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*तलाक*

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डॉ. प्रिया 

संबंधियों की कान भरते रहने की वृति सफल हुई. तलाक होने के बाद पति कोर्ट से निकल कर ऑटो मे बैठा तो तलाकसुदा पत्नी रौनक भी उसी ऑटो मे बैठ गई। उदास पति ने एक कातर दृष्टि से दस साल साथ रही पत्नी रौनक की तरफ देखा. वह बुझी मुस्कान के साथ बोली, “बस अड्डे तक आखरी सफर आपके साथ करना चाहती हूँ।”
पति बोला ” एलिमनी की रकम दो से तीन महीने मे दे दूंगा। घर बेच दूंगा। तेरे लिए बनाया था। तू ही जिंदगी मे नही रही तो घर का क्या करूँगा।”
रौनक जल्दबाजी मे बोली “घर मत बेचना। मुझे पैसे नही चाहिए। प्राइवेट जॉब करने लगी हूँ मेरा और मुन्ने का गुजारा हो जाता है।”
अचानक ऑटो वाले ने ब्रेक मारे तो पत्नी रौनक का मुँह सामने की रेलिंग से टकराने वाला था कि पति ने झटके से उसकी बांह पकड़ कर रोक लिया।
वह पति की आँखों मे देखते हुए भरी आँखों से बोली, “अलग हो गए मगर परवाह करने की आदत नही गई आपकी।”
वह कुछ नही बोला। वह रोने लगी। रोते रोते बोली, “एक बात पूछूँ?”
वह नजर उठा कर बोला, “क्या?”
वह धीरे से बोली, “दो साल हो गए अलग रहते हुए मेरी याद आती थी क्या?”
वह बोला, “अब बताने से भी क्या फायदा? अब तो सब कुछ खत्म हो गया न? तलाक हो चुका है।”
रौनक बोली, “दो सालों मुझे वो एक बार भी वो नींद नही आई जो आपके हाथ का तकिया बना कर सोने से आती थी।”
वह फफक पड़ी। बस अड्डा आ गया था। दोनों ऑटो से उतरे तो पति ने उसका हाथ पकड़ लिया। काफी दिनों बाद पति का स्पर्स कलाई पर महसूस हुआ तो वह भावुक हो गई।
पति बोला, “चलो अपने घर चलते हैं।”
इतना सुनते ही रौनक बोली “तलाक के कागजों का क्या होगा?”
पति बोला, “फाड़ देंगे।”
इतना सुनते ही वह दहाड़ मार कर पति के गले से चिपट गई। पीछे- पीछे दूसरे ऑटो मे आ रहे पति- पत्नी के रिश्तेदार उनको इस हालत मे देखकर चुपचाप बस मे बैठकर चले गए।
रिश्ता रिश्तेदारों पर मत छोड़ो. अंतस की आवाज सुनकर खुद निर्णय लो. आपस मे बात करो. अपनी गलती हो तो स्वीकार करो।

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