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*काउंसलिंग दे सकती है ड्रग-एडिक्शन से मुक्ति*

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          ~ रीता चौधरी 

नशा नाश का द्वार है. कहते हैं, जो इससे एक बार प्यार कर ले, उसे यह कभी नहीं छोड़ता : जनाजे के साथ  जाता है. तमाम ड्रग्स से बेहद यानी हद से ज्यादा प्यार करने के बाद, सभी को छोड़ देने के स्वयं के अनुभव के आधार पर डॉ. विकास मानवश्री काउंसलिंग के जरिये तमाम नसेड़ियों को ड्रग्स से मुक्त कर रहे हैं. यह लेख उनसे हुई वार्ता का सार-अंश है.

   ज्यादातर मामलों में जब नशे की शुरुआत होती है तो यह मनोरंजक और रिलैक्सिंग लगता है। पर धीरे-धीरे जब यह लत में बदलना लगता है तब मानसिक, शारीरिक , पारीवारिक और आर्थिक दिक्कतों का कारण बनता है। ऐसी स्थिति से उबरने में व्यक्ति को मदद की जरूरत पड़ती है।  

     अक्सर कुछ लोग नहीं चाहते हुए भी नशे के शिकार हो जाते हैं। कभी-कभार जानकारी के अभाव में भी दवा समझकर नशा करने लगते हैं. नशे का शिकार आपके परिवार का कोई सदस्य भी हो सकता है। जब हमें इस बात की जानकारी मिलती है, तो दुःख होता है।

     हमें सिर्फ इस विषय पर गहन चिन्तन ही नहीं करना चाहिए, बल्कि इसके प्रति जागरूक होकर कुछ ठोस कदम भी उठाने चाहिए।

       अक्सर जो लोग नशे के शिकार हो जाते हैं, वे इसकी एडिक्शन को स्वीकार नहीं करना चाहते। नशीली दवाओं या शराब की लत को छुड़ाने के लिए वे मदद भी नहीं मांगना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में परिवार के सदस्यों का यह दायित्व बनता है कि वे अपने प्रियजन की मदद करें।

       नशे के शिकार व्यक्ति के साथ वे प्रभावी ढंग से बात करें और उन्हें इसके बुरे प्रभावों के बारे में समझाएं। उन्हें हेल्थकेयर प्रोफेशनल की मदद लेने के लिए राजी करें। यह कार्य अपने-आप में एक चुनौती है।

      यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि भले ही प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण हो, लेकिन  यह व्यक्ति के लिए सकारात्मक और जीवन बदलने वाले परिणाम ला सकती है।

*क्या है ड्रग एडिक्शन :*

        ड्रग एडिक्शन या नशा क्रोनिक और  बार-बार होने वाला विकार है, जो नशीली दवाओं के लगातार प्रयोग का प्रतिकूल प्रभाव है।

      इसे मस्तिष्क विकार माना जाता है। इसके कारण ब्रेन सर्किट में फंक्शनल चेंज हो जाते हैं। इसके कारण तनाव, डिप्रेशन और सेल्फ कंट्रोल नहीं रहना हो जाता है।

*समझिए ड्रग एब्यूज :*

अवैध दवाओं (Illicit Drug) का उपयोग ड्रग एब्यूज कहलाता है। इसमें अन्य उद्देश्यों के लिए अत्यधिक मात्रा में प्रेस्क्रिप्शन या ओवर-द-काउंटर दवाओं का उपयोग किया जाता है।

      नशीली दवाओं के कारण सामाजिक, शारीरिक, भावनात्मक और जॉब संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।

नशे की लत छुड़वाने में इस तरह की जा सकती है किसी व्यक्ति की मदद :

 *1. शिक्षितीकरण : Education about Drug Abuse*

       सबसे पहले समस्या को स्वीकार कर उस पर  कार्यवाही करना जरूरी बन जाता है। नशे की लत से जूझ रहे व्यक्ति को सबसे पहले समस्या के परिणामों को बताना जरूरी है। नशे के दुष्परिणाम को बताने के लिए व्यक्ति पर लगाम लगाना भी जरूरी है।

      एडिक्ट व्यक्ति को अपनी समस्या के बारे में बताने के लिए प्रोत्साहित करें। समस्या के निदान को तलाशने की कोशिश करें।

*2. व्यक्तिगत उपचार : Personal Treatment*

      हर व्यक्ति के ठीक होने का ढंग अलग-अलग होता है।

     पुनरुद्धार केंद्र व्यक्तिपरक उपचार योजना बनाते हैं। ये उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं और चुनौतियों के अनुसार होती हैं।

*3.  पुनर्वास केंद्र की मदद : Rehabilitation Centre help* 

    यदि समस्या गंभीर हो तो पुनर्वास केंद्र की मदद मांगना जरूरी हो जाता है।

    व्यसन से जूझ रहे किसी व्यक्ति को पेशेवर मदद की जरूरत सबसे अधिक होती है।

      पुनर्वास केंद्र व्यक्तियों को नकारात्मक विचार पैटर्न और व्यवहार बदलने में मदद करने के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी, डायलेक्टिकल बिहेवियरल थेरेपी (डीबीटी) और प्रेरणादायक बातचीत जैसे साक्ष्य-आधारित उपचारों का उपयोग करते हैं।

*4. परिवार और मित्रों का सहयोग : Family and Friend Help*

      पुनर्वास केंद्र के ग्रुप थेरेपी सेशंस में नशे से जूझ और उबरने की कोशिश कर रहे व्यक्तियों के साथ बैठकें भी आयोजित की जाती है। इससे उन्हें समान अनुभवों से गुजरने वाले अन्य लोगों से जुड़ने का अवसर मिल पाता है।

    इनके अलावा, परिवार और मित्रों का सहयोग सबसे अधिक मिलना चाहिए, जिनसे वे अपनी बात शेयर कर सकें।

*5. आफ्टरकेयर प्लानिंग : Aftercare Planning*

      व्यक्ति को रिकवर होने में लंबा समय लगता है। इसलिए उन्हें  लगातार देखभाल और मानसिक संबल की जरूरत पड़ती है।

     पुनर्वास केंद्र में आफ्टरकेयर योजनाएं भी होती हैं। ये उन्हें फिजिकल और मेंटल हेल्थ को मजबूती देने में मदद करते हैं।

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