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*मध्यप्रदेश के किसानों ने अरबी की खेती से रच दिया इतिहास, एक एकड़ में 4 लाख की कमाई*

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मध्यप्रदेश के किसानों ने अरबी की जैविक खेती से रच दिया नया इतिहास. बिना रासायनिक खाद के कम मेहनत में बंपर उत्पादन और 4 लाख तक की आमदनी का राज जानिए इस रिपोर्ट

किसानी के पुराने तरीकों को छोड़कर अब समय है ऐसे विकल्पों को अपनाने का जो सिर्फ जमीन की उपजाऊ शक्ति को लौटाएं, बल्कि सेहतमंद आमदनी का ज़रिया भी बनें. मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में कुछ किसानों ने इस सोच के साथ अरबी की जैविक खेती शुरू की और आज उनकी फसल, मेहनत और मुनाफा तीनों लोगों को चौंका रहे हैं.

रासायनिक खाद नहीं, जैविक विधि से चमकी जमीन और आमदनी
अरबी ऐसी फसल है जिसे बिना किसी केमिकल या महंगे कीटनाशकों के भी शानदार उत्पादन मिल सकता है. स्थानीय किसान बताते हैं कि हमने सिर्फ गोबर खाद, वर्मी कंपोस्ट और जीवामृत का इस्तेमाल किया ना सिर्फ लागत घटी, बल्कि स्वाद और गुणवत्ता भी जबरदस्त निकली. कुछ किसानों ने इसे ड्रिप सिंचाई से जोड़ा, जिससे पानी की बर्बादी भी नहीं होती और पौधों को ज़रूरत के अनुसार ही पानी मिलता है.

तीन महीने में फसल तैयार, मेहनत कम, मुनाफा ज़्यादा
अरबी मुख्यतः गर्मी के मौसम में बोई जाती है और लगभग 90 से 100 दिनों में तैयार हो जाती है. इसकी खेती के लिए जरूरी है अच्छी जलनिकासी, ताकि जड़ें सड़ें नहीं. शुरुआती 30–40 दिन में नियमित पानी देना जरूरी है, उसके बाद फसल खुद संभालने लगती है.

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