शशिकांत गुप्ते
इनदिनों मादक पदार्थो का सेवन बढ़ता जा रहा है।मादक पदार्थो का सेवन युवापीढ़ी में अधिक बढ़ रहा है,यह चिंता का विषय है।अहम सवाल है कि, वर्तमान में गैर कानूनी भी,शक्तिशाली भी,अत्यधिक नशीले पदार्थ ने कहर मचा रखा है।
इस पदार्थ का नाम है हेरोइन, अंग्रेजी में इसकी स्पेलिंग होती है।Heroin.बोलचाल में प्रायः आमजन इसका उच्चारण हीरोइन ही करता है। वैसे हीरोइन का मतलब होता है नायिका। नायिका वाली हीरोइन की स्पेलिंग में अंग्रेजी का e व्यंजन भी लगता है। मादक पदार्थ का स्पेलिंग होता है, Heroin और नायिका का स्पेलिंग होता है Heroine.
नायक के लिए अंग्रेजी में Hero शब्द है।
Heroine नायिका मतलब प्रशंसित स्त्री,वीरांगना।उदाहरनार्थात झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई असल में Heroine थी।
फिल्मी अभनेता और अभिनेत्री को भी हीरो और हीरोइन कहा जाता है।वास्तव में ये लोग सिर्फ अभिनय करतें हैं। जो सच में हीरो होतें हैं, वे असली बम का विस्फोट करतें हैं।अभिनेता नकली शस्त्रों को प्रयोग में लातें हैं।
इनदिनों देशी फिल्मी उद्योग में कार्यरत हीरों और हीरोइनों पर हेरोइन के सेवन का आरोप लग रहा है।सिनेमा उद्योग में मादक पदार्थ का सेवन बढ़ने से देश की युवापीढ़ी अंधानुकरण कर रही है।
सन दो हजार चौदह के बाद देश में जो भी हो रहा है,सब पहली बार हो रहा है।ऐसा प्रपोगांडा बहुत जोर शोर से चल रहा है।
सन दो हजार चौदह के बाद सबसे महत्वपूर्ण और अहम है,अभियान चल रहा है नाम बदलों अभियान?
वैसे तो हमारे धार्मिक गर्न्थो में कहा गया है कि, जिस किसीका भी नाम और रूप है वह नाशवान है।श्रुति में भी कहा है कि, यम दृष्टं तम नष्टं
जो भी दिखाई देता है वह नाशवान है।
नाम बदलों अभियान के में
सम्भव हो तो हेरोइन जिसे गलती से हीरोइन कहा जा रहा है।इसका नाम बदला जाना चाहिए।
नाम बदलने का विचार आतें ही जेहन में पुनः एक अहम प्रश्न उपस्थित होता है? क्या नाम बदल देने से वास्तविकता बदल जाती है?
वैसे फिल्मी हीरोइन भी मादक ही होती है।यह बात इस फिल्मी गाने से सिद्ध होती है।
गुलाबी आँखें जो तेरी देखीं
शराबी ये दिल हो गया
सम्भालो मुझको ओ मेरे यारों
सम्भलना मुश्किल हो गया।
हाल ही में तो सशक्त द्वय के गृह राज्य में तीन हजार किलो हेरोइन पकड़ी गई।कार्यवाही चल रही है।ऐसे संवेदनशील विषय पर भी मौन धारण करने का अभिनय करना कोई मामूली बात नहीं है।
मौनं सर्वार्थ साधनं इसका अर्थ चुप रहने सब काम हो जातें हैं।या चुपचाप सारे काम निपटा दिए जातें हैं।यह खोज का विषय है?
शशिकांत गुप्ते इंदौर

