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बीजेपी और मोदी की नेता चुराने की मुहिम को परास्त करो…..!

illustration of Tricolor India background with Nation Hero and Freedom Fighter like Mahatma Gandhi, Bhagat Singh, Subhash Chandra Bose for Independence Day

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संघ 100 साल में कोई एक ऐसा नेता पैदा नहीं कर पाया जिसके नाम पर भाजपा चुनाव में वोट माँग सके । 

,,,, मुनेश त्यागी
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कलकत्ता के सड़कों पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ क्या बर्ताव किया था , यह बंगाल का बच्चा बच्चा जानता है , फिर भी बंगाल के चुनाव में भाजपा नेताजी के और टेगोर का नाम लेकर वोट माँगती है । 
पंजाब चुनाव आते ही भाजपा भगत सिंह की शरण में चली जाती है जबकि यह सर्वविदित है कि भगत सिंह को उस समय के संघ के नेता उन्मादी बोलते थे और भगत सिंह के जेल जाने के बाद संघ के किसी नेता , किसी वकील की उनसे मिलने या उनकी पैरवी की कोई मिसाल नहीं मिलती । उस ज़माने की किसी पत्रिका या अख़बार में भी संघ से जुड़े किसी नेता ने भगत सिंह के समर्थन में कुछ लिखा हो इसकी भी कोई जानकारी आज तक नहीं मिल पायी । 
गुजरात चुनाव में भाजपा सरदार पटेल के सहारे चुनाव में उतरती है । सरदार पटेल कांग्रेस के सर्वमान्य नेता और देश के पहले गृह मंत्री थे । गांधी जी की हत्या के बाद सरदार पटेल ने संघ को प्रतिबंधित कर दिया था । संघ के बारे में सरदार पटेल के विचार सर्वविदित हैं । (  बीजेपी देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को लेकर बहुत बुरा भला कहती है l .उनका अपमान तक करती है ।यह पंडित नेहरू ही थे कि जिन्होंने पटेल की मृत्यु के बाद उनके दोनों बच्चों,,, मणि बहन और डाह्याभाई को दो दो बार सांसद बनवाया था ।मणिबहन को 1952 और 1957 में नेहरू के कहने पर सांसद बनाया गया था और उनके बेटे दहियाभाई को 1957 और 1962 में संसद का सदस्य बनाया गया था I बीजेपी और संघ दोनों इन तथ्यों को देश की जनता से छुपाते हैं क्योंकि वह अगर देश की जनता को हकीकत बताएंगे तो देश की जनता उन पर विश्वास नहीं करेगी ,उनके बहकावे में नहीं आएगी । यह हमारा काम है कि देश की जनता को इन तथ्यों के बारे में जानकारी दी जाए और उसे बीजेपी और संघ के बहकावे में आने से बचाया जाए।,,,,मुनेश त्यागी)
अब उत्तर प्रदेश में किसानो की नाराज़गी के चलते भाजपा को अचानक राजा महेंद्र प्रताप सिंह याद आ गए । राजा महेंद्र प्रताप सिंह स्वतंत्रता सेनानी थे और यह बात बार बार बताने की ज़रूरत नहीं है कि संघ का स्वतंत्रता संग्राम से दूर दूर तक कोई सम्बंध नहीं था इसलिए राजा साहब से उनका सम्बंध होना मुमकिन नहीं है । राजा साहब लेनिन से बहुत प्रभावित थे और उनका सारी ज़िंदगी सेक्युलर विचारधारा में विश्वास रहा । 1957 में मथुरा से राजा साहब ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर लोकसभा का चुनाव लड़ा , पूरे देश के संघ विचारधारा के लोग राजा साहब को हराने के लिए मथुरा में जमा हुए और मथुरा में घर घर जाकर संघियों ने राजा साहब के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार किया । राजा महेंद्र प्रताप सिंह उसके बाद भी मथुरा से जीत गए , भारतीय जनसंघ के प्रत्याशी अटल बिहारी बाजपेई बुरी तरह से हारें और चौथे स्थान पर आए । अटल जी को बुरी तरह चुनाव हराने वाले राजा महेंद्र प्रताप सिंह जी को आज संघ के लोग अपना आदर्श बना रहे हैं । (मगर मोदी और बीजेपी का यह कदम उनके खिलाफ साबित होने जा रहा है क्योंकि वह जिस राजा महेंद्र प्रताप सिंह की शरण में गए हैं और जाट वोटों को लुभाना चाहते हैं वह राजा महेंद्र प्रताप सिंह कम्युनिस्ट थे। लेनिन से मिलने मास्को गए थे और लेनिन उनसे मिले थे। राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने भारत की सबसे पहली सरकार 1915 में काबुल, अफगानिस्तान में बनाई थी जिसमें राजा महेंद्र प्रताप सिंह को भारतवर्ष का पहला राष्ट्रपति और बरकतुल्लाह खान को भारत का पहला प्रधानमंत्री बनाया गया था और ओबेदुल्ला खान को गृह मंत्री बनाया गया था। बीजेपी यहां भी तथ्यों को छिपा रही है, मोदी भी हकीकत और तथ्यों को छिपा रहे हैं और सच को जनता के सामने नहीं ला रहे हैं। हम राजा महेंद्र प्रताप सिंह और बरकतुल्लाह खान की जोड़ी को नहीं भूल सकते। यह हमारी भारतवर्ष की गंगा जमुनी और मिली जुली तहजीब और संस्कृति की एक महान मिसाल है जिसे बीजेपी और मोदी छुपाना चाहते हैं। मगर यह जनता है कि सब जानती है। लोग मोदी के इस झूठ को भी जनता के सामने नंगा करेंगे और जनता को इसके बारे में बताएंगे और उनकी नेता चुराने और कब्जाने की मुहिम को परास्त करेंगे और उन्हें अपनी इस हरकत में सफल नही होने देंगे। ,,,,,,, मुनेश त्यागी)
आदर्श चुराने की इनकी आदत पुरानी है क्योंकि यह खुद अच्छे से जानते है कि इनके संगठन के पास ऐसा कोई नेता कभी नहीं हुआ जिसके नाम पर जनता इन्हें वोट दे सके । इब्न ए आद

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