-मंजुल भारद्वाज
गांधी गांधी मत जपो
सेमिनारो,शोधपत्रों में !
गांधी को मत निपटाओ
अरे गांधी के उपासको
साहस है तो जनता के बीच
जनता से गांधी पर विमर्श करो !
पर तुम वो नहीं कर सकते
गांधी के उपासको मूलतः
तुम कायर हो
ना तुम खुद को
सरेआम ताल ठोक
सनातनी हिन्दू कह सकते हो
ना मुसलमान
तुम ना राम के हो
ना अल्लाह के !
तुमने गांधी पढ़ा है
जिया नहीं !
तुम विकास युग के पढ़े लिखे
अनपढ़ अंधभक्त हो !
नैतिकता और संविधान को बेच
समाज में प्रतिष्ठा कमाने वाले
भूमंडलीकरण के पुजारी हो !
मैं आगाह कर दूँ
संविधान को बचाने वालों को
संविधान गांधी की राजनैतिक
ज़मीन पर खड़ा
नेहरु पोषित
आंबेडकर के भारत का ख़्वाब है !
आज जनता में विकारी संघ ने
गाँधी हत्या के बाद
पैदा पीढ़ी में विष भरा है
मोशा को बहुमत उसी का परिणाम है !
आओ गांधी की राजनैतिक ज़मीन को
पुन: हासिल करें !
विषयुक्त जनमानस को
आत्मबल,विचार,प्रेम
भाईचारे,सौहार्द और विवेक से
विष मुक्त करें !
विष नहीं विश्वास ही
सत्य का परचम लहराता है !
हिंसा नहीं अहिंसा ही
भारतीय विविधता की
विधाता है!

