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*स्ट्रेस और सेक्स का अंतर-संबंध एवं समाधान*

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       डॉ. विकास मानव

मानसिक तनाव को कम करने के कई उपाय हो सकते हैं। मेडिटेशन, फिजिकल ऐक्टिविटी, अपनों से बातचीत, अपने शौक पूरे करने, पर इन सभी से बेहतर एक तरीका सहवास। इसमें प्यार, आलिंगन और क्लाइमैक्स तक पहुंचने का सफर होता है। 

     अगर दोनों पार्टनर इसमें मन और तन से संपूर्ण भागीदारी करें तो सेक्स पॉजिटिविटी की ओर ले जाता है।

तनाव न हो तो मुश्किल (पुरुषों में इरेक्शन की परेशानी) और तनाव (मानसिक) हो तो भी जीना मुश्किल। इतना ही नहीं, कई पुरुषों के लिए तनाव ही उनके मानसिक तनाव को कम करने का जरिया होता है। 

     सीधे शब्दों में कहें तो स्ट्रेस को कम करने में सेक्स भी एक जरिया है, लेकिन इस बात का ध्यान रखना है कि यह जरिया दोनों पार्टनर को पसंद आए।

   जब एक पार्टनर ऑफिस से अपने साथ स्ट्रेस लाता है तो वह इसे दूर करने के लिए सेक्स, मैस्टरबेशन, पॉर्न आदि का सहारा लेना चाहता है। वहीं समस्या तब खड़ी होती है जब दूसरा पार्टनर इसे महसूस नहीं करता या फिर वह सेक्स की फैंटसी में जल्दी जाना नहीं चाहता। 

      यहां एक बात का और भी जिक्र करना जरूरी है कि पॉर्न की लत न लगे, इस बात का ध्यान भी रखना है। हकीकत यह है कि सेक्स में क्लाइमैक्स तक की यात्रा अक्सर स्ट्रेस को दूर भगाती है।

      वात्स्यायन के ‘कामसूत्र’ में लिखा है कि सहवास सिर्फ शारीरिक ही नहीं, मानसिक सुख का भी स्रोत है। मॉडर्न साइंस के अनुसार, एक अच्छा सेक्स (जिसमें दोनों पार्टनर की रजामंदी हो और दोनों को संतुष्टि मिले) मन को खुश करता है। जब भी दो पार्टनर अपनी रजामंदी से सहवास में शामिल होते हैं और वे क्लाइमैक्स तक पहुंचते हैं तो उनका मानसिक तनाव कम होता है। 

    वैसे भी सेक्सॉलजिस्ट के बीच एक कहावत मशहूर है कि स्ट्रेस और सेक्स एक ही वक्त में एक साथ नहीं रह सकते। सीधे कहें तो अगर दो पार्टनर ने सफल सहवास कर लिया है तो स्वाभाविक तौर पर वे स्ट्रेस से बाहर होंगे।

       दरअसल, हेल्दी सेक्स के दौरान ज्यादा मात्रा में सेरोटोनिन (नींद लाने में भी मददगार और पॉजिटिव हार्मोन) और डोपामाइन (खुशी का हॉर्मोन) जैसे हार्मोन को निकालने में भी मदद करता है। 

     क्लाइमैक्स से नींद का है कनेक्शन. कई लोग सेक्स या मैस्टरबेशन को नींद वाले टूल की तरह इस्तेमाल करते हैं। नींद न आने की स्थिति में सेक्स के माध्यम से क्लाइमैक्स तक पहुंचने की कोशिश करते हैं।

   कुछ लोग जब पार्टनर तैयार न हो तो मैस्टरबेशन का सहारा लेते हैं। आजकल इन सभी के लिए पॉर्न देखना आम है, पर ध्यान रखना चाहिए कि ज्यादा देखने से पॉर्न की लत भी लग सकती है। इससे बचना चाहिए। एक हेल्दी सेक्स या मैस्टरबेशन (कल्पना में मिलन) के दौरान सिर्फ दो शरीरों का मिलन नहीं होता, इस मिलन में भावनात्मक जुड़ाव भी चरम पर होता है। सिर्फ नुकसान.

       कभी कभी ऐसा होता है कि दोनों पार्टनर के बीच दिनभर आपस में तनाव रहा, अबोला रहा और रात आई और अंतरंग पलों नेआपसी तनाव को छूमंतर कर दिया। सीनियर सायकायट्रिस्ट और सेक्सॉलजिस्ट डॉ. संजय चुघ कहते हैं कि ‘सहवास में कई तरह के पॉजिटिव हार्मोन निकलते हैं। इससे दोनों का मूड ठीक हो जाता है। 

     इसमें कुछ फिजिकल ऐक्टिविटीज जैसी फीलिंग भी आती है। जिस तरह हम वॉक करते हैं, जिम में वर्कआउट करते हैं तो हम अच्छा महसूस करते हैं, इसी तरह की फीलिंग सहवास के बाद भी आती है। इससे फील गुड होता है।’ लेकिन एक पक्ष यह भी है कि अपने तनाव को कम करने के लिए सहवास का सहारा लेता है, लेकिन दूसरा पक्ष कई बार इसके लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं होता।

   दूसरे पार्टनर का इससे स्ट्रेस बढ़ भी सकता है। इसलिए जरूरी है दोनों पार्टनर के बीच खुले मन से बात हो। एक सामंजस्य हो ताकि पॉजिटिविटी का एहसास दोनों पार्टनर को हो।     

      ऐसी स्थिति में जब एक तैयार हो और दूसरा न हो तो रास्ते और भी हैं.

शौक भी जरूरी. अपने शौक को नहीं छोड़ें। म्यूजिक, डांस, पेट्स – जो भी अच्छा लगे। उसके लिए समय निकालें। सुबह उठना, योग और एक्सरसाइज करना हमेशा से फायदेमंद है। 

     कई लोग इसे तरजीह नहीं देते जबकि स्ट्रेस दूर भगाने में सुबह की हवा, 15 मिनट का योग, 30 मिनट की वॉक और एक्सरसाइज बहुत मायने रखते हैं। पसंदीदा किताब पढ़ना भी तनाव भगाने में मददगार साबित होता है। 

      जिस तरह मेडिटेशन करने से, हर दिन एक्सरसाइज के माध्यम से पसीना निकालने का सीधा फायदा मानसिक तनाव कम करने में और शारीरिक रूप से मजबूत होने में होता है, उस तरह का उपयोग या फायदा सहवास का नहीं हो सकता। 

    इसकी वजह यह है कि योग, एक्सरसाइज आदि तो 50-60 साल की उम्र के बाद भी कर सकते हैं, लेकिन सेक्स करने की जितनी फ्रीक्वेंसी 25-30 की उम्र में होती है, उतनी ज्यादा 50-60 की उम्र में अमूमन नहीं होती। मेडिटेशन परफेक्ट पर्शन अपवाद है. वह तो घंटों सेक्स करता है.  खुद की बात बताऊँ तो, मैं एक बेड पर एक रात में 15 ‘हॉटेस्ट’ फीमेल्स को बेसुध होने तक का सुप्रीम सटिस्फैक्शन दे सकता हूँ. चैलेंज मिलने की सेचुएशन में पिछले साल अफ़्रीकी फीमेल्स पर ऐसा प्रयोग कर चुका हूँ, वो भी लगातार 15 दिन.

    जीवन में कोई भी बदलाव स्ट्रेस की वजह हो सकता है। यह बदलाव जॉब में, फैमिली में, सोसायटी में, सेहत में, सोच में, किसी दूसरे से तुलना में, ऐसी किसी भी चीज में हो सकता है, खासकर तब जब हम इन्हें स्वीकार नहीं कर पाते।

       यह उस समय बढ़ जाता है जब हमारे रिसोर्स कम होते हैं लेकिन काम ज्यादा होता है या हमारी पहुंच में नहीं होता।  कई बार बेड पर बहुत ज्यादा उम्मीद लगा लेना भी स्ट्रेस की कारण हो सकता है। यह उम्मीद खुद से भी और अपने पार्टनर से भी लोग लगा लेते हैं। ऐसे में उम्मीद का दबाव स्ट्रेस की वजह बन जाता है।

       सीधे कहें तो कई बार सेक्स के दौरान सही परफॉर्मेंस न कर पाना भी तनाव का कारण होता है। कई बार यह आपसी कलह का कारण बनता है। 

     तात्कालिक (शॉर्ट टर्म) तनाव में एग्जाम की टेंशन, कहीं जाने की टेंशन आदि हो सकती है। वैसे तो यह तनाव कुछ घंटों या दिनों में चला जाता है। इस तरह के तनाव में हम कुछ दिनों के लिए नींद डिस्टर्ब कर लेते हैं। कई बार इसमें प्यास ज्यादा लगती है। 

     भूख बहुत तेज या बहुत कम लगती है। हम अस्थिरता का अनुभव करते हैं। इस तरह के तनाव से राहत के लिए जरूरी है कि रिलेक्स करें। आंखें बंद करके 10 मिनट के लिए लेट जाएं। चाहें तो पसंद का गीत-संगीत सुनें। शौक पूरा करें। अगर घर में पेट्स हैं तो उसके साथ खेलें। इसके लिए किसी डॉक्टर या दवा की जरूरत नहीं होती। 

      अगर पार्टनर है तो स्वाभाविक तौर पर सेक्स के माध्यम से या मैस्टरबेशन से क्लाइमैक्स तक पहुंचने से भी स्ट्रेस कम होता है।

      लंबे समय (लॉन्ग टर्म) वाला तनाव : इसमें ऐसे तनाव आते हैं, जिन्हें हम अपनी कोशिशों से दूर कर सकते हैं। मसलन: अगर किसी की जॉब छूट गई हो या छूटने वाली हो। बिजनेस में नुकसान हुआ हो। कोई बीमार हो गया हो। बीमारी में भी अगर लाइफस्टाइल से जुड़ी परेशानी है तो इसके लिए हमारी कोशिशें ही कामयाब होती हैं। ऐसे तनाव लंबे समय के लिए होते हैं। 

       इसमें अमूमन शॉर्ट टर्म टेंशन के लक्षण तो होते ही हैं, साथ में कुछ और भी लक्षण हो सकते हैं। कुछ लोगों को नशा करने का मन करने लगता है। बार-बार गुस्सा आता है। इस तरह के तनाव में राहत के लिए जरूरी है कि अपने रिसोर्स बढ़ाएं।

इन परिस्थितियों में अगर पार्टनर का साथ और सपोर्ट मिले तो चुनौतियां कम हो जाती हैं। इसी के साथ जिस तरह की समस्या हो, उसी तरह के उपाय करें। 

     अगर जॉब छूट गई है तो अपने दोस्तों, संबंधियों और पहचान वालों को बताएं कि आपको जॉब की जरूरत है। वहीं, अगर लाइफस्टाइल वाली परेशानी जैसे शुगर,बीपी या थायरॉइड वाली समस्या हो गई है तो डॉक्टर की सलाह से दवा लें और अपना रुटीन सुधारें। न कि खुद को कोसते रहें और तनाव में रहें। यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि लॉन्ग टर्म वाले स्ट्रेस में भी सहवास या मैस्टरबेशन के माध्यम से तनाव कम हो सकता है।

     जरूरी बात : दरअसल, सेक्स का मतलब सिर्फ क्लाइमैक्स तक पहुंचना नहीं होता। इससे अपने पार्टनर पर भरोसा बढ़ता है। इमोशनल सपोर्ट मिलता है। आत्मीयता बढ़ती है।

       ‘सेक्स के दौरान टेस्टास्टरोन हार्मोन काफी ऐक्टिव रहता है। इस वजह से शरीर में दूसरे पॉजिटिव हार्मोन भी ज्यादा मात्रा में निकलते हैं जो तनाव कम करके मूड ठीक करते हैं। जो शख्स सेक्स नहीं करते या नहीं करना चाहते या जिनके पास पार्टनर नहीं है या पार्टनर तैयार नहीं है और वह पार्टनर को मजबूर नहीं करते तो वे अगर मैस्टरबेशन करके तनाव कम करते हैं तो इसे गलत नहीं समझना चाहिए।’

     जब महिला कोल्ड, सिक या डेड-सी हो जाए या पुरुषों की सेक्स इच्छा  कम हो जाए तब स्वाभाविक तौर पर सेक्स को स्ट्रेस कम करने वाले टूल के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकते। योग, मेडिटेशन, फिजिकल ऐक्टिविटी ऐसे दूसरे टूल्स हैं जिन्हें जीवन में जारी रखना चाहिए। 

    सहवास या संभोग में अगर दोनों पार्टनर की भागीदारी नहीं होगी तो सहवास के माध्यम से क्लाइमैक्स तक पहुंचने का रास्ता एक पार्टनर के लिए भले ही तनाव कम करने वाला हो, दूसरे के लिए यह सिरदर्दी ही होती है। दूसरे पार्टनर का इससे स्ट्रेस और बढ़ता है। 

   फ्री ऑफ़ कॉस्ट कम्प्लीट ट्रीटमेंट और अनलिमिटेड मल्टीपल आर्गेज्मिक सेक्सुअल सटिस्फैक्शन दोनों का प्रबंधन हम करते हैं.

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