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 दिल्ली गैस चेंबर बनी हुई है,कैसे हल हो समस्या 

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चंद्रभूषण
आज की तारीख में जो दिल्ली गैस चेंबर बनी हुई है, उसमें साठ से सत्तर फीसदी प्रदूषण या तो दिल्ली का अपना है, या वह पराली जलाने के कारण पंजाब से आ रहा है। जो लोग अभी तक यह मान रहे थे कि पराली जलाना कोई गंभीर वायु प्रदूषण नहीं पैदा करता, उनके लिए कुछ आंकड़ों को समझना जरूरी है-

कैसे हल हो समस्या
इसलिए, दिल्ली में प्रदूषण पंजाब और दिल्ली दोनों की समस्या है। जब तक पंजाब और दिल्ली साथ बैठकर इस मुद्दे को हल नहीं करेंगे, दिल्ली गैस चेंबर बनती रहेगी। लेकिन दिल्ली सरकार पड़ोसी राज्यों के साथ ठोस समाधान पर काम करने के बजाय पानी के छिड़काव, स्मॉग टावर और निर्माण पर रोक जैसे अप्रभावी समाधान लागू कर रही है-

दिल्ली में कैसे कम होगा प्रदूषण

लब्बोलुआब यह है कि AAP सरकार को दूसरों को दोष देना बंद करना होगा और दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में प्रमुख प्रदूषण स्रोतों को कम करने के बारे में गंभीर होना होगा। तो, दिल्ली सरकार क्या कर सकती है, आइए जानते हैं-

ग्रीन सेस का इस्तेमाल
जहां तक पैसे का सवाल है, आज की तारीख में दिल्ली एक हजार करोड़ रुपये के ग्रीन सेस पर बैठी है, जिसका वह इस्तेमाल नहीं कर रही। यह धन दिल्ली में आने वाले डीजल के ट्रकों से कलेक्ट किया गया है। तो यह कहना कि दिल्ली सरकार के पास प्रदूषण कम करने के लिए पैसा नहीं है, सरासर गलत है। दिल्ली सरकार अगर चाहती तो इस साल वह पंजाब सरकार की सहायता करके पराली बंद कर देती। खेद की बात है कि दिल्ली सरकार ऐसा करना नहीं चाह रही है।

(लेखक iForest के CEO हैं)

प्रस्तुति: राहुल पाण्डेय

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