पिछले सौ साल की सामंती, पूंजीवादी और फासीवादी सोच और मानसिकता के घालमेल ने आदमी को और,,,,,,,,,
ठग,
झूठा,
दास,
छली,
ढोंगी,
लोभी,
कपटी,
बेईमान,
मक्कार,
शोषक,
भ्रष्टाचारी,
जातिवादी,
सांप्रदायिक,
गुलाम,
अंधविश्वासी,
धर्मांध,
श्रद्धांध,
लालची,
अविवेकी,
अतर्कशील,
अवैज्ञानिक,
हिंसक ,
हत्यारा,
अपराधी,
दंगाई,
छुआछाती,
पाखंडी,
फासीवादी,
लडालू,
झगड़ालू,
बेरहम,
नफरती,
जंगली,
असभ्य,
बर्बर,
दरिन्दा,
दगाबाज,
शिकारी,
वहशी,
लुटेरा,
लंपट,
पतित,
शातिर,
शैतान,
गैंगस्टर,
अनैतिक,
अज्ञानी,
हकमारू,
चरित्रहीन,
सिद्धांतहीन
और
विश्वासघाती
बना दिया है।
,,,, मुनेश त्यागी

