अग्नि आलोक

हिंदूत्व की प्रयोगशाला के हिंसा के प्रयोग :गुजरात, दिल्ली, मणिपूर एवं नूह

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डॉ.अभिजित वैद्य

हिंदूत्ववादियों के इतिहास में पूरा सफर असत्य एवं हिंसा का है l गांधीजी के शस्त्र ‘सत्याग्रह’ एवं अहिंसा
थी l हिंदूत्ववादियों के शस्त्र ‘असत्याग्रह’ एवं ‘हिंसा’ हैं l फरेबी, झूट, षडयंत्र एवं विश्वासघात उनके मार्ग हैं
l इन सभी को उन्होंने धर्म एवं संस्कृति के सकोटर में हुबहू बिठाया हैं l ‘सत्यमेव जयते’ को धर्म मानना और
दूसरी ओर धर्म की ओर किया हुआ असत्य वर्तन धर्ममान्य के रूप में कहना l ‘अहिंसा परोमधर्म:’ कहना
दूसरी ओर धर्म के लिए हिंसा ही धर्म है ऐसा प्रस्तुत करने का l अतः धर्म पर श्रध्दा रखनेवाला आम समाज
असत्य एवं हिंसा को सहजता से स्वीकृत करता है l हिंसा का दावाग्नि सुलगने पर इसमें सभी जल सकते हैं
इस सत्य को हम नहीं भूल सकते l एक बीज बोने पर एक पेड़ उगता है l हिंसा बोयी गई तो हजारो पौंधे
उग सकते है l ऐसा होने पर भी हिंदूत्ववादी हिंसा के घातक प्रयोग लापरवाही से करके आगे बढ़ रहे हैं l यह
केवल आजही नहीं हो रहा l हजारों वर्ष सवर्णोंने अछूतों पर की हुई हिंसा हिंदूत्व के व्यापक हिंसक प्रवृत्ति
का हिस्सा है lवैदिकों ने वेदों को चुनौती देनेवाले, कर्मकांड, अंधश्रध्दा को न माननेवाले, सजातीय लोगों पर
की हुई हिंसा यही है l बुद्ध एवं जैन धर्म को इस भूमि से हटाने के लिए की हुई हिंसा इसका ही हिस्सा है l
लेकिन इस्लामी एवं ख्रिश्चन शासकों के विरुध्द हिंदूत्ववादीयों के ये शस्त्र पूरी तरह से एक हजार वर्षों तक
म्यान हुई थी l क्योंकि उन्होंने इन सशक्त शासनकर्ताओं के साथ – ‘हमारी धार्मिक एवं सामाजिक सत्ता
अबाधित रखो, और हम तुम्हारी राजकीय सत्ता अबाधित रखेंगे’ ऐसा शायद अलिखित अनुबंध किया था
ऐसा महसूस हो इस तरह का उनका इतिहास में वर्तन है l उन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को इस हेतु
विरोध किया l इस स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी के नेतृत्व में देश के सभी धर्म, जाती, पंथ इन सभी
की एकता होने पर उन्हें यह नजर आया की यह देश स्वतंत्र होगा लेकिन ब्राम्हणवादियों के अमल में नहीं
रहेगा l मनुस्मृति पर चलेगा नहीं l उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन का विरोध करने पर भी अंत में देश स्वतंत्र
हुआ ही और एक धर्मनिरपेक्ष प्रजासत्ताक बन गया l


स्वतंत्रता मिलने से पूर्व ही हिंदूत्ववादियों ने अत्यंत सुचारुढंग से द्विराष्ट्रवाद का सिध्दांत सम्मुख रखकर
देश के विभाजन की नींव मजबूत की थी l फरेबी ब्रिटिश तथा महत्त्वकांक्षी जिनाने इसका समर्थन किया l
देश स्वतंत्र हुआ लेकिन विभाजन होकर और हिंदू-मुस्लिमों के मन में भेद निर्माण होकर l भारतीय समाज
के टुकडे करनेवाली हजारों वर्षों की वर्णव्यवस्था तथा विभाजन के कारण हुए जख्मों को लेकर भारतीय
समाज स्वतंत्रता के बाद आत्मविश्वास के साथ प्रगति एवं समता की दिशा की ओर चलता रहा l

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हिंदूत्ववादियों की तीन बीमारियाँ थी l पहली बीमारी थी ‘भारतीय संविधान’, जिसे एक ‘अछूत’ ने दिया
था l दूसरी बीमारी थी संविधान ने नष्ट की हुई जातिव्यवस्था और दलितों के लिए दिया हुआ आरक्षण l
तीसरी बीमारी थी धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद की भाषा l जिस धर्म का उगम इस भूमि में हुआ नहीं उस
धर्म के लोग हमारे नहीं ऐसी उनकी धारणा थी l अर्थात मुस्लिम, ख्रिश्चन, पारसी, यहूदी आदि…l इसमें से
पारसी एवं यहूदी अल्पमात्रा में होने के कारण मूल समस्या मुस्लिम एवं ख्रिश्चनों की थी l लेकिन उनमें से
अनेक लोगों की विचारधारा नुसार जो धर्म अवैदिक है वे ही हमारे नहीं, अर्थात बुद्ध, जैन और सिक्ख भी l
संक्षिप्त में अगर कहाँ जाए तो यह देश सिर्फ और सिर्फ हिंदूओं का है ऐसा उनका मानना है l अर्थात हिंदूराष्ट्र
निर्माण करने का और हिंदू समाज को फिर एक बार वर्णव्यवस्था की बुनियाद पर और ब्राम्हणत्व के पैरोतले
खड़े कर देना l प्रजासत्ताक भारत में ऐसा करना है तो मत की पिटारी कब्जे में लेनी पड़ेगी और उसपर
अमल करना हो तो ‘हिंदू मत पिटारी’ अधिक मजबूत होनी चाहिए l इसके लिए जातिअंत की भाषा का
उपयोग न करके भी हिंदू समाज में एकता निर्माण होनी चाहिए l इसके लिए एक ही रास्ता है – अन्य धर्मों
के प्रति द्वेष और हिंसा का हथियार l इसमें मुस्लिम धर्मियों का स्थान ऊँचा होना स्वाभाविक हैं l मुस्लिमों
के धर्मांध एवं कर्मठ प्रवृत्ति ने इस काम को अपने ही कर्मों से पुष्टि दी यह भी सच है l मुस्लिमों के बाद
अगली संख्या भी निश्चित थी l इस क्रम में हिंदू दलितों का भी क्रम था और इस की याद हिंदूत्ववादियों के
बहाव में आए हुए दलितों को भी देना आवश्यक था l


इसके लिए देश के मुस्लिम रियासत के सभी चिह्न गुलामी के चिह्न हैं ऐसा कहकर उसे मिटाने के लिए
जनसमर्थन प्राप्त करना इसी मार्ग को अपनाया गया l दूसरी ओर देश का हर मुस्लिम धर्मांध, आतंकवादी,
पाकिस्तान का समर्थक, गुनाहगार विचारों का तथा राष्ट्रद्रोही है ऐसा फरेब आम जनता की मन में बो देने
की नीति अपनाई गई l मुस्लिमधर्मीय का अर्थ दानव ऐसा उनके नेताओं ने लिखकर रखा था l कांग्रेस के
दीर्घ शासनकाल में हिंदूत्ववादी पूरे देश में धार्मिक अनबन निर्माण कर रहे थे l ठंडे दिमाग से दंगा-फसाद
जारी रखते थे l धर्मांध मुस्लिम इसके शिकार हो जाते थे या इसकी सहायता करते थे l इसका सबसे बड़ा
यशस्वी प्रयोग गोध्रा हत्याकांड के बाद ‘क्रिया-प्रतिक्रिया’ इस शीर्षक के अंतर्गत गुजरात में किया गया l
गोध्रा हत्याकांड ‘क्रिया-कृति’ और उसके बाद हुआ दंगा ‘प्रतिक्रिया’ यह दंगा हिंदू-मुस्लिम था l गुजरात में
हिंदू है ८८% और मुस्लिम है १०% l इस दंगे में इन्सानियत को कलंकित करनेवाले अनंत अत्याचार हुए l
महिलाओं पर सामूहिक बलात्कार हुए l अनेक महिलाओं की बलात्कार के बाद हत्याएँ की गई l बच्चों को
कुचलकर मार दिया गया l सैंकडों लोगों को जला दिया l शासकीय गिनतीनुसार इस दंगे में कुल १०४४
लोगों की मृत्यु हो गई जिसमें ७९० मुस्लिम तथा २५४ हिंदू थे l ५९ कारसेवकों की मृत्यु हो गई उनका
प्रतिशोध लेने हेतु हुए दंगे में २५४ हिंदूओं की मौत हो गई l ज्यादातर दंगों में गरीब ही मरते हैं इसबात को
ध्यान में रखना चाहिए l फिरभी गोध्रा घटना के बाद गुजरात में हुआ दंगा और नरसंहार देश के हिंदूओं को
न्यायिक महसूस हुआ l गोध्रा हत्याकांड के आरोपियों को देश की जाँच व्यवस्था ढूँढकर निकालेगी और
न्यायव्यवस्था उन्हें कठोर शासन करेगी ऐसा जनता को महसूस नहीं हुआ l मुख्यमंत्री के नाते नरेंद्र मोदी का
इसी दरमियान का वर्तन ‘राजधर्म’ को खाक में मिलाने वाला था l लेकिन उनका राजकीय समीकरण गलत
साबित नहीं हुआ l सच में ‘गुजरात मॉडेल’ यही है और वह प्रभावी साबित हुआ l मुख्यमंत्री पद की कुर्सी
जाने का डर छोड़ो अपितु उन्हें प्रधानमंत्री पद का सिंहासन नसीब हुआ l
अगले लोकसभा चुनाव के दरमियान उनकी मदद हेतु पुलवामा आ गए l इस घटना के समय उनकी सरकार
का वर्तन अत्यंत आक्षेपार्ह एवं आशंका निर्माण करनेवाला था ऐसा घर का ही तोहफा उन्हें सत्यपाल मलिक

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ने दिया l इन सभी यात्राओं में हिंदू एवं मुस्लिमों के बीच जो विश्वास था उसे ख़त्म करने का काम
हिंदूत्ववादी संघटना बड़ी जोर से कर रही थी l गो-रक्षण के नाम पर करीबन डेढ़-दो सौ झुंड बली हो गए l
इसमें ज्यादातर मुस्लिम और शेष दलित थे l देश की सामाजिक एकता के वस्त्रों की धज्जियाँ उड़ाने के काम
किया जाता था l इसी स्थिति में एन.आर.सी. पर देश भड़क उठा l दिल्ली के शाहिनबाग में मुस्लिम एवं
अल्पसंख्यांकों ने १५ दिसंबर २०१९ से पूरी जिद तथा शांतिपूर्ण स्थिति में प्रदीर्घ आंदोलन शुरू किया l
फरवरी २०२० को दिल्ली में दंगा शुरू हुआ l इस दंगे में ३६ मुस्लिम तथा १५ हिंदू मारे गए l इसकी
वजह विवादास्पद रही l अनेकों ने इस दंगे के लिए ‘शहरी नक्षलवादी’ और ‘जिहादी’ घटकों को इसका
जिम्मेदार ठहरया l हिंदूत्ववादी एवं भाजपा नेताओं के अत्यंत भड़किले भाषण नजर अंदाज किए गए l यह
दंगा रुक ही रहा था तब कोविड की महामारी शुरू हो गई और मार्च महीने के अंत में शाहिनबाग का
आंदोलन समेटने में सरकार को यश मिल गया l कोविड महामारी का सामना करने में शासन पूरी तरह से
नाकामयाब रहा l इसी कालावधि में मोदी ने कृषि कानूनों का षडयंत्र रचाया जिसमें उन्हें अंत में किसानों
के सम्मुख झुकना पड़ा l दूसरी ओर देश की अर्थव्यवस्था रसातल में पहुँच रही थी l बेरोजगारी एवं महंगाई
आसमान को छू रही थी l अपने नौ साल की राजनीति में मोदी ने सत्तर वर्षों में जो हुआ नहीं वह कर्ज का
पहाड़ देश के माथे पर खड़ा कर दिया l कर्नाटक में भाजपा का जबर्दस्त पराभव हुआ l राहुल गांधी ‘भारत
जोड़ो यात्रा’ के कारण जननायक के रूप में मशहूर हुए l मोदी एवं अदानी के संबंधों के बारे में अत्यंत
निडरता से सवाल पूछनेवाले वे केवल एक ही नेता थे l इन सभी घटनाओं के कारण मोदी की लोकप्रियता
कम होने लगी l अब सवाल यह खड़ा होता था की फिरसे पुलवामा की घटना घटित होगी या हिंदू और
मुसलमानों में दंगा-फसाद सुलग उठेगा?
इतने में ही अनपेक्षित तौर पर देश के ईशान्य कोने में एक निसर्गसंपन्न, रत्नभूमि कहलानेवाला पूरा राज्य
मणिपूर अचानक तौर पर धधकने लगा l यह दावानल हिंदू एवं ख्रिश्चन या मैतेई एवं कुकी इन दो जातियों
में सुलग उठा l मणिपूर राज्य के उच्च न्यायालय ने राज्य के मैतई जमाती के लोगों को अनुसूचित जमाती का
दर्जा देने की प्रक्रिया शुरू की जाए ऐसा आदेश राज्य सकार को देने निमित्त हुआ l इस संघर्ष ने हैवानी
यादवी का रूप धारण किया l मैतेई यह मणिपूर राज्य के बहुसंख्य मुख्यतः वैष्णव हिंदू एवं इंफाल की घाटी
में रहनेवाले लोग l कुछ मैतेई ख्रिश्चन एवं मुस्लिम भी है l कुकी अल्पसंख्य मुख्यतः ख्रिश्चन एवं पहाडवासी l
कुछ कुकी भी ख्रिश्चन हैं l मैतई तुलना में सधन एवं सत्ता के मुख्य हिस्सेदार l कुकी गरीब और सत्ता के
हिस्सेदार l लेकिन सच में विषय ऐसा था की पहाड़ी मणिपूर इलाके में जमीन के नीचे मिले भारी खनिज,
उसपर अदानी जैसे उद्योगपति की नजर और संविधान की ३७१ धारा l
केंद्र सरकार के खान एवं खनिज मंत्रालय ने मणिपूर के सर्वेक्षण में चुनखड़ी, क्रोमाईट, निकेल, ताँबा,
अझुराईट, मँग्नेटाईट और मुख्यतः प्लॅटीनम जैसे अमूल्य खनिज मणिपूर के पहाड़ी इलाको में लाखों मेट्रिक
टन के हिसाब में है ऐसा अहवाल दिया था l इंडियन ब्यूरो ऑफ़ माईन्स तथा केंद्रीय खान विभाग ने खनिज
निकालने हेतु खासगी कंपनियों के साथ अनुबंध करने का प्रावधान किया l इसमें खासगी कंपनियों को बहुत
बडी जमीन और खनिज निकालने के अधिकार देने का प्रावधान था l इंफाल में २१-२२ नवंबर २०१७ में
हुई ईशान्य भारत वाणिज्य परिषद में अन्यान्य खासगी कंपनियों के साथ ३९ करार किए गए l इन
कंपनियों के अनेक प्रकल्प पर्यावरण विभाग के अनुमति के बीमा मंजूर किए गए l ईन प्रकल्पों को मंजूर
करते समय स्थानीय लोगों की अनुमति नहीं ली गई l इतनाही नहीं तो उनके विस्थापन के बारे में सोचा ही
नहीं गया l मुख्य समस्या यह थी की जमीन उद्योगपतियों को किस तरह से सौंप दी जाए ? केंद्रीय

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पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने मणिपूर जिले के जंगलों पर केंद्रीय कानूनों का अंमल है और आरक्षित वनक्षेत्र
खुली की जाएगी ऐसा घोषित किया l अदानी जैसे उद्योगपतियों को देश का और एक राज्य निगलने हेतु
उपलब्ध कर देने की यह घोषणा थी l कश्मिर को विशेष दर्जा देनेवाली ३७० धारा जैसी संविधान की
३७१ वी धारा देश के ग्यारह राज्यों को विशेष दर्जा देता है इस बात को हिंदुत्ववादियों ने हमेशा सुचारुढंग
से छिपा दिया l इसमें गुजरात एवं महाराष्ट्र (धारा ३७१), नागालैंड (धारा ३७१ए), आसाम (३७१बी),
मणिपूर (३७१सी), (पान ६) आंध्रप्रदेश एवं तेलंगना (धारा ३७१ डी ), आंध्रप्रदेश (३७१इ), सिक्किम (धारा
३७१एफ), मिजोरम (धारा ३७१जी), अरुणाचल प्रदेश (धारा ३७१एच) इन राज्यों का समावेश है l
ईशान्य भारत के राज्यों के लिए जो कलम हैं वे वहाँ का पर्यावरण तथा आदिवासियों की रक्षा हेतु है l
मणिपूर के आदिवासी मूलतः कुकी एवं नागा हैं l मैतेई को अनुसूचित जमात का दर्जा देनेपर अपने हक़ पर
नौबत आ जाएगी ऐसी भावना कुकी में निर्माण हुई l इसमें जमीन से लेकर शिक्षण एवं नौकरीतक अनेक
क्षेत्रों का समावेश है l मणिपूर की ९०% जमीन पहाड़ी है l इस जमीन को केवल अनुसूचित जमात के लोग
ही खरीद सकते हैं l मैतेई समाज के मुख्यमंत्री बिरेनसिंग ने कुकी लोग विस्थापित है ऐसा विधान करके
राज्य की आबादी में तीसरे समाज के इन लोगों को सीधा पराया ठहराया और बाद में उन्हें अमली पदार्थों
के माफिया भी ठहराया l मणिपूर की आबादी है केवल ३२ लाख और कुल वंश है ३९ l इसमें मैतेई ५३%,
कुकी १६% और नागा २४% ऐसे मुख्य वंश है l २०११ की जनगणना नुसार मणिपूर में हिंदू ४१-३९%,
ख्रिश्चन ४१-२९%, मुस्लिम ८.४%, सुर्यपूजक सनमाही पंथ ७-८% और शेष १% है l गत कई दशक मैतेई
समाज का हिंदुत्वीकरण करने का काम राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ के ओर से किया जा रहा था l गुजरात में
हिंदूओं की संख्या मुस्लिमों से दस गुना होने के कारण जो घटित हुआ वह इस दंगे में घटित होना संभव नहीं
था l दोनों समाज के पास बहुत सारे शस्त्र होने के कारण दोनों समाज भारी नुकसान पहुँचा l फिर भी
इसकी ज्यादातर चोट कुकी लोगों को पहुँची क्योंकि वहाँ की पुलिस यंत्रणा मैतेई को न केवल समर्थन दे रही
है अपितु शस्त्र भी दे रही है l इस यादवी में करीबन २०० मृत्यु, ६० हजार से भी अधिक विस्थापित, सैंकड़ो
बलात्कार, २२१ चर्च, १७ मंदिर, और ३४१३ मकान जलकर खाक हो गए l यह सब घटित होते समय
राज्य एवं केंद्र सरकार केवल दर्शक की भूमिका निभा रहे है l किसी ने भी इसका अर्थ दंगा और होनेवाली
हिंसा सरकार को मंजूर है ऐसा निकाला तो यह गलत नहीं होता l कुकी महिलाओं का नग्न जुलूस का
चलचित्र कुछ महिनोंबाद बाहर आने पर मैतेई मुख्यमंत्री बिरेनसिंग ने ‘ऐसी सैंकड़ो’ घटनाएँ होती है फिर
इसका हौआ खड़ा क्यों करते हो ? ऐसा जवाब दिया l इन महिलाओं पर सामूहिक बलात्कार ही हुए l इसमें
कारगील युध्द में लड़े हुए सैनिक की पत्नी का भी समावेश है l अनेक भाजपा नेताओं ने ‘राजस्तान एवं
पश्चिम बंगाल में क्या बलात्कार होते नहीं?’ ऐसा प्रतिप्रश्न किया l प्रधानमंत्रीजी ने इस घटनापर सिर्फ चंद
शब्दों में विचार व्यक्त किए l जब मणिपूर धधकता था तब वे विदेश का दौरा कर रहे थे l मणिपूर यह
म्यानमार सीमा पर एक अत्यंत संवेदनशील राज्य है l वह निरंतर जल रहा है l
हिंदूत्ववादीयों की एक विशेषता है l जिस व्यक्ति या समाज का अधःपतन करना है उस व्यक्ति या समाज को
नियोजनबध्द पध्द्ती से आरोपी के कटघरे में खड़ा कर देते हैं l इसके लिए उनकी पुरी यंत्रणा काम में जुटी
होती है और सभी प्रकार के मार्ग अपनाते हैं l ब्राम्हणवादी पुरान इसके गवाह है l प्राचीनकाल में जो व्यक्ति
वैदिक कर्मकांड के विरुध्द गया उसे दैत्य वा दानव माना गया और उसका वध किया गया l धारा ३७० रदद
करने हेतु उन्होंने कश्मीरी समाज को फुटिरवादी एवं देशद्रोही ठहराया l मणिपूर सुलगने पर कश्मीर के
बलबुते पर वहाँ जो धारा ३७१ है उसे वे रदद् नहीं करना चाहते क्योंकि यह धारा ११ राज्यों के लिए है
और मणिपूर में हिंदू मैतेई की दृष्टी से फायदेमंद है l अब सुलगनेवाले मणिपूर का आरोप हटाने के लिए कुकीं

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की अफीम की खेती बिरेन सिंग ने ध्वस्त की, अतः यह दंगा कुकी लोग कर रहे हैं ऐसा नारा लगा रहे हैं l
इसमें बिरेन सिंग और उनपर वरदहस्त रखनेवाले मोदी और अमित शाह को अफीम व्यवसाय के विरोध में
लड़नेवाले नायक के रूप में मशहूर किया जा रहा है l अमेरिका में बुश ज्युनियर ने जिस प्रकार ‘वॉर ऑन
टेरर’ नामक फरेबी की ठीक उसी प्रकार यह ‘वॉर ऑन ड्रग्ज’ है l
गत अनेक वर्षों से मणिपूर-थायलंड, लाओस एवं कंबोडिया के नशीली चिजों के व्यापार हेतु सुवर्ण तिकोन
जैसा मार्ग है l गत अनेक वर्षों से नशीली चीजों का यह व्यापार मणिपूर की ओर चला गया l विश्व के अनेक
देशों में अनेक आतंकवादी गुट राशीके स्त्रोत के रूप में नशीली चीजों का व्यापार करते हैं l पाकिस्तान के
आतंकवादी या अफगानिस्तान के तालिबानी अफीम की खेती बडी मात्रा में करते हैं l म्यानमार के लष्करी
रियासत ने स्थानीय आतंकवादी गुटों को शांत रखने के लिए उन्हें नशीली चीजों की खेती कर देने की नीति
अपनाई है l म्यानमार के अनेक आतंकवादी गुटों के मणिपूर जैसे राज्यों के आतंकवादीयों से वांशिक
समानता होने के कारण याराना है l लेकिन मणिपूर की अफीम खेती और व्यापार में केवल कुकी समाज ही
नहीं अपितु मैतेई, नागा, मुस्लिम, नेपाली आदि अन्यान्य समाज भी सम्मिलित हैं l चर्च द्वारा अफीम की
खेती को जबर्दस्त विरोध किया है l कुकी समाज के मतानुसार अफीम की खेती का पूरा मुनाफा धनवान
मैतेई और नेता लोग हड़प करते हैं l मणिपूर की पूर्व उच्च पुलिस अधिकारी श्रीमती थोनौजाम बिंद्रा ने तो
बिरेन सिंग नशीली चीजों के व्यापार के आश्रयदाता है ऐसा खुलेआम आरोप किया है l दूसरी ओर बिरेन
सिंग ने २०२२ में शराब पर पाबंदी हटा दी l मद्य के व्यापार में मुख्यतः मैतेई हैं l अतः मणिपूर के सभी
कुकी समाज को नशीला चीजों का निर्माता और व्यापारी कहना का अर्थ है –एक पूरे समाज को गुनाहगार
के कटघरे में खड़ा करके उसकी हत्या हेतु जनमानस तैयार करने जैसा हैं l इन सभी के साथ में मणिपूर में
बेकानूनी घुसे हुए मुस्लिम रोहिंगे एवं मुस्लिम आतंकवादीयों की पुष्टि दी गई l आगे चलकर इस दंगे में चीन
का भी हस्तक्षेप है ऐसा प्रचार शुरू हुआ l स्वयं फौजी प्रमुख ने पत्रकार परिषद लेकर इस बात को ख़ारिज
किया l
मणिपूर शांत होने की कोई भी संभावना दिख नहीं थी तब अकस्मात तौर पर हरियाना का नुह धधक उठा
और वह दावानल पड़ोस के राज्यों में भी पहुँच चुका l मणिपूर का दंगा-हिंदू विरुध्द ख्रिश्चन और बिगर
आदिवासी विरुद्ध आदिवासी ऐसा है तो नुह का दंगा- हिंदू विरुद्ध मुस्लिम ऐसा है l हरियाना राज्य में हिंदू-
मुस्लिम दंगे का इतिहास नहीं है l तो अचानक इस तरह हरियाना में ऐसा क्या हुआ ? इसका कारण है की
३१ जुलाई २०२३ को विश्व हिंदू परिषद ने आयोजित की हुई ब्रजमंडल यात्रा का l नूह जिले के पवित्र हिंदू
स्थलों का पुनर्जीवन करने हेतु विश्व हिंदू परिषद ने यह यात्रा तीन साल पूर्व शुरू की l नूह राजधानी दिल्ली
से केवल ८५ कि.मी. दूरी पर है l नूह का प्राचीन नाम मेवात महाभारतकालीन तीन शिवलिंगों का स्थान l
श्रीकृष्ण वहाँ गोमाताओं को घास आदि खाने के लिए ले जाते थे l मेवात के मिओ समाज ने मुस्लिम
राजसत्ता में मुस्लिम धर्म स्वीकृत किया l आगे चलकर मुस्लिम कट्टरतावादियों ने इस समाज को कट्टरता
की दीक्षा दी l विभाजन के समय इस सभी मुस्लिम समाज ने जान की बाजी लगाकर भारत में रहने का
निश्चय किया l वातावरण सुलग गया l दंगा-फसाद होने लगे l लेकिन इन मुस्लिमों ने महात्मा गांधी जी की
भेंट की l महात्मा गांधी मेवात चले गए और यह दावानल शांत हुआ l आज यहाँ हिंदू २०.३७% तो
मुस्लिम ७९.२% हैं l विश्व हिंदू परिषद ने घोषित किया की इस वर्ष यात्रा में बजरंग दल का कार्यकर्ता एवं
तथाकथित गोरक्षक गुनाहगार मोनू मानेसर सम्मिलित होनेवाला है l मोनू मानेसर यह गुनाहगार नसिर
एवं जुनेद की हत्या हेतु पुलिस चाहती है I १५ फरवरी २०२३ को नूह जिले में गोमाताओं की तस्करी करने

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के जुर्म में बजरंगदल ने नसीर एवं जुनेद का अपहरण किया, उन्हें अमानुषीय मारपीट की और गाड़ी में
रखकर जला दिया l यह गाड़ी हरियाना सरकार की है ऐसा आरोप मुस्लिमों ने किया l नसीर एवं जुनेद
मूलतः राजस्तान के भरतपुर जिले के रहिवासी l घटना हरियाना में हुई, हरियाना पुलिस ने बजरंगदल के
लोगों पर हत्या का जो आरोप था उसे रदद किया I मोनू मानेसर इस यात्रा में शमिल होने की घोषणा होने
पर (प्रत्यक्षरूप में वह शामिल हुआ ही नहीं) बहके हुए मुस्लिम समाज ने पत्थरफेंक की और दंगा शुरू हुआ l
इसमें कुछ विस्थापित रोहिंगे शामिल हुए l इस दंगे में अनेक लोग गंभीररूप में जख्मी हुए, अनेक मकान,
दुकान, गाड़ियाँ जलाई गई l दंगे का परिणाम गुरुग्राम तक पहुँच गया l वहाँ के अंजुमन जामा मस्जिद के
इमाम की समूह ने हत्या की l दंगा राजस्तान में फ़ैल गया लेकिन वहाँ कांग्रेस की सरकार होने के कारण उसे
काबू में लाया गया l अपितु हरियाना में कट्टर हिंदूत्ववादी मुख्यमंत्री खट्टर ने बडी शांति से इस दंगे को फ़ैल
दिया l हिंसा होने दी l हरियाना के खाप पंचायत ने धार्मिक समझौते की भूमिका अपनाने से वह दंगा काबू
में आ गया l इन खेती प्रधान नेताओं ने आरएसएस, बजरंगदल एवं विश्व हिंदू परिषद ने पाबंदी की माँग की
और इसका प्रस्ताव भी किया l मेवात के मुस्लिम किसान कृषि कानूनों के विरोध में हिंदू किसानों के बराबर
बड़ी मात्रा में खड़े हो गए थे l हरियाना सरकार ने गैरकानूनी इमारत के नाम पर बुलडोजर घुमाने का
धडल्ला लगाया है l न्याय के स्थान पर अब हमारे देश में बुलडोजर आया है l
लोकसभा के चुनाव जैसे जैसे नजदीक आ जाएँगे वैसे वैसे अब कितने मणिपूर और नूह सुलगते रहेंगे ऐसा
सवाल खड़ा होता है l अर्थकारण में अपयश आने पर सत्ता में काबू कम होने पर हुक्मशाही प्रवृत्ति के
सत्ताधीश दुसरे राष्ट्र के साथ युध्द आरंभ करते हैं या अपने ही देश में गृहकलह सुलग देते है इसका इतिहास
गवाह है l ये दोनों भी घटनाएँ किसी भी देश को नहीं बन पड़ती l इसमें एक तो सैनिक मारे जाते हैं या आम
इन्सान l दोनों में देश की संपत्ति चकनाचूर हो जाती है l गृहकलह अपितु देश में जो समाज होते हैं उनके
टुकडे कर देता है l देश के समाज जब विभाजित हो जाते हैं तब देश के टुकडे होने में देर नहीं लगती l सत्ता
की लालच में जब कोई नेता या उसका पक्ष देश को धधकता रखता है या धधकती आग को और भड़का देता
है तब देश की एकता को धोखा निर्माण होता है l देश की अखंडता एवं समाज की एकता कायम रखनी हो
तो ऐसा नेता और उसके पक्ष को सत्ता से दूर हटाना आवश्यक होता है l

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