Site icon अग्नि आलोक

इंदौर के नए कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा ने पदभार संभाला : किसान परिवार में जन्मे, ऐसे सीखी फर्राटेदार हिंदी…

Share

इंदौर

इंदौर के नए कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने बुधवार शाम को पदभार संभाला। उन्होंने कहा वाटर प्लस और एयर क्वालिटी पर जोर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश है कि माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए तो वह अभियान जारी रहेगा। मतदाता पुनरीक्षण का काम तेजी से होगा। ऐसे मतदाता जो पिछली बार छूट गए थे उनका नाम सूची में होगा। वोटिंग के लिए पात्र युवा अपने मतों का उपयोग कर सके इसके लिए मौत हो तो कोई निर्देश दिए गए हैं।

इंदौर देश में नंबर वन है स्वच्छता में उसे बरकरार रखा जाएगा। यहां मेट्रो वे प्रोजेक्ट सहित जितने भी बड़े बड़े प्रोजेक्ट है उन्हें संबंधित एजेंसी से समन्वय कर गति दी जाएगी। इनोवेशन वही है जो कम समय में अच्छी क्वालिटी के साथ पूरा किया जा सके। प्रवासी भारतीय सम्मेलन और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को बेहतर तरीके से किया जाएगा। प्रवासी भारतीय सम्मेलन और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को बेहतर तरीके से किया जाएगा। स्मार्ट सिटी में ट्रैफिक की जरूरत है क्या-क्या है उस पर फोकस किया जाएगा।

वे जबलपुर से यहां तबादला कर भेजे गए हैं। 2009 बैच के IAS अफसर डॉ. इलैयाराजा टी जहां भी रहे, उनका पब्लिक कनेक्ट गजब का रहा है। भिंड हो या रीवा, उन्हें हटाए जाने की पब्लिक में भी काफी चर्चा हुई। जानिए उनके परिवार, पढ़ाई, UPSC के प्रयास और पब्लिक लाइफ के किस्से…

बुधवार को इंदौर के नए कलेक्टर के रूप में इलैया राजा टी ने पदभार संभाला।

किसान मां-बाप के बेटे हैं नए कलेक्टर
डॉ. इलैयाराजा टी तमिलनाडु के रहने वाले हैं। 5 अप्रैल 1984 को उनका जन्म ईरोड जिले में हुआ। चेन्नई से 400 किलोमीटर दूर स्थित ईरोड जिला हल्दी के लिए प्रसिद्ध है। पिता किसान हैं। वे पुश्तैनी जमीन पर खेती करते आ रहे हैं। मां होम मेकर हैं और पति के साथ खेती-किसानी में हाथ भी बंटाती हैं।

पहली ही बार में पास कर ली UPSC
2009 बैच के IAS ने पहली ही कोशिश में UPSC क्लीयर कर लिया था। जब कैडर की पॉजिशनिंग हुई तो MP राज्य दे दिया गया। उन्होंने पहले कभी हिंदी बोली ही नहीं थी। उन्होंने मसूरी के ट्रेनिंग सेंटर में ही हिंदी सीखी। आज वे इतनी फर्राटेदार हिंदी बोलते हैं कि शायद ही कोई भांप सके कि वे तमिल बैकग्राउंड के हैं। विंध्य, महाकौशल के बाद मालवा में उनकी यह पहली पोस्टिंग है।

इंदौर के नए कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी का जबलपुर से इंदौर तबादला हो गया है।

पहली कलेक्टरी…85% बच्चे फेल हुए तो भिंड से भागा नकल माफिया
पहली बार कलेक्टर के तौर पर वे भिंड भेजे गए। चंबल का यह जिला पूरे देश में बिहार के बाद नकल के लिए सबसे बदनाम रहा है। यहां गिरोह बनाकर नकल कराई जाती है। जो देश के किसी भी परीक्षा बोर्ड में दसवीं, बारहवीं, बीएड, डीएड, नर्सिंग नहीं कर पाता था, उसे यहां पास करा दिया जाता था। डॉ. इलैयाराजा ने परीक्षा केंद्रों में पहली बार CCTV कैमरे लगवा दिए। नतीजा दसवीं में 2015-16 में 15.5% और बारहवीं में सिर्फ 13.0% बच्चे पास हुए। यह हश्र देख नकल माफिया को भिंड छोड़ना पड़ा। इतनी सख्ती कर दी कि अगले साल भिंड में परीक्षा फॉर्म भरने वाले छात्र आधे ही रह गए। वे सब मुरैना शिफ्ट हो गए थे।

भिंड से तबादला होने पर पब्लिक रोई, रीवा में हो गई शिकायत
कलेक्टर इलैयाराजा जब भिंड से ट्रांसफर किए गए तो पब्लिक सरकार के फैसले के विरोध में उतर आई। प्रदर्शन भी किया गया। इसी तरह रीवा में दिलचस्प वाकया हुआ था। जब वहां से उन्हें ट्रांसफऱ किया गया तो एक व्यक्ति ने तबादले के खिलाफ CM हेल्पलाइन पर शिकायत कर दी।

अगले साल विधानसभा चुनाव होने है। मुख्यमंत्री का पूरा फोकस इंदौर पर है।

नए कलेक्टर के सामने ये होंगे बड़े चैलेंज

इसलिए भी अहम है इंदौर की कलेक्टरी

इंदौर के पूर्व कलेक्टर मनीष सिंह। सिंह को एमपीआईडीसी का एमडी बनाया गया है।

इंदौर में काम करना गौरव की बात: मनीष सिंह
कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा कि इंदौर में काम करना गौरव की बात है। यहां लोगों, जनप्रतिनिधियों का असीम स्नेह मिला। इंदौर को सफाई में नंबर-1 बनाने में जो सहयोग मिला उसे कभी भुला नहीं जा सकता। मप्र में इंडस्ट्री आज सबसे बड़ी जरूरत है। जो भी आदेश मिलेगा, उसका पालन करने की पूरी कोशिश करूंगा।

मनीष सिंह ने कहा… प्रवासी सम्मेलन में बढ़ेगी भूमिका

कानून और व्यवस्था में ऐसे उदाहरण पेश किए थे इंदौर ने

Exit mobile version