-सुसंस्कृति परिहार
दुनियां की सबसे बड़ी आबादी रखने हमारे देश के जनाबे आली मोदीजी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के इतने अधिक दबाव में हैं कि उनकी बोलती बंद है।वे किस बात से डरे हुए हैं यह बात जनता के सामने आना चाहिए। अजीब अजीब हरकतें कर ट्म्प जनाबे आली को बदनाम कर रहे हैं और गर्व से कह रहे हैं , “वे मुझे ख़ुश करना चाहते थे। मूल रूप से मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। उन्हें पता था कि मैं ख़ुश नहीं था और मुझे ख़ुश करना ज़रूरी था” ट्रंप के इस बयान के बाद कांग्रेस ने कहा- पीएम मोदी को इसका जवाब देना चाहिए।

सच बात है सवाल तो बनता ही है।
याद करिए अभी पिछले सितंबर में अमेरिका और भारत के रिश्तों को ‘बहुत ख़ास’ बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘हमेशा दोस्त रहेंगे’ और इसमें ‘चिंता की कोई बात नहीं’ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के बयान की सराहना की थी। उन्होंने कहा है कि वह राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं की तहे दिल से सराहना करते हैं और उनका पूर्ण समर्थन करते हैं। टेरिफ वार सहने और रुस से तेल खरीदी बंद करने के बाद भी क्या ट्म्प अभी ख़ुश हैं।हाल फिलहाल फिर टेरिफ बढ़ाने की बात कर दी है। दोस्त को कुछ सूझ नहीं रहा है। अजीबोगरीब यारी है।आगे ये मुश्यकिलें कितनी बढ़ेंगी यह वक्त बताएगा।
रुस से सस्ता तेल आयात बंद करना भली-भांति देश देख और समझ रहा है हालांकि इससे रिलायंस को एक लाख करोड़ नुकसान की ख़बर सामने आई है जबकि ये ट्म्प को खुश करने के लिए था। दाऊ का इतना दबाव में उनका रहना देश को गहरे संकट में पहुंचाने वाला है।
अमेरिका के तानाशाही तेवर दुनिया देख रही है।उसका पिछला इतिहास भी बता रहा है कि जब जब अमेरिका को किसी भी देश की खनिज संस्थानों पर कब्ज़ा चाहिए वह उस देश के प्रमुख पर मनगढ़ंत आरोप लगाकर उस पर हमला करता रहा इस हमले में मित्र देशों की सेनाएं भी सहभागी बनी हैं।
उसने अफगानिस्तान,ईराक, लीबिया जैसे देशों को तबाह कर दिया है। फिलीस्तीन को मलबे में बदल दिया है। वेनेजुएला का हाल सबके सामने है।अब ईरान,क्यूबा, मैक्सिको,कोलम्बिया तथा दक्षिण अमेरिका कई देश के ग्रीनलैंड पर दाऊ की नज़र है। भारत और पाकिस्तान तो पहले से निशाने पर हैं।कहा जाता है मोदीजी की भृकुटी ज़रा टेढ़ी हुई तो भ रत को भी नहीं छोड़ेगा।
आजकल सैन्य क्षेत्र में बढ़ती तकनीकी सुविधाओं ने अब दूसरे देश पर हमला सहज बना लिया उसके घुसपेठिए हर जगह मौजूद हैं।वह चुपके से जाकर पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन को मार चुका है।जिसका शव भी नहीं मिला।हाल ही में वैनेजुएला में सोते हुए राष्ट्रपति और उनकी पत्नी का अपहरण कर ले गया।ये स्थितियां चिंताजनक हैं।
हिंदुस्तान जैसे बड़े देश कीयह चुप्पी दबाव के वशीभूत ही है।एक छोटा देश सा देश वियतनाम उसे सबक सिखा चुका है कोलम्बिया, अमेरिका को धमकी दे रहा है । वेनेजुएला के लोग हथियार बंद हो रहे। यूक्रेन आंख में आंख डालकर बात कर सकता है तो भारत के प्रधानमंत्री को क्या तकलीफ़ है एक राक्षस के आतंक के खिलाफ बोलने में।जिसके साथ पूरा भारत खड़ा है ये वही देश है जिसकी ओर एक समय पूरी दुनिया आशा से देखती रही है वह इतना कमज़ोर कैसे हो गया? ट्रम्प की इस यारी का रहस्य क्या है? मोदीजी इतने भयभीत क्यों है जो अपने पुराने मित्र राष्ट्रों के पक्ष में भी खड़े होना तो दूर की बात सहयोग की अपील भी नहीं कर सकते।
संभावना व्यक्त की जा रही है कि मोदी के घरु यार गौतम अडानी की ज़िंदगी प्यारे दोस्त के हाथों में हैं।कुछ निजी चाल चलन के मामले भी उनकी मुट्ठी में हैं जिसकी दम पर ट्रम्प मोदी से भारत को मनमाफिक चलवा रहे हैं।याद कीजिए सिंदूर आपरेशन कैसे एक आवाज में बंद हुआ।रुस से तेल आयातभी।और भी मामले हो सकते हैं जिससे वे दबाव में हैं। देश बेचैन है।जिस देश को भारत की एक प्रधानमंत्री इंदिरा जी ललकार कर पाकिस्तान से निकालकर बांग्लादेश का निर्माण करा चुकी है।आज उसी देश की खुशामदी में हमारे मोदीजी कर रहे हैं।यह बेहद शर्मनाक है इस दमन से देश को बचाना होगा। जवाब देना ज़रुरी है तथा इस चुनौती से निपटने की तैयारी ज़रुरी है ताकि देश की अस्मिता को कोई आंच ना आने पाए।