शशिकांत गुप्ते
सीतारामजी ने आज मिलते ही कहा, विकास बहुत क्रोधित है। मैने पूछा कौन विकास?
सीतारामजी मेरा प्रश्न सुनकर हँसने लगे।
सन 2014 में जन्मे विकास को नहीं जानते हो? अभी सिर्फ आठ वर्ष का हुआ है।
मैने पूछा सिर्फ आठ वर्ष की आयु में इतना समझदार हो गया है? बहुत बोलने लगा है? बात बात में क्रोधित क्यों होता है?
सीतारामजी ने कहा यही तो समस्या है कि, विकास सिर्फ बोलता है। लोग उसे वाचाल कहने लगे है। विकास को सिर्फ आठ वर्ष का इतिहास ही ज्ञात है। सन 1947 से 2014 तक का कुछ भी याद नहीं है।
विकास पढ़ता है,लेकिन प्रमाण पत्र में प्राप्त करने में विश्वास नहीं रखता है। हिंदी माध्यम की पढ़ाई आंग्ल भाषा में करता है। दवाई को हिंदी में मेडिसिन कहता है।
मैने पूछा आपको कैसे पता चला कि विकास क्रोधित है?
सीतारामजी ने कहा कुछ मनोचिकित्सक कह रहें हैं। विकास की आयु बढ़ रही है लेकिन मानसिक और शारीरिक प्रगति नहीं हो रही है।
विकास निराशा (Frustration) की मानसिकता है।
मनोचिकित्सकों को डर है, विकास कहीं अवसाद (Depression) में न चला जाए?
मानसिक रोगियों का इलाज़ दो तरह से होता है,एक दवाई देकर और दूसरा परामर्श (counseling) कर इलाज़ किया जाता है।
विकास की मानसिक स्थिति इसलिए कमजोर हो गई है कि, उसे प्रगति नाम की दवाई पिलाई जाती है,विश्वास नामक गोली खिलाई जाती है। मानसिक रोगियों को कोई भी दवा पिलाओ या गोली खिलाओ रोगियों को सिर्फ नींद आती है। आठ वर्षों से विकास नींद में ही है। नींद में ही बड़बड़ाता है,370,तीन तलाक़, राम मंदिर,दिव्यभव्य शिवालय, पकौड़े, बड़बड़ाते हुए पुनः सो जाता है।
मनोचिकित्सक का कहना है विकास को counseling की जरूरत है।
काउन्सलिंग कर विकास की मानसिकता में गहराई से जमे छद्म प्रगति,झूठे विश्वास को बाहर करना पड़ेगा। विकास को यथार्थ से अवगत करवाना पड़ेगा।
इसलिए दूसरी राय (second opinion) लेना जरूरी है।
घिसीपिटी पद्धति को बदलना ही होगा।
वैसे भी झोला छाप चिकित्सको से इलाज करवाना जोखिम ही तो है। झोला छाप चिकित्सकों का व्यवसाय सिर्फ विज्ञापनों पर ही चलता है। झोला छाप चिकित्सक कभी भी झोला उठाकर पलायन करने में निपुण होतें हैं।
शशिकांत गुप्ते इंदौर

