अग्नि आलोक

भारत और शेख हसीना को मौत सजा

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-सुसंस्कृति परिहार 

जब से बांग्लादेश देश की पूर्व प्रधानमंत्री आयरन लेडी नाम से जानी जाने वाली शेख हसीना को मौत की सज़ा का ऐलान किया गया है।तब से संपूर्ण देश में खलबली है कि अब भारत का रवैया क्या होगा क्योंकि वे यहां निर्वासन काट रही हैं और दिल्ली में सुरक्षित घेरे में रह रही हैं।

 विदित हो,यह सजा इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) ने ‘मानवता के खिलाफ अपराधों’ के मामले में  शेख हसीना को दोषी ठहराया है और ट्रिब्यूनल ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई है। उधर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) द्वारा फरवरी में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल बांग्लादेश में हुए विरोध प्रदर्शनों में 46 दिनों की अवधि में 1,400 से अधिक लोग मारे गए थे। हजारों लोग घायल हुए थे।इसकी पुष्टि की है।

 इस निर्णय पर शेख हसीना ने कहा है कि यह फैसला धांधली से भरे न्‍यायाधिकरण ने सुनाया है। हसीना ने कहा कि अंतरिम सरकार के उग्र तत्व उन्हें और अवामी लीग को राजनीति से समाप्त करना चाहते हैं। उन्होंने  यह भी कहा है इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) निष्पक्ष अदालत नहीं है, इसे ऐसी सरकार चला रही है जिसे जनता का कोई जनादेश प्राप्त नहीं है। 

यह शायद कभी शेख हसीना ने सपने में  भी नहीं सोचा होगा  कि उन्होंने  जिस न्यायाधिकरण का गठन कट्टर युद्ध अपराधियों पर मुकदमा चलाने के लिए किया था, वही एक दिन उन्हें कठघरे में ला खड़ा करेगा।ये वही न्यायाधिकरण  है जिसने हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई है।

शेख हसीना को सजा सुनाए जाने के बाद बांग्‍लादेश की अंतरिम सरकार ने एक बार फिर से भारत से उनके प्रत्‍यर्पण की मांग की है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि हम चाहते हैं कि भारत सरकार हसीना को बांग्लादेशी अधिकारियों को सौंपे। दोनों देशों के बीच मौजूद प्रत्यर्पण संधि के अनुसार यह भारत का दायित्व बनता है। बांग्लादेश पहले भी कई बार आधिकारिक तौर पर शेख हसीना को वापस भेजने का आवेदन करते हुए पत्र भेज चुका है। हालांकि, भारत ने आवेदनों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

ऐसी स्थिति में भारत के रुख का इंतजार सभी को है।

सूत्र बता रहे हैं कि बांग्लादेश में शेख हसीना के खिलाफ आए मौत के फैसले पर भारत के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने कहा कि भारत ने बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए इस फैसले को संज्ञान में लिया है। बयान में कहा गया कि भारत, एक करीबी पड़ोसी होने के नाते, हमेशा बांग्लादेश के लोगों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है। इसमें उस देश में शांति, लोकतंत्र, समावेशिता और स्थिरता को बनाए रखना शामिल है। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत भविष्य में भी बांग्लादेश के सभी पक्षों से रचनात्मक और सकारात्मक तरीके से जुड़ा रहेगा।

उधर शेख हसीना की माने तो वह कह रही हैं कि यूनुस के शासन में, सार्वजनिक सेवाएं चरमरा गई हैं। हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे हैं। महिलाओं के अधिकारों का दमन किया जा रहा है। प्रशासन के अंदर मौजूद इस्लामी कट्टरपंथी बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष सरकार की लंबी परंपरा को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूनुस के शासन में इस्लामिक कट्टरवादी, सरकार के संरक्षण में सक्रिय हैं। पत्रकारों को गिरफ्तार किया जा रहा है, आर्थिक विकास ठप हो गया है और यूनुस ने जानबूझकर चुनावों को टालते हुए देश की सबसे पुरानी पार्टी को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखा है।

यक़ीनन,उनकी बात पर भरोसा किया जा सकता है। क्योंकि वर्तमान में उग्रवादी ताकतें अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर सक्रिय हैं। किंतु उन पर भ्रष्टाचार के जो आरोप लगाए गए थे वह युवाओं ने लगाए थे यह सच था।इसके विरोध में युवा आंदोलन चल रहा था उसमें कट्टरपंथी ताकतों ने मिलकर उसे गलत मोड़ दिया लोग मारे गए तथा उन्हें देश छोड़ने मज़बूर होना पड़ा।उनकी पार्टी अवामी लीग चुनाव चाहती है जो युनुस सरकार पैंडिंग रखें हुए है। वैसे लोकतांत्रिक देश में निष्पक्ष चुनाव होना ही चाहिए।विदित हो ,चुनावी धांधली का भी उन पर आरोप है।भारत की भूमिका फिलहाल सराहनीय बशर्ते कहीं डोनाल्ड ट्रम्प बीच में ना कूद पड़े।

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