मुनेश त्यागी

क्रांतिकारी अंतर्राष्ट्रीय क्रांतिकारी समाजवादी चे ग्वेरा ने कहा था कि पूरी दुनिया ही क्रांतिकारियों की कार्यशाला है। वे किसी देश, शहर या राज्य तक सीमित नहीं रह सकते। दुनिया में जहां कहीं भी शोषण, अन्याय, जुल्म और युद्ध हो रहे हैं वे वहां जाकर उनके खात्में का संघर्ष छेड़ें। आज 9 अक्टूबर 1967 दुनिया के महान अंतर्राष्ट्रीयतावादी क्रांतिकारी कॉमरेड चे ग्वेरा का बलिदान दिवस है जो बोलीविया में क्रांति करते हुए वहां के जंगलों में सीआईए और बोलीविया की सेना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।
चे ग्वैरा एक अर्जेंटाइनी क्रांतिकारी डॉक्टर थे जिन्होंने पूरी दक्षिणी अमरीका का मोटरसाइकिल से दौरा किया था और क्रांति की तलाश करते करते मेक्सिको पहुंच गए थे और वहां उन्होंने गरीब बस्ती में जाकर कोढ़ी मरीजों का इलाज करना शुरू किया। वहीं पर उनकी मुलाकात क्यूबा के क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो से हुई और यहीं से चे ग्वैरा कास्त्रो के दल के साथ क्युबा में सशस्त्र क्रांति करने के लिए उनके साथ आ गए और क्यूबा में तानाशाह बतिस्ता के शासन का अंत करके क्यूबा में सशस्त्र क्रांति की और किसानों मजदूरों का राज कायम किया। चे गुएवारा क्यूबा मिशन में एक डॉक्टर के रूप में भर्ती किए गए थे, मगर जब वहां लड़ाकू क्रांतिकारियों की कमी हुई तो उन्होंने दवाई का झोला छोड़कर, बंदूक हाथ में थाम ली और क्यूबा के फिदेल कास्त्रो और उनके साथियों के साथ मिलकर सशस्त्र क्रांति की और किसान और मजदूरों का राज कायम किया और समाजवादी समाज की स्थापना की।
चे गुवेरा एक डॉक्टर थे। क्यूबा के लोगो ने उन्हें प्यार और सम्मान से “चे” की उपाधि से नवाजा। चे का अर्थ है,,, सम्मानीय, सर, महाशय। उसके बाद वे सारी दुनिया में “चे” के नाम से प्रसिद्ध हो गए और आज भी लोग उन्हें चे के नाम से ही जानते हैं। उनकी महानता इस बात हुई थी कि वह दुनिया के सारे लड़ाकू क्रांतिकारियों को अपना भाई समझते थे और कहां करते थे कि दुनिया में जहां कहीं भी अन्याय और शोषण हो, वहां उसका मुकाबला और उसका खात्मा किया जाए।
क्यूबा में चे ग्वैरा ने क्युबन क्रांतिकारियों के साथ मिलकर सफल क्रांति की, किसान मजदूरों का राज कायम किया, किसान मजदूरों की सत्ता कायम की और वहां की जनता को सबको शिक्षा, काम, इलाज, मकान, रोजगार, सुरक्षा मोहिया करायी और तमाम तरह के शोषण, अन्याय, गैर बराबरी, भेदभाव का खात्मा किया और एक समाजवादी समाज का निर्माण किया ।
अमर क्रांतिवीर चे ग्वैरा का मानना था कि जिस आदमी के दिलो-दिमाग में अन्याय, शोषण, गुलामी, असमानता, भेदभाव और जुल्मों सितम के खिलाफ गुस्सा नहीं आता, उनको देखकर वह परेशान नहीं होता, वह एक सच्चा क्रांतिकारी, एक सच्चा मार्क्सवादी लेनिनवादी नहीं हो सकता और जिसे इन्हें देख कर गुस्सा आता है, वह मेरा असली कॉमरेड है, असली क्रांतिकारी है।
उनका कहना था कि क्रांति एक संगठित प्रयास है। यह मजदूर और किसानों की एकता और एकजुट संघर्ष के बिना नहीं हो सकती। उनका कहना था कि “क्रांति एक ऐसा फल नहीं है जो खुद ब खुद जमीन पर आ गिरता हो, इस फल को जमीन पर गिराने के लिए मेहनत करनी पड़ती है।” उन्होंने आगे कहा कि “मैं कोई मुक्तिदाता नहीं हूं, मुक्तिदाता नहीं होते हैं, जनता स्वयं ही अपने को मुक्त करती है और जनता ही सबसे बड़ी मुक्तिदाता होती है।”
जब बोलीविया के जंगलों में क्रांति के लिए लड़ते हुए चे गुएवारा को गिरफ्तार कर लिया गया तो साम्राज्यवादी एजेंटों द्वारा गोली मारे जाने से पहले कामरेड चे ग्वेरा ने कहा था कि “तुम मेरे शरीर को तो मार सकते हो लेकिन तुम मेरे विचारों को नहीं मार सकते।” आज यह बात शत प्रतिशत सही है कि कामरेड चे ग्वेरा हमारे बीच में नहीं है, उनके शरीर का अंत कर दिया गया है, मगर उनके विचार पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। पूरी दुनिया के लोग मजदूर, किसान, क्रांतिकारी नौजवान और छात्र उनको याद करते हैं और उनके बताए रास्ते पर चलते हैं और क्रांति के अभियान में शामिल हैं और क्रांति की प्रक्रिया को, उसके मार्ग को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं और क्रांति की लौ को प्रज्वलित किए हुए हैं।
क्यूबा की सरकार में, वे कई पदों पर मंत्री रहे। इसके बाद उन्होंने सारी दुनिया का दौरा किया, हिंदुस्तान का भी दौरा किया और उसके बाद कांगो में चले गए जहां उन्होंने क्रांतिकारी लड़ाई में भाग लिया और वहां के लड़ाकूओं को गुरिल्ला वारफेयर की जानकारी दी। इसके बाद एक सोची-समझी रणनीति के तहत चे ग्वैरा क्रांति करने के लिए बोलिविया में चले गए, जहां उन्होंने एक गुरिल्ला सेना का निर्माण किया और इतिहासकार कहते हैं अगर कुछ किसान गद्दारी ना करते और उनके कुछ अपने ही साथी उनका विरोध ना करते तो उन्होंने वहां पर भी क्रांति सफल कर दी थी।
मगर अफसोस चे ग्वैरा बोलीविया में क्रांति के लिए लड़ते लड़ते शहीद हो गए और और कुछ अपने ही साथियों की मुखबिरी के करण वहां पर क्रांति सफल होते-होते रह गई। आज उन्हीं अमर शहीद महान क्रांतिकारी कामरेड अर्नेस्टो चे ग्वेरा का बलिदान दिवस है।
दोस्तों, आइए हम उनकी याद में क्रांति के कारवां को, समाजवादी समाज व्यवस्था के अभियान को, विचारों को, आगे बढ़ाएं और उनके चाहे समाज की स्थापना करें और भारत समेत दुनिया में एक ऐसा समाज काम करें जिसमें सबको आधुनिक, मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा मिले, सबको आधुनिक और मुफ्त इलाज मिले, सबको काम मिले, सबको घर मिले, सबको रोटी, कपड़ा और सुरक्षा मिले। जहां पर किसी का शोषण ना हो, किसी पर अन्याय ना हो, किसी के साथ जुल्म ना हो, किसी के साथ भी ज्यादती ना हो और पूरे समाज में समता, समानता और भाईचारे का साम्राज्य कायम हो।
वे एक ऐसे समाज की कल्पना करते थे कि जहां धर्म, जाति, भाषा, वर्ण, क्षेत्र और लिंग के आधार पर कोई भेदभाव ना हो, आदमी और औरत के साथ बराबरी का बर्ताव किया जाए, जहां औरतों को भोग्या और मनोरंजन की वस्तु न समझा जाए, सेक्स की वस्तु ना समझी जाए और उसके साथ बराबरी का व्यवहार किया जाए और उन सबको पढ़ने, लिखने, रोजगार और अपना संपूर्ण विकास करने का मौका दिया जाए।
महान क्रांतिकारी कामरेड चे ग्वैरा एक अंतर्राष्ट्रीयतावादी क्रांतिकारी थे। उनका मानना था कि दुनिया में जहां कहीं भी जुल्म ज्यादती, अत्याचार, शोषण और अन्याय हो रहा हो, उसका वहां विरोध किया जाए और वहां के लोगों के साथ मिलकर उस जनविरोधी व्यवस्था का खात्मा करके उसके स्थान पर एक समाजवादी व्यवस्था वाली समाज की स्थापना करनी चाहिए। उनके विचारों की मुहिम को आगे बढ़ाया जाए। उनके लिए यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कॉमरेड चे ग्वेरा आज भी दुनिया के हीरो बने हुए हैं। सबसे ज्यादा नौजवान उन्हीं की छपी हुई कैंप और टी शर्ट पहनते हैं। वे समाजवाद के अमर सेनानी है, क्रांति के अमिट वाहक हैं। जब तक यह दुनिया रहेगी, जब तक यह प्रकृति रहेगी, तब तक दुनिया के महान क्रांतिकारी डॉ चे ग्वैरा का नाम अमर रहेगा।
इंकलाब जिंदाबाद,
समाजवाद जिंदाबाद,
चे ग्वैरा जिंदाबाद,
क्रांतिकारी अंतर्राष्ट्रीयतावाद जिंदाबाद।
दक्षिणी अमेरिका में अपनी मोटरसाइकिल पर घूमते हुए उन्होंने वहां की जनता के साथ, वहां के पूंजीवादी शासकों द्वारा किए जा रहे शोषण, अन्याय, जुल्म और गैर बराबरी के दर्शन किए थे और उनको अपनी आंखों से देखा था और उन्होंने कई देशों में वहां की सरकारों के साथ मिलकर इस लुटेरे और अमानवीय पूंजीवादी निजाम का खात्मा करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था कि “दुनिया में सबसे बड़ी बीमारी “पूंजीवाद” है। जब तक यह पूंजीवादी व्यवस्था खत्म करके, इसके स्थान पर समाजवादी व्यवस्था कायम नहीं कर दी जाती, तब तक जनता को उसके बुनियादी अधिकार नहीं मिलेंगे।”
आज के परिवेश में हम देख रहे हैं कि आज भी दुनिया के लुटेरे पूंजीवादी देश, पूरी दुनिया में तबाही मचाये हुए हैं, पूरी दुनिया को लूटकर, पूरी दुनिया का शोषण करके, जुल्म करके, युद्ध करके, उसके साथ अन्याय करके, अपनी तिजोरियां भर रहे हैं और पूरी दुनिया पर अपना कब्जा और प्रभुत्व कायम करना चाहते हैं और पूरी दुनिया से समाजवादी व्यवस्था और सोच को खत्म करने पर तुले हुए हैं। सच में चे ग्वेरा ने कितने मार्के की बात कही थी कि “पूंजीवाद ही सारी दुनिया की बीमारियों की जड़ है और समाजवादी समाज और संस्कृति ही सारी दुनिया की बीमारियों की असली और सबसे कारगर दवा है।” महान क्रांतिकारी चे ग्वेरा की वह बात आज भी सही साबित हो रही है।