राकेश कायस्थ
मोदीजी की आलिंगन कूटनीति जगत विख्यात है। पश्चिमी मीडिया इसे बेयर हग अर्थात भालू सरीखे आलिंगन की संज्ञा देता है। भालू जब किसी को आगोश में लेता है तो बहुत जोर से जकड़ता है।
इंसानों के बीच बेयर हग गर्मजोशी जताने का एक ज़रिया होता है। इसमें कोई शक नहीं कि आलिंगन कूटनीति के ज़रिये मोदीजी ने पूरी दुनिया में बहुत से मित्र बनाये हैं। मुझे जानकारी नहीं है लेकिन यकीनन इसका भारत को लाभ भी हुआ होगा।
राष्ट्र प्रमुखों से अपने व्यक्तिगत रिश्तों का उल्लेख मोदीजी अक्सर करते हैं। उन्होंने एक बार बताया कि बराक ओबामा से उनकी तू-तड़ाक में बात होती है। कमोबेश कुछ ऐसे ही रिश्ते बाकी विश्व नेताओं के साथ भी हैं।
राफेल डील वाले फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के साथ मोदीजी की ये तस्वीरे काफी चर्चा में रही थीं। बकौल अरूण शौरी “ सामने से गले मिलकर प्रधानमंत्री का जी नहीं भरा तो उन्होंने फ्राँस के राष्ट्रपति को दोबारा पीछे से पकड़ लिया।“
पकड़म पकड़ाई वाले इस प्रेम दर्शन का एक उदासी भरा पहलू भी है। कई ऐसी तस्वीरें मीडिया में आई हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि इतनी गर्मजोशी के बावजूद सामने वाले देश के राष्ट्राध्यक्ष ने हमारे प्रधानमंत्री को इग्नोर किया।
जर्मनी की तत्कालिक चांसलर मार्केल की एक वीडियो वायरल हुआ था, जब मोदीजी उनसे हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़े लेकिन मार्केल उन्हें नज़रअंदाज़ करके आगे बढ़ गईं।
ताजा मामला एआई समिट का है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रॉ से मोदीजी के रिश्ते अच्छे बताये जाते हैं। राष्ट्रपति मैक्रॉ एक-एक करके तमाम विश्व नेताओं से मिले। मोदीजी के करीब आये। मोदीजी उठने को थे कि मैक्रॉ आगे बढ़ गये।
मेरे लिए इसे मानवीय भूल मान पाना कठिन है। भारतीय विदेश मंत्रालय को इस बात का संज्ञान लेना चाहिए और माकूल मौके पर द्विपक्षीय बातचीत में फ्रांस के सामने यह मुद्दा उठाना चाहिए। सवाल देश की प्रतिष्ठा का है। वीडियो कमेंट बॉक्स में है। आप स्वयं देखें और तय करें कि इसे क्या कहा जाये।

