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ट्रंप के लाख विरोध के बावजूद ममदानी की जीत ट्रंपवाद के खिलाफ जनादेश

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लाल बहादुर सिंह

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के लाख विरोध के बावजूद ममदानी ने न्यूयार्क के मेयर पद पर चुनाव जीत लिया है। इस जीत का श्रेय उनकी लोक कल्याणकारी योजनाओं को दिया जा रहा है।

जोहरान ममदानी ने चुनाव जीतने पर बसों में यात्रा मुफ्त करने का वादा किया था। उन्होंने न्यूयॉर्क में अगले चार साल तक घरों का किराया न बढ़ाने का नियम लागू करने का वादा किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि वे सरकारी पैसों से दो लाख मकान बनाकर गरीबों को देंगे और लोगों को सस्ता राशन उपलब्ध कराने के लिए सस्ती राशन की दुकानें खोलेंगे। ममदानी का ये दांव मध्य वर्ग के लोगों और आप्रवासियों पर सबसे कारगर साबित हुआ और उन्होंने चुनाव जीत लिया।

उन्हें चुने जाने में सबसे बड़ी भूमिका अमेरिका के अश्वेत (55 प्रतिशत) और एशियन (51 प्रतिशत) लोगों ने निभाई है। ममदानी का जादू सबसे ज्यादा जेन जी के बीच चला है जिसमें 15 से 29 वर्ष के बीच के 78 प्रतिशत युवाओं ने उन्हें वोट दिया । ममदानी को यह समर्थन राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों के खिलाफ जनादेश माना जा रहा है। बहरहाल अब ममदानी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह मानी जा रही है कि सीमित बजट में वे अपने वायदों को कैसे पूरा करेंगे।।

यह केंद्र से मिलने वाली सहायता के बिना संभव नहीं होगा। उधर ट्रंप ने धमकी दिया है कि ममदानी के जीत जाने पर वे न्यूयॉर्क का बजट रोक देंगे।

ममदानी अप्रवासी लोगों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरे हैं। अप्रवासियों को लग रहा है कि ममदानी के चुने जाने से उनके अमेरिका से बाहर होने का खतरा टल गया है। वह पहले मुस्लिम और एशियन हैं, जो न्यूयॉर्क के मेयर चुने गए है।जोहरान ममदानी भारतीय मूल के हैं। उनकी मां मीरा नायर प्रसिद्ध फिल्मकार हैं तो पिता महमूद ममदानी है जो विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं।

भारतीय मूल के व्यक्ति का न्यूयॉर्क का मेयर बनना भारतीयों के लिए गर्व की बात होनी चाहिए है लेकिन यह शर्मनाक और अफसोसनाक है कि फासीवादी ताकतें इस घटना को भी सांप्रदायिक नजरिए से देख रही हैं।

कथित संत यति नरसिंहानंद का बयान सामने आया है। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उसमें वह कह रहे हैं, लंदन के बाद एक मुसलमान न्यूयॉर्क का मेयर बना है. इसकी मां हिंदू है और इसकी पत्नी भी हिंदू है। आगे यति कहते हैं, ये महा विनाश की बेला है। इसके बाद यति मुसलमानों पर काफी विवादित टिप्पणी भी कर रहे हैं।  

यति नरसिंहानंद वीडियो में ज़ोहरान ममदानी की मां के साथ पत्नी को भी हिंदू कहते हुए नजर आ रहे हैं, आपको बता दें कि जोहरान ममदानी की मां तो हिंदू हैं, मगर उनकी पत्नी सिरियन मूल की हैं।  

वैसे भी पहले ही अमेरिकी कांग्रेस से बजट पास न कराने के कारण पूरे देश में शटडाउन लागू करने के लिए मजबूर हुए ट्रंप के पास अतिरिक्त बजट की संभावना बहुत कम ही है।  

अपने वादों को पूरा करने के लिए ममदानी के पास अमीरों पर कर बढ़ाने का एक विकल्प है। अमेरिका में भी केंद्र सरकार ही कर एकत्र करती है। शहरी व्यवस्था को चलाने के लिए टैक्स बढ़ाने के उनके विकल्प पूरी तरह खत्म तो नहीं हैं, लेकिन उनके विकल्प सीमित अवश्य हैं। लेकिन इससे वे कितना फंड एकत्र कर पाएंगे, यह कहना मुश्किल है।

34 वर्षीय ममदानी तेज तर्रार लोकतांत्रिक समाजवादी हैं। न्यूयॉर्क के इतिहास में वे दूसरे सबसे कम उम्र के मेयर हैं। ममदानी की जीत दरअसल ट्रंप की विभाजनकारी राजनीति और उनकी अमीरपरस्त अर्थनीति की भारी पराजय है।

गौर तलब है कि यह वही न्यूयॉर्क शहर है जहां 11 सितंबर 2001 को आतंकवादियों ने दो टावरों को जमीदोंज कर दिया था। जिसमें 3000 के करीब अमेरिकी मारे गए थे। दरअसल उसी घटना के बाद इस्लामोफोबिया का जहर पूरी दुनिया में फैलाया गया। भारत पर भी इस विभाजनकारी राजनीति का गहरा असर पड़ा।

इस सब के बावजूद ममदानी को जिताकर जनता ने अपनी बहु सांस्कृतिक एकता के प्रति पुनः अपने अडिग विश्वास का इजहार किया है। देश के सबसे बड़े शहर में जो एक तरह से अमेरिका की विविधता का ही एक छोटा रूप है वहां अमेरिकी जनता ने मामदानी को जिताकर एक तरह से ट्रंप की अलगाव मूलक राजनीति को खारिज करने का संदेश दिया है।

समाज और राजनीति पर ट्रंप की पकड़ कितनी कमजोर है ममदानी की जीत ने इसका भी संकेत दे दिया है। फिलिस्तीन के उनके समर्थन के कारण ट्रंप ने उन्हें स्वघोषित यहुदियों से नफरत करने वाला करार दिया। और कहा कि जो यहूदी उन्हें वोट देगा वह मूर्ख है।

दरअसल ट्रंप का उभार ही धार्मिक और नस्लवादी भावनाओं के उभार से हुआ था। उनके कहने का अर्थ यह था कि ममदानी की मुस्लिम पैतृकता उन्हें संदिग्ध बना देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममदानी की रैडिकल वामपंथी राजनीति न्यूयॉर्क को बर्बाद कर देगी।

ममदानी ने ट्रंप के आरोपों का जबरदस्त जवाब देते हुए अपने हर भाषण में कहा कि मेरी माँ हिंदू हैं, पिता मुस्लिम हैं और मैं अमेरिकी हूं जिससे ट्रंप डरते हैं।

ममदानी की जीत से स्वाभाविक रूप से इजरायल में तीखी प्रतिक्रिया हुई है क्योंकि मामदानी खुले आम फिलिस्तीन के समर्थन की घोषणा करते हुए चुनाव लड़ रहे थे। जाहिर है दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी यहूदी आबादी वाले शहर में एक इजराइल विरोधी के जीतने से इज़राइल सकते में है। मजेदार यह है कि एक तिहाई यहूदियों ने भी ममदानी को वोट दिया है।

एक विश्लेषक ने आश्चर्य व्यक्त किया है कि जहां यहूदी ताकत का, यहूदी यादों का, यहूदी संस्कृति का और यहूदी राजनीतिक प्रभाव का जबरदस्त संकेद्रण है वहां एक आदमी स्पष्ट इजरायल विरोधी प्लैंक पर चुनाव कैसे जीत सकता है!

ममदानी ने खुलकर गाजा में इसराइली  जनसंहार को अपने चुनाव का एक प्रमुख मुद्दा बनाया और चेतावनी दी कि मानवाधिकार के उल्लंघन के लिए वे नेतन्याहू को गिरफ्तार करवा सकते हैं अगर वे न्यूयॉर्क शहर में कदम रखते हैं।

जाहिर है ममदानी के सामने अपने वायदों को पूरा करने के रास्ते में गम्भीर चुनौतियां हैं। यह भविष्य बताएगा कि वे अपने वायदों को पूरा करने के लिए लड़ते हुए अमेरिका का राष्ट्रपति बनने की ओर कदम बढ़ाते हैं अथवा मेयर के रूप में विफल होकर गुमनामी में खो जाते हैं!


(लेखक इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष हैं।)

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