PM नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में वैष्णव संत रामानुजाचार्य स्वामी की प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी का उद्घाटन किया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे चीनी कंपनी एरोसन कॉर्पोरेशन ने बनाया है। भारत और चीन के बीच रिश्तों का यही सच है। LAC पर दोनों देश एक दूसरे के आमने-सामने खड़े हैं।
दोनों तरफ की सरकारें भी इस मुद्दे पर खुद को सख्त से सख्त दिखाती हैं, लेकिन सच यही है कि दोनों देशों के बीच तनाव कितना भी हो, लेकिन कारोबार रिकॉर्ड स्पीड से बढ़ रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या कारण हैं कि चीन की भारत विरोधी नीति के बावजूद भी हमारा उससे कारोबार बढ़ रहा है? देश को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश का क्या हाल है?
भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है चीन, 9.3 लाख करोड़ रुपए का आपसी कारोबार
- भारत और चीन के बीच लद्दाख सीमा पर हुई झड़प और इससे पैदा हुए गंभीर तनाव के बावजूद साल 2021 में चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना रहा। पिछले वित्तीय वर्ष में भी चीन भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर था।
- भारत का चीन के साथ व्यापार 2021 में 9.3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। यह अपने आप में रिकॉर्ड है।
- भारत ने इस दौरान चीन से 7.2 लाख करोड़ रुपए का आयात किया यानी चीन से इतने पैसे का सामान भारत ने खरीदा।
- भारत ने इस दौरान सिर्फ 2 लाख करोड़ रुपए का चीन को निर्यात किया यानी इतने पैसे का सामान चीन को बेचा।

आत्मनिर्भरता अभियान से भी ज्यादा फायदा नहीं
- पिछले साल मई में भारत सरकार ने आत्मनिर्भरता का अभियान चलाना शुरू किया था। इसका उद्देश्य आयात को कम कर निर्यात को बढ़ाना और देश के अंदर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना था।
- जबकि विशेषज्ञ कहते हैं कि ये अभियान चीन पर निर्भरता कम करने पर अधिक केंद्रित था। लेकिन ताजा व्यापारिक आंकड़े बताते हैं कि इन सब कदमों के बावजूद चीन पर निर्भरता कम नहीं हो सकी है।
सरकार की पाबंदी से सिर्फ निवेश में कमी आई
- अप्रैल 2020 एलएसी पर तनाव के बाद भारत ने कहा था कि सीमा पर तनाव और व्यापार साथ-साथ नहीं हो सकता है। साथ ही चीन से सभी निवेश पर रोक लगा दी थी
- कड़े प्रतिबंधों के चलते पिछले एक साल में चीन के निवेश में गिरावट आई है। इसके चलते टेक और टेलीकॉम स्पेस में अलीबाबा और टेनसेंट जैसे टेक दिग्गज के निवेश अचानक रुक गए।
- सरकार ने 200 से अधिक चीनी ऐप्स पर सुरक्षा का कारण बता कर पाबंदी लगा दी गई थी, इनमें लोकप्रिय ऐप टिकटॉक, वीचैट और वीबो शामिल थे।
- चीन की कंपनियों को अब तक 5जी ट्रायल से बाहर रखा गया है। इसके साथ ही भारत ने हाल ही में स्मार्टफोन निर्माता Xiaomi सहित कई कंपनियों पर सख्ती बरतते हुए टैक्स चोरी मामले में भी कार्रवाई की है।

इन वस्तुओं का आयात लगातार बढ़ रहा है
भारत ने चीन से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक सामान विशेष रूप से स्मार्टफोन, भारी मशीनरी, विशेष रसायन, एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स (API), ऑटो कंपोनेंट और 2020 के बाद बड़ी संख्या में मेडिकल उपकरणों का आयात करता है।
भारत के वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में इन सभी प्रमुख आयातों में वृद्धि जारी रही। इसके साथ ही लैपटॉप-कंप्यूटर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और एसिटिक एसिड जैसे रसायनों के आयात में भारी वृद्धि देखने को मिली है।
भारत इन वस्तुओं का निर्यात करता है
लौह अयस्क, पेट्रोलियम ईंधन, कार्बनिक रसायन, रिफाइंड कॉपर, कॉटन यार्न। खाद्य वस्तुओं में मछली एवं सी फूड, काली मिर्च, वनस्पति तेल, वसा आदि प्रमुख हैं।
इन वस्तुओं का चीन से आयात करता है भारत
ऑटोमेटिक डेटा प्रोसेसिंग मशीन एवं यूनिट, टेलीफोन इक्विपमेंट और वीडियो फोन, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, ट्रांजिस्टर्स एवं सेमीकंडक्टर डिवाइस, एंटीबायोटिक्स, उर्वरक, साउंड रिकॉर्डिंग, डिवाइस और टीवी कैमरा, ऑटो कम्पोनेंट, ऑटो एसेसरीज और प्रोजेक्ट गुड्स ।





