पुलिस ने धरना दे रहे कर्मचारियों को किया गिरफ्तार ,समर्थन देने महाराष्ट्र के दूसरे मजदूर नेता पहुंचे तो उन्हें अवैधानिक रूप से लिया हिरासत में
सेंचुरी के पदाधिकारियों ने चर्चा में म . प्र.की मिल्स को बंद करने के लिए घाटे को ही बताया आधार
आपको हमने 2 मिल्स 1 रु में देने का वादा किया था आपने अन्य यूनियन्स को क्यों लिया साथ ? *सेंचुरी पूर्णकालीन संचालक श्री डालमिया का सवाल
जिन कंपनियों को मिल्स बेचने का सेंचुरी का निर्णय है , वे मिल्स चलाएंगे या नहीं , हमें पता नहीं
इंदौर। 9 जुलाई 2021 के रोज मध्य प्रदेश के सेंचुरी मिल्स के 50 श्रमिक प्रतिनिधि जब सेंचुरी भवन , मुंबई के सामने पहुंच कर चेतावनी उपवास पर बैठे ; तब कुछ बहस के बाद तय हुआ कि 10 प्रतिनिधियों के समूह की सेंचुरी कंपनी के पदाधिकारियों के साथ बातचीत होगी । हम चर्चा के लिए भवन में जाने की तैयारी करते ही पुलिस प्रशासन की ओर से अचानक वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक मृत्युंजय हीरेमठ जी ने प्रतिनिधियों को छोड़कर बाकी सभी सत्याग्रहियों को तत्काल धरना स्थल छोड़ने का आदेश दिया । बताने का कारण था कोविड के इस काल में आपदा व्यवस्थापन अधिनियम का उल्लंघन । हमारी कोई बात ना मानते ना सुनते हुए , पुलिसो को उकसा कर वरिष्ठ ने आदेश दिया , बलपूर्वक हटाने का । इसमें हुई जबरदस्ती खींचातानी और स्वयं कोरोना के नियमों को पूर्ण रूप से ताक में रखकर गिरफ्तारी ली , जिसमें कुछ वस्तुओं का नुकसान , महिलाओं के साथ जानवर जैसा पुलिस वेन में उन्हें भरना , बैग्स का अस्त व्यस्त होना आदि घटित हुआ जो कि महाराष्ट्र शासन प्रशासन से अपेक्षा नहीं थी । लेकिन कंपनी के मामले में यह सब एनरॉन विरोधी संघर्ष में भी हो चुका था , यह हम भूल नहीं सकते । श्रमिक जनता संघ के पदाधिकारी जगदीश खैरालिया , संजय चौहान , सैचुरी कामगार एकता संघ के नेता नंदू पारकर और हेमंत गोसावी तथा सेंचुरी श्रमिक और उनके परिवारों की महिलाए , समर्थन में आए घर बचाओ घर बनाओ आंदोलन के .. प्रतिनिधि सभी को मेधा पाटकर सहित गिरफ्तार किया गया । 144 की धारा जाहिर भी नहीं करते हुए 188 की धारा भी लगा कर गिरफ्तारी के पूर्व कि प्रक्रिया के बिना कार्यवाही की गई । कार्यवाही किसके आदेश पर हुई और क्यों -जवाब मांगते धिक्कारते श्रमिक अपना संघर्ष नारों के साथ पुलिस स्टेशन के अंदर भी जाहिर करते रहे । पुलिस स्टेशन के प्रांगण में भी पत्रकारों को प्रवेश करने से अधिकारी रोकते रहे । वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक ने पुणे से आए कष्टकरी समाज के साथ संघर्षरत , बाबा आढाव, साथी चंदन कुमार के साथी को भी धक्का मारकर धकेलते हुए एक रूम में ले जाकर घंटो तक बिठाने का शर्मनाक काम किया ।
प्रशासन ने ही अगुवाई की और 10 प्रतिनिधियों को सेंचुरी भवन जाने का प्रस्ताव रखा सोच विचार के बाद हमने मंजूर किया । चर्चा में डालमिया , प्रमुख संचालक और योगेश परांजपे , कानूनी सलाहगार हाजिर थे । उन्हें याद दिलाते ही – उन्होंने मंजूर किया कि पहली मीटिंग में , महेश्वर में आकर उन्होंने मेधा ताई के साथ बातचीत में ( जिसमें दो श्रमिक गवाह थे ) प्रस्तुत किया कि अगर VRS नहीं मंजूर तो दूसरे विकल्प रूप में 1 रुपए में दोनों मिल्स आपको ही दे सकते है यही बात कंपनी ने ट्रिब्युनल के सामने भी हलफनामे में रखी थी | अब उन्होंने कहा कि 100 % श्रमिक और कर्मचारीयो की सहमति पर ही वह प्रस्ताव था , जब कि सेंचुरी ने ट्रिब्युनल के सामने प्रस्तुत किए अगस्त 2018 के हलफनामें में 100 % की शर्त नहीं थी । श्रमिको ने पूछा कि जिन 4 यूनियन्स के कुल सदस्य 10 % भी नहीं है उनकी आपत्ति पर आधारित इस प्रस्ताव की वापसी आपने क्यों की ? डालमियाजी का जवाब था … ” हम तो यूनियन्स की सदस्यता के बारे में न कुछ जानते है , न जांचते हैं ।
… आपको हमने मिल्स देने का प्रस्ताव दिया था तो आपने उन यूनियन्स को साथ ही क्यों लिया ? बात महत्व की है । जिन यूनियन्स का मात्र नाम लगा था , उनकी सदस्यता प्रत्यकी की 10 % श्रमिको की भी न होते हुए उन्हें प्रातिनिधिक रूप से इंदौर हुई चर्चाओं में हम शामिल करते रहे । उस समय हम सत्याग्रह आंदोलन में थे लेकिन यूनियन्स उसमे सहभागी नहीं थी । हमने AITUC , INTUC , कामगार एकता के प्रतिनिधि पदाधिकारियों को शामिल किया था ताकि श्रमिक एकता बढ़ा कर ही जनतांत्रिक रूप से आगे बढ़े । 90 % श्रमिको के रोजगार का पक्ष लेने का चंद श्रमिको की ओर से विरोध करने वाले चारो संगठन का एक होना न हीं कानूनी प्रतिनिधि माना जा सकता है नो ही उसके आधार पर सेंचुरी कोई निर्णय ले सकती है शामिल करने पर उसके बाद श्रमिकों की साथ धोखाधड़ी हुई है।
श्रमिको के प्रतिनिधि – राजेश खेते , दुर्गेश खवसे , संजय चौहान , नवीन मिश्रा , और नंदू पारकर ने भी कहा कि जिन्होंने सालो तक पसीना बहाया है , आपकी तिजोरी भरी है , उन्हें कुछ लाख रुपए देकर आपने बेरोजगार करना अन्याय है ज्योति बढ़ाने महिलोकी ओर से कहा की चंद लाख रुपए के VRS मे हमारी बड़े बचोंकी की शिक्षा भी नहीं हो सकती है मेधा पाटकर ने कहा , सेंचुरी के पदाधिकारी उनकी लाखो रुपए की मासिक आय हो कर मात्र कुछ हजार रुपए में कार्यरत श्रमिको का योगदान नहीं मानते और उनके साथ धोखा देकर अन्याय करते है । 2019 तक 6/700 करोड़ और उसके बाद 2019 से लोक्डाउन में भी 350/400 करोड़ रुपए नगद मुनाफा कंपनी कमाने वाली क्या मिल्स नहीं चला सकती ? उनका जवाब था , नहीं | श्रमिकोंको ना मंजूर है ।
सेंचुरी मैनेजमेंट को हमने जब पूछा ” , क्या आप जिन्हें मिल्स बेचने जा रहे है वे मिल्स चलाने वाले है ? ” , उनका जवाब था , हम क्या जाने ? जब कोई घर बेचता है तो उसमे कौन रहेगा , यह क्या जानते है ? …. ‘ हैरान होकर हम समझ गए । इसलिए तो मिल्स खरीदने वाले मनजीत कंपनियों की शर्त है कि आजके किसी श्रमिक या कर्मचारी को वे काम पर नहीं लेंगे । – यह बात सेंचुरी की VRS नोटिस में कहीं है और VRS देने का कारण भी यही पेश किया है । क्या घर और फैक्टरी / मिल में फर्क नहीं समझती कंपनी ? .
सेंचुरी के भावी खरीददार मनजीत ग्लोबल कंपनी की या मनजीत कॉटन की ओर से 10 जुलाई के रोज कोई नोट । प्रेस नोट प्रसारित की गई है । उससे हैरानी होना स्वाभाविक है । इसमें कहा गया है कि खरीददार ने मशीनर और कंपनी की जांच कार्यवाही की है और इससे स्थानिक श्रमिको में खुशी है | हमारा कहना है कि जो भी चार । छे श्रमिक विक्रेता या क्रेता कंपनी से बातचीत कर रहे है वे श्रमिको के अधिकृत प्रतिनिधित्व का हक नहीं रखते है | सेंचुरी के कारखाना प्रबंधक और खरीददार मात्र श्रमिको को तथा समाज को झूठे दावे के साथ डराना चाहते है।
मुंबई से लौटे श्रमिको ने संकल्प दोहराया है – VRs नही , रोजगार चाहिए । हमारा हक – रोजगार ! जीने का अधिकार ! महिला – पुरुषों ने मिल कर सेंचुरी मैनेजमेंट को चेतावनी दी है ।श्रमिक जनता संघ की ओर से इंदौर उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल हो चुकी है जिसकी सुनवाई 12 जुलाई के रोज है । श्रमिको का आक्रोश है ‘ हमे न्याय चाहिए । अन्याय नहीं !
राजकुमार दुबे , सुखेद्र मटैया दीपक बडगुजर , श्याम भदाने चंचला सोनेर ज्योति देशमुख

