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 काले कानून के खिलाफ ड्राइवर और ट्रांसपोर्टर सड़कों पर

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,मुनेश त्यागी

     मोटर व्हीकल एक्ट में हिट एंड रन से जुड़े कानून में बदलाव के विरोध में उत्तर प्रदेश समेत भारत के कई राज्यों में बस और ट्रक चालक हड़ताल पर चले गए हैं। इस कानून के खिलाफ ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने हड़ताल का आह्वान किया है। उसने सरकार से हिट एंड रन केस में 10 साल की सजा के प्रावधान और सात लाख जुर्माना देने पर पुनर्विचार करने को कहा है। ट्रांसपोर्टरों और ड्राइवरों ने इस कानून को काले कानून की संज्ञा दी है।

      इस कानून का विरोध करने के लिए उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, हिमाचल, जम्मू कश्मीर, पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान में चक्का जाम के आह्वान का व्यापक असर देखा गया। इस हड़ताल से गैस, डीजल पेट्रोल, फल सब्जियां समेत जरूरी सामान की आपूर्ति भी प्रभावित हो गई है। चीनी मिलों में तोल केंद्रो में गाना ढुलाई नहीं हुई। इसे लेकर  जगह धरना प्रदर्शन हुए हैं।

     मेरठ और वेस्ट यूपी के जिलों में रसोई गैस, डीजल पेट्रोल, खाद्य सामग्री की आपूर्ति प्रभावित हो गई। सरकारी और प्राइवेट बस अड्डे पर बसें खड़ी रही। मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, शामली आदि में हजारों बसें, बस अड्डों पर खड़ी रहीं। ड्राइवरों ने बस चलाने से मना कर दिया। उत्तर प्रदेश में दस हजार से ज्यादा बसें नहीं चलीं। यहां पर अधिकांश बसें बस डिपो में ही खड़ी रही। अनेक स्थानों पर राष्ट्रीय राजमार्गों पर 5 घंटे से ज्यादा जाम रखा गया।

     ओल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने सरकार से हिट एंड रन केस में 10 साल की सजा और जुर्माने के प्रावधान पर पुनर्विचार करने की मांग की है। हड़ताल के कारण ट्रैकों बसों का चक्का जाम हो गया। सीतापुर में पथराव किया गया। बस्ती में पुलिस ने हड़ताली ड्राइवरों पर लाठी लाठियां भांजी। लाखों यात्री इस हड़ताल के कारण और चक्का जाम की वजह से परेशान रहे। कानपुर इटावा मथुरा दिल्ली आगरा दिल्ली राजमार्ग पर चक्का जाम के चलते कई कई किलोमीटर लंबे जाम लग गये।

    लखनऊ में 62 हजार से भी ज्यादा यात्री परेशान हुए। हड़ताल में शामिल रोडवेज के सैकड़ों चालकों को नोटिस जारी कर चेतावनी भी दी गई है। इसके बावजूद भी अलीगढ़ में हड़ताल का अनिश्चितकालीन ऐलान किया गया और 600 से ज्यादा बसें डिपो से बाहर नहीं निकलीं।

     इस हड़ताल के कारण इन प्रदेशों में करोड़ों रुपए का नुकसान हो चुका है। ड्राइवरों की हड़ताल के कारण मामले की गंभीरता को देखते हुए, ट्रांसपोर्टर्स भी हड़ताल में शामिल हो गए हैं। उन्होंने माल की बुकिंग बंद कर दी है। इस वजह से स्पोर्ट का सामान, कैंची, कपड़ा, दवाइयां, लकड़ी, ट्रांसफार्मर, केमिकल, खाद्य सामान, लोहा आदि सामान की सप्लाई ठप हो गई है। इसी वजह से स्कूलों से बच्चों को लाने ले जाने वाली बसें भी प्रभावित हुई हैं।

     चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति, गैस एजेंसी को गैस सिलेंडर, पेट्रोल पंपों को पेट्रोल व डीजल, मंडियों को गुड तेल दाल अनाज चीनी,फल सब्जियों की  आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इस हड़ताल का और इस काले कानून का इतना व्यापक असर है कि मेरठ के ट्रांसपोर्टर्स ऐसोसिएशन ने जिला अधिकारी को वाहनों की चाबी सौंपने की चेतावनी दी है।

     भारतीय दंड संगीता की धारा 279 यानी लापरवाही से वाहन चलाने 304 ए यानी लापरवाही से मौत और 338 यानी ध्यान जोखिम में डालने के तहत केस दर्द किये जाते रहे हैं, पर इस नए कानून में एक्सीडेंट होने के बाद मौके से फरार होने वाले ड्राइवर पर धारा 104, (2) के तहत केस दर्ज होगा। पुलिस या मजिस्ट्रेट को सूचित न करने पर उसे 10 साल की सजा के साथ-साथ 5 लाख जुर्माना भी देना पड़ेगा। तमाम ट्रांसपोर्टर्स और ड्राइवर कानून में किए गए इन बदलावों को काले कानूनों की संज्ञा दे रहे हैं।

     यह स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि इन कानून में बदलाव करने से पहले सरकार ने संबंधित लोगों और विशेषज्ञों से इस बारे में कोई चर्चा नहीं की और उसने बिना दिमाग लगाये और मनमाने तरीके से कानून में ये बदलाव कर दिए जो देखने पर ही गलत लगते हैं। अब इन बदलाव के दायरे में तमाम चालक आ जाएंगे, यानी जो लोग अपनी  गाड़ी निजी तौर पर चला रहे हैं, वे भी इनसे प्रभावित होंगे। बस चालक, ट्रक चालक तमाम तरह के ड्राइवर निधि गाड़ी चलाने वाले मालिक, स्कूटर मोटरसाइकिल या कोई भी वाहन चलाने वाला आदमी इन कानूनों के  दुष्परिणामों और प्रभावों से नहीं बचेगा। अब तो जैसे गाड़ी चलाना एक अपराध हो गया है।

     यहां पर सवाल उठता है कि अगर किसी चालक की मोटर दुर्घटना में कोई गलती नहीं है और यह एक्सीडेंट दूसरे पक्ष की वजह से हुआ है तो इसमें सही रूप से गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर का या मालिक का क्या दोष है? अगर कोई दुर्घटना हो जाती है तो ऐसी अवस्था में गाड़ी रोकने वाले गाड़ी के चालक और गाड़ी को खतरा पैदा हो जाएगा।

     जैसा कि देखा गया है कि एक्सीडेंट होने के बाद अगर ड्राइवर पकड़ा गया तो उसे भीड़ द्वारा जान से मार दिया जाता है और गाड़ी में आग लगा दी जाती है, तो यह कैसे संभव हो पाएगा कि किसी चालक के लिए ऐसे में पुलिस या मजिस्ट्रेट को सूचना देना खतरे से खाली होगा? इसके लिए संबंधित पक्षों से पूरा विचार विमर्श करके ही अगले कदम उठाए जाने चाहिए और तब तक इस मनमाने कानून बदलाव पर रोक लगा देनी चाहिए।

    अगर इन बदलावों को वापस नहीं लिया गया या इनमें समुचित बदलाव नहीं किए गए तो ये दूसरी समस्याएं खड़े कर देंगे, क्योंकि उनके रहते कई व्हीकल चालकों में लापरवाही की भावना जन्म लेगी और वे गलत साइड से व्हीकल चलाने में सावधानी नहीं बरतेंगे, जिससे दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ेगी और इसके फल स्वरुप दूसरी कई समस्याएं विवाद को जन्म देंगी। अतः यह सबसे जरूरी है कि इस हड़ताल को जल्दी से जल्दी खत्म करने के लिए सरकार इस काले कानून में वांछित और जरूरी बदलाव करने की पहल करें और अन्यथा देश और जनता को इस हड़ताल के कारण विभिन्न तरह की अव्यवस्थाओं सहित भयावह परिणाम भगतने पड़ेंगे।

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