मुनेश त्यागी
दिल्ली सरकार द्वारा 10 सितंबर 2021 को गणेश चतुर्थी को किए जाने वाला अर्चना पूजा का कदम एकदम अंधविश्वासी और धर्मांध कदम हैं। सरकार को ऐसे प्रतिगामी काम से अलग रहना चाहिए। दिल्ली सरकार का यह कार्य सबसे निम्न स्तरीय कामों की श्रेणी में गिना जाएगा।
सरकार द्वारा आयोजित ऐसे कदमों से धर्मांधता और अंधविश्वासों को फलने-फूलने में बल मिलता है। जनता इस अंधविश्वास और धर्मांधता में फंसकर रह जाती है। सरकार को धार्मिक अनुष्ठान नही करने चाहिए, सरकार को इनसे अलग रहना चाहिए। वैसे तो यह धार्मिक अनुष्ठान बंद होने चाहिए मगर अगर यह होने ही हैं तो इन्हें व्यक्तिगत स्तर पर छोड़ देना चाहिए।
दिल्ली सरकार का यह कदम एकदम अचंभित और स्तब्ध करने वाला है। दिल्ली सरकार यह अनुष्ठान करके जनता के सामने क्या सिद्ध करना चाहती है? क्या इस अनुष्ठान के करने से जनता को रोजी मिल जाएगी? उसे रोटी मिल जाएगी? उसे आधुनिक शिक्षा मिल जाएगी? उसे आधुनिकतम इलाज मिल जाएगा? उसकी बेरोजगारी दूर हो जाएगी? क्या इससे गरीबी मिट जाएगी? आखिर सरकार साबित क्या करना चाहती है?
अगर यह अनुष्ठान करके दिल्ली सरकार यह बताना चाहती है की गणेश की स्तुति से शिक्षा बढ़ती है, समृद्धि बढ़ती है, रोजगार बढ़ता है, पूरा देश धन्य धान्य पूर्ण हो जाता है तो हमारा कहना है कि सरकार का यह मानना पूर्णतया निराधार है। गणेश की पूजा और स्तुति हजारों साल से की जा रही है, मगर इस सब के बावजूद भी हमारा देश दुनिया में सबसे ज्यादा अशिक्षित, 77 करोड गरीब और सबसे ज्यादा बेरोजगारी से परिपूर्ण है, यहां पर भ्रष्टाचार दिन दूनी रात चौगुनी गति से बढ़ रहा है। यह सब गणेश के रहते हुए हो रहा है। अतः सरकार की इस दलील में कोई जान नहीं है और यह जनता को बेवकूफ बनाने वाली बात है, उसकी आंखों में धूल झोंकने वाली बात है।
हां सरकार के इस कदम से जनता में अज्ञानता में वृद्धि होगी। लोग विवेक और बौद्धिकता का इस्तेमाल न कर अंधविश्वासों और धर्मांधता के जाल में और ज्यादा फंसेंगे। इससे धर्मांध लोगों की दुकान चलने में आसानी होगी, वह लोगों को और ज्यादा मूर्ख बना सकेंगे। अब तो उनके पास कहने को यह बहाना भी हो जाएगा कि देखो, हम ही नही, अब तो सरकार भी यह धार्मिक अनुष्ठान करने लगी है। इससे विवेक और तर्क शीलता की नीति को और अभियान को ठोस पहुंचेगी।
दिल्ली सरकार का यह कदम एकदम संविधान विरोधी है, ज्ञान विज्ञान विरोधी है। भारत का संविधान कहता है की ज्ञान की खोज होनी चाहिए, विज्ञान की खोज होनी चाहिए, ज्ञान विज्ञान का आंदोलन जनता के बीच ले जाना चाहिए और जनता में फैली अज्ञानता, धर्मांधता और अंधविश्वासों पर चोट की जानी चाहिए ताकि जनता में ज्ञान विज्ञान और वैज्ञानिक संस्कृति का प्रचार-प्रसार हो, वह अनुसंधान करे, खोज करे, उल जलूल धार्मिक प्रतिष्ठान के अनुष्ठान करने से बचे।
अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली सरकार का यह कदम एकदम जन विरोधी, ज्ञान विरोधी और विज्ञान विरोधी है और धर्मांधता, अंधविश्वास और पाखंडों को बढ़ाने वाला है।हम दिल्ली सरकार के इस कदम की कठोरतम शब्दों में निंदा करते हैं। सरकार को ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए।
हमने सोचा था और हमें उम्मीद और विश्वास था कि अरविंद केजरीवाल की सरकार जनता को ज्ञान विज्ञान के मुद्दे को लेकर साक्षर करेगी, इस ज्ञान विज्ञान के अभियान को आगे बढ़ाएगी और सारी जनता को जागरूक करेगी मगर सरकार के इस कदम से हमारी उस उम्मीद पर पानी फिर गया है। यह सरकार भी दूसरी सरकारों की तरह जनविरोधी, विज्ञान विरोधी और ज्ञान विरोधी हरकतों पर उतर आई है और किसी भी कीमत पर सत्ता में बने रहने का ढोंग कर रही है। हमें लगता है कि ऐसा करके वह धर्मांध और अंधविश्वासों के सहारे रहने वाले ढोगियों की कतार और संख्या में इजाफा करेगी,उनका दायरा बढ़ाएगी, उनका मनोबल बढ़ाएगी और उन्हें ताक़त प्रदान करेगी। सरकार का यह कदम एकदम असंवैधानिक एवं ज्ञान विज्ञान विरोधी है और किसी भी कीमत पर सहमत होने वाला नहीं है।
मिस्टर केजरीवाल और मिस्टर सिसोदिया, आप तो जनता को इस जनविरोधी व्यवस्था का विकल्प देने चले थे, जनता को उजालों की ओर ले जाने के लिए सत्ता में आए थे, मगर आप यह क्या करने लग? आप तो खुद ही जनता को अंधेरों की ओर ले जाने लगे। सारी दुनिया का इतिहास गवाह है की आज जनता की भलाई और उसका कल्याण, धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों को अपना कर ही किया जा सकता है।इन सिद्धांतों को आगे बढ़ा कर जनता को अंधविश्वास, धर्मांधता, ढोंग और ढपोरशंख के जाल से बाहर निकाला जा सकता है।मगर आप तो उल्टा ही करने लगे।आपने तो जनता को अंधेरों की ओर जाने का निश्चय कर लिया है जो भारतीय संविधान के प्रस्तावना और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ है।
हम दिल्ली की जनता के जनवादी, प्रगतिशील, ज्ञान विज्ञान में विश्वास रखने वाले और वैज्ञानिक संस्कृति को बढ़ावा देने वाले समस्त लोगों से अपील करते हैं कि वह सरकार के इस कदम का विरोध करें और किसी भी हालत में सरकार के इस ज्ञान विज्ञान विरोधी और अंधविश्वास और धर्मांधता को बढ़ाने वाले कदम को बढ़ावा न देंऔ और पूरी ताकत के साथ इस कदम का विरोध और खंडन करें।
एक भारतीय और ज्ञान विज्ञान का विद्यार्थी होने के नाते और वैज्ञानिक संस्कृति के प्रचार प्रसार में विश्वास करने वाला होने के कारण दिल्ली सरकार से मांग करते हैं कि सरकार को इस अंधविश्वासी, धर्मांध और ज्ञान-विज्ञान विरोधी कदम से पीछे हट जाना चाहिए और अपने कदम वापस खींच लेना चाहिए। इससे जनता में एक सकारात्मक संदेश जाएगा और और उसमें ज्ञान विज्ञान और वैज्ञानिक संस्कृति के पैदा होने में बल मिलेगा। अंत में हम तो यही कहेंगे,,,
वो अंधेरों की तिजारत कर रहे हैं तो करें,
तुम अंधेरी बस्तियों में रोशनी बांटा करो।

