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यूं ना फैलाओ नफ़रत !

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मंदिर मस्जिद मेरा जाना
सबके घर में मेरा आना !
हिंदू मुस्लिम मैं क्या जानूं !
रक्त लाल है सबका माना !
ईद दीवाली या हो होली
सबको मानू मैं हूं भोली !
क्या अल्लाह क्या पैगंबर
क्या राम क्या शाम जपूं !
क्या कुरान क्या बाइबल
क्या दिन रात गीता पढूं !
कन्हैयालाल की हत्या को
क्या मैं आतंकवाद लिखूं
अल्लाह हो या पैगंबर
या हो मेरा राम रहीम !
हम सबका एक रखवाला है !
मंदिर मस्जिद मेरा जाना
सबके घर में मेरा आना !
फिर तूने क्यों छीन लिया
जो लाता था घर का दाना
सियासत खेलती है खून की
होली, हे बंदे तूने ना जाना
कैसे अब कहूं तुझे भाईजान !
कैसे मानू तुझे सच्चा मुसलमान !
क्यों ले ली तूने कन्हैया की जान
अल्लाह के बंदे तू भूल गया है
अपनी पहचान !
सियासत के हाथों तूने बेच दिया
है अपना ईमान !
नफरत भरे बयानबाज आज भी
घूम रहे खुले मैदान !
पैगंबर को जिसने कोसा वो थी एक शैतान !
और अल्लाह के बंदे तूने ले ली
एक मासूम की जान !
हिंदू मुस्लिम कि एकता का प्रतीक है
मेरा राजस्थान !
यूं ना फैलाओ नफरतें
ना बनाओ देश को कब्रिस्तान !
मुझको मेरी जान से ज्यादा
प्यारा है हिंदुस्तान !
मंदिर मस्जिद,हिंदू मुस्लिम की
मिलती है यहां अलग पहचान !
आओ मिलजुल कर करे
एक दूजे का सम्मान !
क्या तेरा ,क्या मेरा हम
सबका है हिन्दुस्तान !

       -कवियित्री, सपना मीना,कोटा,राजस्थान, संपर्क - अनुपलब्ध_*

        _संकलन - निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उप्र,संपर्क -9910629632_
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