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भारत किस दृष्टिकोण से एक लोकतांत्रिक देश है ?

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निर्मल कुमार शर्मा

       अभी पिछले दिनों मुंबई स्थित बंदरगाह पर एक बड़े से रईसों की विलासितापूर्ण क्रूज जहाज के माध्यम से मादक पदार्थों की तस्करी के सिलसिले में एनसीबी यानी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा मारे गये छापे में प्रमुख्य तस्करों की तरफ से आँख बंद करके अभिनेता शाहरूख खान के बेटे आर्यन को इस आधार पर सलाखों के पीछे करना कि उसके खिलाफ कुछ आपत्तिजनक संदेश हैं,बहुत ही हास्यास्पद और हतप्रभ करनेवाली बात है ! कितने दुःख और विस्मयजनक बात है कि मोदीजी के मित्र अडानी के स्वामित्व वाले कच्छ के मुंद्रा नामक बंदरगाह पर अभी पिछले दिनों 3000 किलोग्राम अवैध हेरोइन पकड़ी गई थी,जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 2 खरब 10 अरब रूपयों के लगभग आंकी गई है !थोड़ा उससे भी पीछे चलें तो 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में 350 किलो आरडीएक्स से कराये गये प्रायोजित हमले में हमारे 44 जवानों की क्रूरतम् तरीकों से हत्या कर दी गई ! इन दोनों ही घटनाओं से इस देश का नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो,सीबीआई,सीआईडी,आईबी,रॉ जैसी खुफिया एजेंसियां अपने मुँह पर ताला लगाए बैठीं रहीं हैं ! मुंबई स्थित बंदरगाह पर एक बड़े से रईसों की विलासितापूर्ण क्रूज जहाज में अवैध तस्करी में छापेमारी के मामले में तो एक बहुत ही नीचतापूर्ण बात सामने आ रही है,इस केस में मुंबई के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के एक क्षेत्रीय निदेशक पर तो इस मामले में 25 करोड़ रूपयों के रिश्वत माँगने का भी आरोप लग चुका है और उसकी विभागीय जाँच भी शुरू हो चुकी है !नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के उस क्षेत्रीय निदेशक ने यह बात भी स्वीकार कर लिया है कि वह वही किया जैसा उसे ऊपर से आदेश मिला ! 
        इस देश,इस राष्ट्र राज्य,यहाँ के लोकतंत्र, यहाँ के संविधान,यहाँ के गरीबों,यहाँ के मजदूरों, यहाँ के किसानों या यहाँ के संपूर्ण आवाम के लिए कितने शर्म और दुर्भाग्य की बात है कि यहाँ की स्वायत्त संस्थाओं यथा सीबीआई,चुनाव आयोग, आयकर विभाग,प्रवर्तन निदेशालय और यहां के न्यायालय भी इस पावन और अभीष्ट कर्तव्य के लिए बनाए गए थे,ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्तारूढ़ कर्णधारों के जनहित,लोकतान्त्रिक व न्यायोचित आदि कामों में विचलन पैदा हो,तो उक्तवर्णित ये सभी स्वायत्त संस्थाएँ उनकी नकेल कसकर उनको सही रास्ते पर ले आ सकें,लेकिन देश की स्वतंत्रता के 74 साल के बाद इन स्वायत्त संस्थानों की आज की दशा बहुत ही दारूण, दयनीय व सत्ता के सामने उनकी चाटुकारिता करना ही रह गया है, इसके ठीक विपरीत सत्ता के कर्णधारों द्वारा की जानेवाली दुर्नीतियों के खिलाफ लोकतांत्रिक आवाज उठाने वालों को कुचलना और सत्ता के साथ गलबहियाँ डालनेवाले,तस्करों,विभिन्न तरह के मॉफियाओं, बलात्कारियों,हत्यारों आदि को बचाना और उन्हें संरक्षण देना ही रह गया है ! उक्त सभी तथाकथित स्वायत्त संस्थाएं वर्तमानसमय की सत्तारूढ़ सरकारों की अपने विरोध में बोलनेवाले लोगों की निर्ममतापूर्वक दमन करने की एक घातक हथियार मात्र बनकर रह गईं हैं ! अब ये सभी संस्थाएं वर्तमान सरकार की दुर्नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों,प्रोफेसरों,डॉक्टरों,कवियों,लेखकों और स्वतंत्र चिंतकों को जेल में डालकर उन्हें तिल-तिलकर,घुट-घुटकर शारीरिक और मानसिक यंत्रणा देने की एक माध्यम मात्र बनकर रह गईं हैं ! उदाहरणार्थ मनगढ़ंत व फर्जी मुकदमें चलाकर स्टेन स्वामी,गौतम नवलखा,वरवरा राव,प्रकाश तेलतुंबड़े,श्रीमती सुधा भारद्वाज जैसे लोगों को वर्षों से जेलों में सड़ाया और मौत के घाट उतारा जा रहा है ! इससे भी बिस्मित करनेवाली बात यह है कि एक गुँडे मंत्री के कुपुत्र द्वारा दिनदहाड़े, सरेआम किसानों को रौंदकर मारनेवाली दुःखद घटना की निष्पक्ष जाँच करने वाले पुलिस अधिकारियों की रातों-रात स्थानांतरण कर दिया जाता है,सुबोध कुमार सिंह जैसे ईमानदार व कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी की सत्ता के प्रायोजित गुँडों द्वारा निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी जाती है ! निष्पक्ष व ईमानदार सीबीआई जज तक की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी जाती है ! सत्ता के दुर्नीतियों के खिलाफ निर्णय देनेवाले जजों को दूरस्थ व महत्वहीन जगहों को रातों-रात किसी न किसी बहाने स्थानांतरण करके उन्हें और अन्य जजों को गंभीरतापूर्वक चेतावनी दे दी जाती है ! कितने शर्म,दुःख व हतप्रभ करनेवाली बात है कि इतना अलोकतांत्रिक,असंसदीय और जनविरोधी कुकृत्य करने के बाद भी भारत की वर्तमानसमय की व्यवस्था को बेशर्मी के साथ  विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश कहा जा रहा है,जबकि आज भारत में किसी भी अधिनायकवादी देश से भी ज्यादे अलोकतांत्रिक व फॉसिस्ट तथा अमानवीय कुकृत्य किया जा रहा है ! 




निर्मल कुमार शर्मा


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