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भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है चीन, 9.3 लाख करोड़ रुपए का आपसी कारोबार

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PM नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में वैष्णव संत रामानुजाचार्य स्वामी की प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी का उद्घाटन किया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे चीनी कंपनी एरोसन कॉर्पोरेशन ने बनाया है। भारत और चीन के बीच रिश्तों का यही सच है। LAC पर दोनों देश एक दूसरे के आमने-सामने खड़े हैं।

दोनों तरफ की सरकारें भी इस मुद्दे पर खुद को सख्त से सख्त दिखाती हैं, लेकिन सच यही है कि दोनों देशों के बीच तनाव कितना भी हो, लेकिन कारोबार रिकॉर्ड स्पीड से बढ़ रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या कारण हैं कि चीन की भारत विरोधी नीति के बावजूद भी हमारा उससे कारोबार बढ़ रहा है? देश को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश का क्या हाल है?

भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है चीन, 9.3 लाख करोड़ रुपए का आपसी कारोबार

आत्मनिर्भरता अभियान से भी ज्यादा फायदा नहीं

सरकार की पाबंदी से सिर्फ निवेश में कमी आई

इन वस्तुओं का आयात लगातार बढ़ रहा है
भारत ने चीन से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक सामान विशेष रूप से स्मार्टफोन, भारी मशीनरी, विशेष रसायन, एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स (API), ऑटो कंपोनेंट और 2020 के बाद बड़ी संख्या में मेडिकल उपकरणों का आयात करता है।

भारत के वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में इन सभी प्रमुख आयातों में वृद्धि जारी रही। इसके साथ ही लैपटॉप-कंप्यूटर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और एसिटिक एसिड जैसे रसायनों के आयात में भारी वृद्धि देखने को मिली है।

भारत इन वस्तुओं का निर्यात करता है
लौह अयस्क, पेट्रोलियम ईंधन, कार्बनिक रसायन, रिफाइंड कॉपर, कॉटन यार्न। खाद्य वस्तुओं में मछली एवं सी फूड, काली मिर्च, वनस्पति तेल, वसा आदि प्रमुख हैं।

इन वस्तुओं का चीन से आयात करता है भारत
ऑटोमेटिक डेटा प्रोसेसिंग मशीन एवं यूनिट, टेलीफोन इक्विपमेंट और वीडियो फोन, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, ट्रांजिस्टर्स एवं सेमीकंडक्टर डिवाइस, एंटीबायोटिक्स, उर्वरक, साउंड रिकॉर्डिंग, डिवाइस और टीवी कैमरा, ऑटो कम्पोनेंट, ऑटो एसेसरीज और प्रोजेक्ट गुड्स ।

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