Site icon अग्नि आलोक

नीति”विहीन रहस्य भरा राज

Share

शशिकांत गुप्ते, इंदौर

राजनीति सचमुच में नीति विहीन “राज” मतलब रहस्य और रोमांचभरी हो गई है।राजनीति और धर्म का समन्वय हो रहा है।इसीलिए धार्मिक वेशभूषा धारण करने वाले साधु और साध्वियां राजनीति में पूर्णरूप से लीन हो रहें हैं।साधु का शब्दार्थ होता है सज्जन व्यक्ति।राजनीति में सज्जन लोगों का सक्रिय होना रहस्यमय,और  रोमांचित करने वाला प्रतीत होता है।
तृणमूल  का अर्थ होता है,घास के  तिनके का मूल अर्थात जड़।इस जड़ ने पश्चिम बंगाल में ना सिर्फ कीचड़ को फैलने से रोका बल्कि प्रदेश की अधिकांश जगह कमल को खिंलने ही नहीं दिया।यह बहुत ही आश्चर्यजनक घटना घटित हुई।एक ओर कमल को सर्वत्र खिलाने के लिए पूर्ण लावलश्कर के साथ युद्धस्तर पर साम,दाम,दंड और भेद का उपयोग करते हुए प्रयास किया गया।सारा प्रयास विफल हो गया।कथित चाणक्य ने अपनी कूट नीति नहीं कुटिल नीति के दांवपेंचआजमाएं लेकिन मतदातों में ममता के प्रति असीम प्रेम जागृत हो गया है।
तृणमूल नेत्री ने व्हीलचेयर पर प्रचार किया और देश की बागडौर  संभालने के लिए राजनीति की दूसरी लहर में सयोंग से उच्च चेयर पर विराजमान व्यक्तियों को जमीनी हक़ीकत दिखा दी।
इसी तरह वर्तमान राजनीति में रहस्यपूर्ण घटनाएं हो रही है।देश के मध्य में स्थित प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अपनी स्वयं की शारीरिक ऊर्जा खोकर मंच से नीचें गिर पड़े।सामाचारों से ज्ञात हुआ कि वे मंच पर नींद के खुमारी में थे।सम्भवतः मंत्री महोदय को प्रदेश को ऊर्जावान बनाने के प्रयास में अत्यधिक व्यस्तता के कारण मंच पर ही नींद का झोंका आ गया होगा।इसी प्रदेश की राजधानी का संसद में प्रतिनिधित्व करने वाली बुद्धि की पराकाष्ठा प्रज्ञा विभिन्न प्रकार की शारीरिक बीमारियां होने बावजूद बास्केट में Ball डालने के खेल में उछलकूद करते नजर आई।स्वप्न सुंदरी के खिताब से विभूषित विवाहित पुरुष से विवाह करने का साहस करने वाली अभिनेत्री अपनी बेटियों को शुद्ध पानी पीने के सलाह प्रचार माध्यम से दे रही है।सम्भवतः यह अभिनेत्री निर्वाचित प्रतिनिधि होकर नीतिविहीन राज से अनिभिज्ञ है।इसलिए इसे यह ज्ञात नहीं है कि अभी भी देश के बहुत से गांवों में पानी मुहैया नहीं हुआ है।सासंद बनने के बाद भी अभिनेत्री अभिनय करने से बाज नहीं आती है,खेत में फसल को काटते कर उसे उठाकर दिखाने की शूटिंग करती रहती है।देश के अर्थ की बागडौर संभालने ने वाले राज्यमंत्री के पद पर पदस्थ व्यक्ति अपने अनुराग, मतलब प्रेम को त्याग कर खुलेआम गोली मारने की घोषणा करने से कोई संकोच नहीं करता है।
सामान्य व्यक्ति धर्म को आचरण की सभ्यता सीखाने वालें मोर्चा समझता है।राजनीति में सलंग्न लोग धर्म को स्वार्थपूर्ति का माध्यम समझतें हैं।लेखक को धर्म को लेकर हमेशा एक प्रश्न मानसिक रूप से परेशान करता है।लेखक जिस धर्म को समझता है, पढ़ता है, वह तो सनातन सत्य है।ऐसे सनातन में दूसरें धर्म की आलोचना करना, हिंसा को जायजा ठहराना, किसी को शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर जबरन प्रभु का नाम का उच्चारण करवाना तो लेखक को कहीँ पढ़ने में नहीं आया।
उपर्युक्त सारे मुद्दे नीतिविहीन राजनीति में समाहित हैं।इसतरह की राजनीति में ऐसे लोगों को प्रवक्ता बनाकर सार्वजनिक बहस में भेजा जाता है जो पूर्व की सरकारों की आलोचना करने में दक्ष हो।
यह भी एक रहस्यमय मुद्दा है।उदाहरण के तौर पर यदि किसी सत्तापक्ष के प्रवक्ता से पूछा जाए कि आपकी सरकार के दौरान पांच लोगो की जेब कटी है?प्रवक्ता तुरंत जवाब देगा पूर्व की सरकार के समय दस लोगों की जेब कटी थी।जेब काटना गलत है यह कोई  नहीं कहता है।उक्त सारी चर्चा में नीतिविहीन रहस्यमय राजनीति ही नजर आती है।
अब की बार के प्रलोभन में समझदार देशवासी तीसरी बार नहीं आएंगे ऐसा माहौल बनता दिख रहा है।महामारी की भी तीसरी लहर को रोकने के लिए जनता जागरूक हो रही है।तीसरी लहर को किसी  भी रोकना जरूरी है।इसका पूर्वाभ्यास अगले   छः माह में होने वाले चुनावों में दिखाई देगा।इसी उम्मीद के साथ यही पर पूर्ण विराम।

Exit mobile version