सुसंस्कृति परिहार
बहुत दिन हो गए कांग्रेस को पाकिस्तानी कहे हुए। मुस्लिमों के पैरोकार वामदल,कांग्रेस और उससे पैदा तृणमूल,बसपा , समाजवादी पार्टी, राजद वगैरह जिस तरह मुस्लिमों के साथ खड़े होते हैं वह कथित हिंदुत्व वादी पार्टी भाजपा को नागवार गुजरता है ।लेकिन नंबर वन दुश्मन कांग्रेस , जिस पर पाकिस्तान परस्त होने के आरोप लगाए बिना भाजपाई नेताओं को नींद नहीं आती आज फिर एक मौका मिल गया जब राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने कश्मीर में धारा 370हटाए जाने पर क्लब हाउस चेट के दौरान कहा कि, ‘धारा 370 हटने के बाद से कश्मीर में लोकतंत्र और इंसानियत नहीं बची है। कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाना बहुत दुखद निर्णय था और कांग्रेस पार्टी इस पर री लुक करना चाहती है।” दरअसल, क्लब हाउस आईओएस और एण्ड्रॉइड के लिए एक सोशल मीडिया ऐप है जहां उपयोगकर्ता वॉयस चैट रूम में संवाद कर सकते हैं जो 5,000 लोगों के समूह को समायोजित करते हैं। यह ऐप केवल वॉयस चैट का ही समर्थन करता है। इसमें पाकिस्तानी ही नहीं दुनिया से कोई भी पत्रकार शामिल हो सकता है। इस ख़बर पर पहली प्रतिक्रिया जम्मू कश्मीर से बीजेपी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री कवींद्र गुप्ता की आई उन्होंने कांग्रेस पर वार करते हुए कहा है कि दिग्विजय सिंह का ये बयान ‘शर्मनाक’ है। 5अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद से, कांग्रेस ने केंद्र सरकार के इस कदम के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। गुप्ता ने कहा, “कांग्रेस हमेशा से भारत विरोधी रही है और इसलिए वे हमेशा इस तरह के दावे करती हैं। उनके वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान जाकर सरकार बनाने के लिए उनसे मदद मांगते हैं, पाकिस्तान धारा 370 को बहाल करना चाहता है। दिग्विजय सिंह उनकी भाषा बोल रहे हैं। यह उनके टूलकिट अभियान का भी हिस्सा है।”
कांग्रेस प्रवक्ता अब्बास हफ़ीज़ ने इस पर अपना बयान जारी करते हुए कहा है कि भाजपा दिग्विजय सिंह के बयान का ग़लत मतलब के साथ प्रचार कर रही है। दिग्विजय सिंह ने धारा 370 लागू करने की बात बिल्कुल नहीं कही है। दिग्विजय सिंह ने वहीं कहा है जो कांग्रेस पार्टी ने सदन में कहा था कि जिन परिस्थितियों में हटाया गया उसके बजाए पूरी विधानसभा और नेताओं को साथ में कर के हटाना था।
सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कश्मीर भारत का मुकुटमणि है, अभिन्न अंग है। ये कांग्रेस ही थी जिसने कश्मीर में धारा 370 लगाने का पाप किया था। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी, भाजपा सरकार ने धारा 370 हटा दी, अब देश में दो विधान, दो निशान नहीं हैं। सीएम शिवराज ने कहा कि कांग्रेस अब फिर पाकिस्तान की भाषा बोल रही है। उनके नेता दिग्विजय सिंह कहते हैं धारा 370 हटाने पर पुर्विचार किया जाएगा? क्या पुनर्विचार करेगी कांग्रेस? क्या फिर धारा-370 थोप के अलगाववाद को हवा देगी? आतंकवाद को प्रश्रय देगी? कांग्रेस का हाथ पाकिस्तान के साथ। यह कांग्रेस की पाकिस्तानी मानसिकता है। सीएम ने कहा कि जो पाकिस्तान कहता है वही कांग्रेस कहती है। सोनिया जी जवाब दो, देश आपसे जवाब चाहता है।
दिग्विजय के इस सरल बयान को गरल की तरह जनमानस के गले में उतारने भाजपा सक्रिय हो गई है बयान में कही गई संवैधानिक खामी और जुल्मों सितम से पिस रही कश्मीर के अवाम की आवाज उठाना पाकिस्तानी मानसिकता बताया जा रहा है।वे लोकतंत्र और इंसानियत बचाने की बात कर रहे हैं ।यदि यही बात नागालैंड की धारा 371को हटाने से सम्बंधित होती तो कोई शोर शराबा नहीं होता क्योंकि ये वहीं फौरन सक्रिय होते हैं जहां मुस्लिमों के पक्ष की बात होती है।उल्टा चोर कोतवाल को डांट रहा है।सबको मालूम है जम्मू-कश्मीर विधानसभा सभा भंग कर , वहां राष्ट्रपति शासन के साए में बिना कश्मीरी अवाम यानि विधानसभा की अनुमति लिए ये तानाशाही रवैया अपनाया गया और ऊपर से ये मुंहजोरी।यह महाराजा हरिसिंह से हुए समझौते में भी लिखा हुआ है।यह सरासर कश्मीरी अवाम के साथ छल है। दिग्विजय का इशारा इसी ओर है ,वे इसीलिए री लुक की बात करते हैं।
भाजपा की बढ़ती तानाशाही प्रवृति इसीलिए इसे ग़लत मानती है ।हर हिंदुस्तानी वह किसी भी दल का क्यों ना हो वह धारा 370 के खिलाफ है वह कश्मीर से प्रेम करता है पर प्रेम और संविधान से इतर इंसानियत का तकाज़ा ये भी है कि छल से समस्या के हल का परिणाम गलत हो सकता है।आज नहीं कश्मीर कल स्वतंत्र राष्ट्र की मांग भी कर सकता है। पूर्व पाकिस्तान का हाल हमारे सामने है जो बांग्लादेश के तौर पर एक देश बन गया ।फिर कश्मीर चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान देशों से घिरा हुआ है जो ख़तरनाक है। इसलिए जनमत की उपेक्षा ठीक नहीं है। चुनाव वहां कराए जाएं और चुनी सरकार से इस कानून को समाप्त किया जाए तो तमाम शंकाएं, कुशंकाएं ख़त्म होंगी कश्मीर हमारा है और रहेगा। पाकिस्तानी बयान कहकर इस समस्या को बल मिलता है इस बात का बतंगड़ ना बनाएं। बात सहमति से, संवैधानिक और मानवीय भावनाओं को मद्देनजर रख सुलह और सद्भाव से समाप्त होनी चाहिए।
