–चंचल भू
समाजवादियों के एक आंतरिक अंतर्द्वंद और विरोधाभास को उठाना चाहता हूं कि समाजवादी कांग्रेस के उस धड़े के प्रति इतना निर्मम और निष्ठुर क्यों रहा जो खेमा इन समाजवादियों को हद तक जा कर प्यार करता था और करीब था ? मसलन डॉ लोहिया और पंडित नेहरू के आपसी रिश्ते ।
तीनमूर्ति लाइब्रेरी में रखे दस्तावेजों को खंगाला जाय तो पंडित नेहरू अपने खतों के जरिये कांग्रेस के अंदर की सारी कमियों को डॉ लोहिया से साझा करते हैं और बार बार, कांग्रेस में लौटने की इच्छा व्यक्त करते हैं ।
कई पत्र तो युवा माशूका के बीच पनपे प्यार की जद तक चले गए लगते हैं, जब पंडित नेहरू लिखते हैं –
“प्रिय राममनोहर तुम्हे देखे हुए बहुत दिन हो गए हैं , आज कल कैसे लगते होंगे ? वगैरह वगैरह ।
रात दो दो बजे तक दोनो तीनमूर्ति लान में बैठे बात कर रहे हैं , मुल्क कैसे बनेगा इसमे हमारी मदद करो राममनोहर । श्रीमती गांधी बार बार काफी बना कर लाती हैं ।
बहरहाल, इन खतों को देखा जाना चाहिए ।कम से कम नई पीढ़ी तो पढ़े ही ।
डॉ सुनीलम और प्रो विनोद के संपादन में और मरहूम मधु लिमये जी की देखरेख में एक किताब दो खंडों में प्रकाशित है – ‘समाजवादी आंदोलन के दस्तावेज ‘ उसमें से इन खतों को लिया गया है ।
अनुमान है और शोध का विषय भी ,कि जे पी और डॉ लोहिया जब भी कांग्रेस के अंदर के समाजवादी लाबी से टकराते हैं तो उनका गुस्सा इस समाजवादी लाबी के पतित होते आचरण और कमीनगी की हद तक गिरने की दशा के प्रति उजागर होता है , जिसे लोग डॉ लोहिया बनाम पंडित नेहरू बोलते हैं या जे पी बनाम श्रीमती गांधी बना दिया जाता है ।
कांग्रेस के अंदर का समाजवाद और बाहर हो चुके समाजवाद की टकराहट बहुत दिलचस्प मंजर दिखाता है जिसे आप ग्रीक ट्रेजडी कह सकते हैं ।
गैर कांग्रेस वाद का प्रयोग करके कांग्रेस को जमीन से उखाड़ने वाले डॉ लोहिया भविष्य वाणी करते हैं – ‘अगर हम कभी बीमार हुए तो हमारी देखभाल तीमारदारी सबसे अच्छी तरह नेहरू के घर पर ही होगी ‘ ।
आगे वह सच निकला । डॉ लोहिया हॉस्पिटल में हैं , श्रीमती गांधी प्रधानमंत्री हैं। प्रतिदिन आती हैं देखने । डॉ लोहिया की अर्थी उठी है तो अर्थी को कंधा देनेवाला श्रीमती गांधी का कैबिनेट है ।
श्रीमती गांधी और डॉ लोहिया का यह रिश्ता सियासी नही पारिवारिक था । श्रीमती गांधी को डॉ लोहिया, पंडित नेहरू ने विरासत में दिया था । ‘
रामनोहर आलोचक हैं , इस आलोचना में कटुता नही है ‘ । कांग्रेस आज भी अपनी आलोचना पर रिश्ता नही तोड़ती ।
जे पी जेल काट कर लौट आये हैं। श्रीमती गांधी को चुनौती देते हैं।सत्ता से हटा देते हैं । उधर जनता पार्टी शपथ ले रही है।इधर जे पी श्रीमती गांधी के घर पर हैं – श्रीमती गांधी का सिर जे पी के कंधे पर है , दोनो रो रहे हैं। जे पी सांत्वना देते हैं – धैर्य रखो इंदू ! सब ठीक हो जाएगा।
मंजर पीछे भाग जाता है । आनंद भवन के लान में नेहरू , लोहिया , जेपी , अच्युत पटवर्धन बैठे है , श्रीमती गांधी काफी की ट्रे लिए खड़ी हैं ।
समाजवादी ‘ आंदोलन ‘ कांग्रेस का परिमार्जन करने का कारक तत्व है । कल कांग्रेस लौटेगी तय है । किसी दिन यह फिर एकाधिकारवाद की तरफ़ गई तो इस कांग्रेस के खिलाफ हम और केवल हम लड़ेंगे ।
बाद बाक़ी माफीनामा लिए ड्योढ़ी पर निहुरे मिलेंगे ।
–चंचल भू

