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गलगोटिया विश्वविद्यालय ने विश्वगुरु के देश को विश्व में बदनाम किया

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    -सुसंस्कृति परिहार 

एआई समिट के दौरान जहां भारत अपने नवाचार के माध्यम से दुनिया के नक्शे में अपनी साख बढ़ाना चाहता था वहां दांव उल्टा और भारी पड़ गया। उत्तर प्रदेश नोएडा के गलगोटिया विश्वविद्यालय ने इस दौरान भारत मंडपम में जिस तरह की घटिया हरकत की है वह अक्षम्य है।सारा मामला एक महिला प्रोफेसर पर डाल कर माफी मांगना काफ़ी नहीं है।इसके लिए विश्वविद्यालय के पिता-पुत्र गलगोटिया और विश्वविद्यालय प्रमुखों पर कार्रवाई होनी चाहिए।कहा जा रहा है गलगोटिया विश्वविद्यालय को समिट से बाहर कर दिया गया है।

बताया जा रहा है कि गलगोटिया विश्वविद्यालय जिसने कुछ ही समय पहले चीनी ‘रोबो-डॉग’ (Robodog) को अपना बता कर सुर्खियों में आया था , अब एक नए विवाद में फंसता हुआ नजर आ रहा है। इस बार मामला एक ‘सॉकर ड्रोन’ (Soccer Drone) से जुड़ा हुआ है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि ग्रेटर नोएडा स्थित इस यूनिवर्सिटी के छात्रों ने जिस ड्रोन को अपनी ‘इनोवेशन’ के रूप में पेश किया, वह असल में एक कोरियाई तकनीक है।  वैसे भी दिल्ली में चल रही इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट सुर्ख़ियों में बनी हुई है। एक ओर इस समिट के दौरान अव्यवस्था और कुप्रबंधन के आरोप लग रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर इसमें शामिल होने को लेकर गलगोटिया विश्वविद्यालय ने जिस तरह का अपराध किया है।उससे ये जाहिर है कि विश्वविद्यालय में किस तरह के झूठे अन्वेषण के काम हो रहे होंगे। विदित हो इस विश्वविद्यालय को प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ समय पूर्व देश का सबसे अच्छा विश्वविद्यालय कहकर इसका सम्मान भी किया था।

 पिछले दिनों जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर आरोप लगा कि उन्होंने चीन निर्मित एक रोबो डॉग को अपना बताकर समिट में पेश किया तो उसकी श्रेष्ठता प्रमाणित हो गई।

हालांकि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर अपने बयान में गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने लिखा, “हमारे स्टॉल पर मौजूद हमारी एक प्रतिनिधि को तकनीकी जानकारी सही तरीक़े से नहीं मिली थी। कैमरे पर आने के उत्साह में उन्होंने उत्पाद से जुड़ी कुछ ग़लत जानकारी दे दी, जबकि उन्हें मीडिया से बात करने की अनुमति भी नहीं थी।””हम आपसे निवेदन करते हैं कि इस स्थिति को समझें, क्योंकि हमारा मक़सद किसी भी तरह से इस इनोवेशन को ग़लत तरीके से पेश करना नहीं था। गलगोटिया यूनिवर्सिटी शैक्षणिक ईमानदारी, पारदर्शिता और अपने काम की ज़िम्मेदार प्रस्तुति को लेकर प्रतिबद्ध है. आयोजकों की भावना का सम्मान करते हुए हमने कार्यक्रम स्थल ख़ाली कर दिया है।”जबकि सच यह है कि दर्शकों ने इसकी सचाई बताई और फिर स्टाल की बिजली काटी गई उसे हटाया गया।

ये घटना इस बात का जीता जागता प्रमाण है कि झूठों के राज में देश में जहां झूठम झूठ बुलंदी पर है। वोट चोरी से लेकर एपस्टीन फाइलें सामने आ रही हैं।खजाने खाली हो रहे हैं।बैंक लुटेरे विदेश भाग चुके हैं ऐसे मु्ल्क में यदि विश्वविद्यालय की चोरी पकड़ी भी जाती है।तो  वह गुनाह कैसे हो सकता है। गलगोटिया पिता-पुत्र तो भारत के रत्न हैं।चोरी पकड़ी गई है किंतु माफ़ी वीरों ने माफी मांग ली है किस्सा खत्म कर दें। वरना विश्व में और भी अधिक बदनामी होगी।

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