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दवाओं की दासता यानी रोगों से वास्ता 

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   पुष्पा गुप्ता 

कहाँ जा रहे हैं?

डॉक्टर के पास.

क्यों ?

अपनी बीमारी का इलाज खोजने.

क्या करेगा आपका बड़ा महंगा डॉक्टर?

अनेक जांच करवाएगा. आपकी बीमारी को एक अच्छा, और बड़ा नाम देगा.

   आप खुश हो जायेगे की दवा अब चमत्कार करेगी, घरवाले भी आपको टाइम पर दवाएं देकर अपना सारा दायित्व निभाएंगे.

क्या आप बीमारी को समझते हैं?

• बुखार आपका मित्र है.

जैसे ही कोई वायरस शरीर में आता है, शरीर अपना तापमान बढा देता है, वह तापमान को बढ़ाकर उस वायरस को मारना जाता है, लेकिन आप गोली देकर तापमान कम कर देते है, जिससे वायरस शरीर मे घर बना लेता है और 4-6 महीने में बड़े रोग के रूप में आता है.

• सूजन आपकी मित्र है.

जैसे ही आपको कोई चोट लगी, दर्द होंगा, कुछ घण्टे के बाद सूजन आ जायेगी, दरअसल चोट लगने के बाद उस स्थान पर रक्त रूकने लगता है, तो दिमाग शरीर को सिग्नल भेजता है, जिससे चोट वाले स्थान पर सूजन आ जाती है, सूजन आती ही इसीलिये है, की शरीर वहां पर पानी की मात्रा को बढा देता है, जिससे रक्त ना जमे, और तरल होकर रक्त निकल जाए, शरीर तो अपना काम कर रहा था, लेकिन आप जैसे ही गोली खांते है, दिमाग का अपना सिंगल टूट जाता है, वो भी सोचता है : अच्छा ये इंसान ज्यादा होशियार है, तो तुम्ही कर लो अब जो करना है.

डॉक्टर के पास जाकर न आपने रोग का कारण जाना और न ही स्वास्थ के नियम जाने. यदि आप दवाओं का डिब्बा साथ लेकर ही रखे तो आस पास वाले भी सोचेंगे किंतना जागरूक आदमी है दवाएं लेना नही भूलता.

 क्यों अपने आप को धोखा देते है?

क्या हैं दवाएं?

एक प्रोसेस्ड केमिकल, और अगर हर्बल भी है तो एक अंनप्रोसेसड केमिकल.

    जो शरीर के लिए भोजन नही वो जहर ही तो हुआ। क्योंकि शरीर हर विजातीय तत्व का बहिष्कार करेगा ही।

इस संसार में कोई भी जीव, एलोवेरा गिलोय, आदि नहीं खाता. अन्य प्राणी वो अपना भोजन ही खाते हैं.

     दवाएं खाकर आपकी अपनी ही जीवनी शक्ति का नाश हो रहा है. आप सोचते है मैं स्वास्थ कमा रहा हूँ. भ्रम में है आप. आप हर रोज अपनी जीवनी शक्ति कम कर रहे हैं.

   कोई भी बीमारी दवाई या काढ़े वेगैरह से बाहर नही निकालती. जीवनी शक्ति ही ये काम करती है. आप जब बीमार होने के लिए मेहनत नहीं करते, तो ठीक होने के लिए मेहनत क्यों?

आप वर्षों तक गंदा खांते आते है, और एक दिन बीमार हो जाते है. गंदा छोड़कर प्राकृतिक खांना शुरू करिये. है शरीर स्वयम को स्वस्थ कर लेगा. क्योंकि ये शरीर बीमार होने के लिए डिजाइन ही नही हुआ है.

    दुनिया की कोई भी चिकित्सा हमारी खुद की क्षमता पर नाच रही है. शरीर मे यदि जीवनी शक्ति नही, कोई भी चिकित्सा बेकार है.

 रोग का कारण निकाले बगैर और प्राकृतिक भोजन के बिना कोई भी दवा आपको ठीक कर देगी, ये सोचना आपकी सबसे बड़े गलती है. जो डॉक्टर, वैध, हकीम, खुद सुबह दोपहर शाम गोलियां खा रहा वह तुम्हे क्या ठीक करेगा.

   लोग बड़े, गर्व से कहेंगे मेरे फेमिली डॉक्टर है, फलाने शहर के सबसे बड़े डॉक्टर है. अबे यार, वो उल्लू बनाता आपको और आप हो भी.

    कोई भी रोग आपको जगाने के लिए आता है. आपकी आंख खोलने के लिए आता है. वो दुश्मन नही है. बल्कि आपको ये बताता है कि आप कुछ गलत कर रहे, सुधर जाओ.

 आप जानते हैं कि ताजी हवा, सूर्य स्नान, जल स्नान, योग, प्राणायाम, ऊपवास, मेडिटेशन, मुस्कराना आदि सब अच्छी चीज है. लेकिन आप बस पढ़ते है, और सोचते है कल से करेगे. यह आपका कल कभी नहीं आता, काल आ जाता है.

    खुद से पूछिए,  क्या मैं वास्तविक भूख से खाता हूं या आदत वश या समयवश की सुबह शाम खांना ही है.

   कितने योगी लोग तो सिर्फ हवा, धूप, आदि खाकर ही सालों से जीवित हैं. कितने तो पानी तक त्याग चुके।

     एक बात समझ लो : संसार का भगवान और शरीर का भगवान दोनो अलग हैं. शरीर को उसके भगवान के अनुसार चलाना ही होगा।

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