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*वफादार प्राणी*

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शशिकांत गुप्ते

सीतारामजी ने कहा आज तो मैं कुछ लिख नहीं पाया।
मैने पूछा क्यों?
सीतारामजी ने कहा शहर की नगर निगम की टीम सड़क पर स्वच्छंदता से विचरण करने वाले श्वानों को पकड़ ने आई थी।
मोहल्ले के पशु प्रेमियों ने विरोध किया,नगर निगम की टीम और पशु प्रेमियों में तू तू मैं मैं हो गई।
माहौल कोलाहल में बदल गया।
इसीलिए कुछ लिख नहीं पाया।
मैने कहा नगर निगम की टीम सड़क छाप कुत्तों को पकड़ ने आई थी।
सीतारामजी ने मुझसे कहा ऐसा नहीं बोलते हैं। इन्हे Street Dogs कहते हैं।
मैने कहा एक ही बात है,फिरंगियों की भाषा में street dogs बोलो या सड़क छाप या आवारा कुत्ते बोलो।
मैने कहा आश्चर्य की बात तो यह को नगर निगम कर्मी श्वानो में भी आवारा श्वानो को पहचान लेते हैं।
सीतारामजी ने कहा जो भी हो, लेकिन इन सड़क छाप श्वानोंं के कारण मोहल्ले में बहुत परेशानी मतलब Nuisance होता है।
सड़कों पर स्वच्छंदता से विचरण करने वाले हमेशा टोली में रहते हैं। इनमे से कोई एक भौंकने लगता है तो,टोली के सभी भौंकने लगते हैं।
मैने कहा उन्हे भौंकने के लिए कोई कारण या कोई मुद्दा थोड़ी चाहिए। अनावश्यक भौंकते हैं,जैसे इन्हे कोई अदृश्य भय सता रहा हो।
कुत्तों लिए यह कहावत प्रचलित है,कभी कभी कुत्ते के दिन भी आतें हैं।
ऐसी एक किवदंती है कि,इनके क्षेत्र में कोई हाथी आ जाता है,तो यह हजारों की तादाद में भौंकते गलते हैं।
कुत्तों के लिए एक यह भी कहावत प्रचलित है,कुत्ता बैल गाड़ी के नीचे चलता है,तो उसे अंहकार रूपी भ्रम हो जाता है कि,बैल गाड़ी वही हांक रहा हैं। कुत्ता भ्रमवश बैलों के श्रम को स्वयं की उपलब्धि मानता है।
सीतारामजी ने मुझसे कहा मैने आपको सिर्फ इतना ही कहा नगर निगम की टीम श्वानों को पकड़ने आई, अपने इस मुद्दे का इतना रायता फैला दिया।
मैने कहा क्षमा करना, आप बताईये ,जब नगर निगम के टीम पकड़े आई तब क्या हुआ?
सीतारामजी ने कहा तब जितने भी सड़क छाप थे सभी पशु प्रेमियों के पालतू हो गए।
वैसे ये सभी सड़क पर फालतू घूमते रहते हैं। लेकिन निगम टीम के आते ही सभी पालतू हो जातें हैं।
स्वप्न सुंदरी का खिताब प्राप्त अभिनेत्री के अभिनेता पति तो कुत्ते कामिने मैं तुम्हारा खून पी जाऊंगा जैसे संवाद बोलने के लिए प्रसिद्ध है।
एक खास बात श्वान बहुत वफादार प्राणी है। याद रखना किसी वफादार को गलती से श्वा ….न मत बोल देना।
कुत्ते को जब क्रोध आता है,तब वह लपकता है,लबूरता है और काटता है।

शशिकांत गुप्ते इंदौर

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