 15 साल के राज में एक भी ऑक्सीजन प्लांट नहीं लगा पाए। इधर इंदौर में आक्सीजन टेकर आने पर जो पूजा पाठ बी जे पी ने कर वक्त ज़ाया किया वह कठिन समय की अशोभनीय हरकत है।जाने कब लोग इस हैवानियत को छोड़ेंगे । 

         इस मुश्किल समय में भी इंसानियत के जज़्बे के लैस लोगों की बड़ी सूची भी है जो अपने तरीके से मदद पहुंचाने सक्रिय हैं उन्हें सलाम करती हूं ।उनकी मदद भी कहीं कालाबाजारी करने लोगों तक ना पहुंचे इस बात की क्या गारंटी ? यह दौर एक बार फिर आपदा में अवसर की तलाश में जुटा है ।कोरोना का सितम इनकी इनकम बढ़ा रहा है ।शर्म आती है ऐसे लोगों को इंसान कहते हुए ।कोरोना वैसे भी लोगों को दूर दूर रख रहा है । परिवार जन और पड़ौसी इस कठिन दौर में मोबाइल भी जब ना उठा रहे हों तब इलाज के लिए कालाबाजारी और आपदा में अवसर तलाशने वाले लोग हैवान से कम नहीं ।याद रखिए विपदाएं आती हैं और चली जाती है किंतु इंसानियत हमेशा ज़िदा रही है और रहेगी तथा हैवानियत का नाश होता रहा है ।कोरोना में सावधानी बरतें ।जितना संभव हो मदद करें। 

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