एस पी मित्तल,अजमेर
सरकारी अस्पतालों में मरीजों के प्रति अनेक डॉक्टरों का कैसा गैर जिम्मेदाराना व्यवहार होता है, इसका उदाहरण अजमेर जिले के केकड़ी उपखंड के सरकारी अस्पताल में देखने को मिला है। 2 अगस्त की शाम को जो मरीज अस्पताल की आपातकालीन इकाई में इलाज कराने पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि डॉ. विवेक शर्मा अपने दोनों पैर टेबल पर रखकर मरीजों को देख रहे हैं। यानी डॉ. साहब का धड़ तो कुर्सी में घुसा हुआ था और पैर टेबल पर रखे थे। इसी अंदाज में डॉक्टर साहब मरीजों से उनके रोग के बारे में पूछ रहे थे। केकड़ी के अस्पताल में नियुक्त डॉक्टरों का इतना रुतबा है कि कोई भी मरीज विरोध करने की स्थिति में नहीं होता। असल में केकड़ी के सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों की नियुक्ति क्षेत्रीय विधायक और पूर्व चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा की सिफारिश पर होती है। ऐसे में प्रदेश के मौजूदा चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा भी केकड़ी में नियुक्त किसी भी डॉक्टर पर कोई कार्यवाही नहीं कर सकते हैं। भले ही कुछ डॉक्टर टेबल पर पैर रख कर मरीजों का इलाज करें। 2 अगस्त की शाम को निकटवर्ती फतेहगढ़ का युवक केशव दर्शन गौड़ भी अपने हार्ट में दर्द का इलाज करवाने के लिए अस्पताल आया था। लेकिन अस्पताल की मशीन खराब होने के कारण गौड़ की ईसीजी भी नहीं हो सकी।
कमर में दर्द:
टेबल पर पैर रखने के मामले में जब डॉक्टर विवेक शर्मा से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि उनकी कमर में दर्द है, इसलिए टेबल पर पैर रखे हुए थे। लेकिन डॉक्टर शर्मा ने यह नहीं बताया कि वह कमर के दर्द का इलाज किस डॉक्टर से करवा रहे हैं। सवाल यह भी है कि जब स्वयं डॉक्टर के कमर में दर्द है तो फिर वो मरीजों का इलाज कैसे कर रहे हैं? क्या टेबल पर पैर रखकर मरीजों का इलाज करना अभद्रता नहीं है।

